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महाकाव्य चांगर

2017-08-15 17:05:40
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चीनी महाकाव्य चांगर में चीन में बसे मंगोल महावीर चांगर की कहानी वर्णित है । चांगर दो वर्ष की आयु में अनाथ बन गया और तीन वर्ष की आयु में युद्ध में भाग लेने लगा और सात वर्ष की आयु में महावीर बन गया ।

महाकाव्य चांगर 15वीं सदी से 17वीं सदी तक मंगोल जाति के वेइलात नामक एक कबीला इलाके में प्रकाश में आया । वेइलात का मतलब वन का कबीला है ।यह कबीला उत्तर पश्चिमी चीन के सिन चांग के आर्टाइ पहाड़ में बसा था ।

जब चांगर दो वर्ष के था ,बर्बर मांगकुस लोगों ने उन के गृहस्थान पर कब्जा कर उन के माता पिता को मार डाला । माता पिता की हत्या का बदला लेने के लिए चांगर तीन वर्ष की आयु में युद्ध मैदान में उतरा । सात वर्ष की आयु में अपने असाधारण योगदान के लिए वह अपने कबीले के राजा निर्वाचित हुए ।चांगर ने अपने 35 फौजी सरदारों और 8000 सिपाहियों का नेतृत्व कर मांगकुस को पूरी तरह पराजित किया और अपनी जन्मभूमि की रक्षा की और उस का प्रभाव 44 राज्यों तक फैला । कठोर संघर्ष में चांगर ने अपनी असाधारण प्रतिभा दिखा कर एक आदर्श राज्य स्थापित किया ।इस आदर्श देश के नागरिक दीर्घआयु जीते थे और हमेशा 25 वर्ष की आयु का यौवन बनाए रखते थे । राज्य में बारहों मास हरियाली छायी रहती थी, यानी राज्य में सर्दी व गर्मी की दो ऋति नहीं थी । राज्य में सभी नागरिक सुखमय जीवन बिताते थे ।

महाकाव्य चांगर की पात्र रचना में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त हुई ।इस महाकाव्य में चांगर के दुखद बचपन और युद्ध अनुभव का विस्तृत वर्णन किया गया । चांगर की बुद्धिमान ,कुशल व बहादुर छवि से लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता था । हुंगूर इस महाकाव्य में उल्लिखित दूसरे महावीर थे ।महाकाव्य में हुंगूर में मंगोलों के 99 श्रेष्ठ चरित्र चर्चित हुए । वे बहादुर , जन निष्ठ और दुश्मन से नफरत होता था और अपने कबीले के लिए अपने प्राण का बलिदान देने को तैयार थे ।

महाकाव्य चांगर में आर्टाइ पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव वर्णन किया गया और मंगोल जाति के श्रेष्ठ चरित्र और विशेष सौंदर्य बौध का परिचय किया गया । महाकाव्य में वेइलात की भाषा के प्रयोग को बड़ा महत्व दिया गया और बडी संख्या में मंगोल लोकगीत ,श्लोक व कहावत भी प्रयोग किए गए थे ।

महाकाव्य चांगर मंगोल जाति के प्राचीन साहित्य की एक चोटी की रचना मानी जाती है ,जिस से मंगोल जाति के साहित्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा । इस महाकाव्य को सांस्कृतिक संरक्षण परियोजना में चीन सरकार की प्राथमिकता मिली ।

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