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दक्षिण के लिए उत्तर की दिशा में जाने की कहानी

2017-08-15 17:16:00
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ईसा पूर्व पांचवीं से तीसरी शताब्दी तक चीन का युद्धरत रज्य काल था , उस काल में चीन की भूमि पर अनेक राज्य स्थापित हुए एक दूसरे से लड़ रहे थे । सभी राजा दूसरों पर विजय पाकर महा राजा बनने की कोशिश में थे और अपने महाकांक्षा को पूरा करने के लिए बुद्धिमान सहायकों की खोज भी करते थे । विई राज्य का राजा भी महा राजा बनने का सपना देख रहा था , वह अपने पड़ोसी राज्य चाओ पर हमला बोलने को तैयार हुआ । खबर सुन कर विई राज्य का सहायक , मंत्री चील्यांग बाहर से जल्दी वापस लौटा और विई राजा को मनाने राजमहल जा पहुंचा ।

विई राजा चाओ राज्य पर धावा बोलने की योजना बनाने में जुटा था , जब चील्यांग को इस तरह जल्दबाजी से लौटे देख कर उसे बड़ा ताज्जुब हुआ और उस ने पूछा कि तुम इतना जल्दबाजी से मुझ से मिलने आया हो , जरूर फौरी काम हो । चील्यांग ने कहाः महामहिम राजा , अभी रास्ते में मैं ने एक आश्चर्यजनक बात देखी है , इसे राजा को सुनाने आ पहुंचा हूं । विई राजा को कौतुहट हुई ,उस ने चील्यांग से जल्दी से कहानी बताने को कहा । चील्यांग की कहानी इस प्रकार शुरू हुईः रास्ते में मैं ने एक गाड़ी देखी है , जो उत्तर की दिशा में जा रही है । मैं ने गाड़ीवान से पूछा , तुम कहां जा रहे हो ? गाड़ीवान ने कहा , मैं छुन राज्य को जा रहा हूं । मुझे ताज्जुब हुआ कि छुन राज्य तो दक्षिण में स्थित है , वह क्यों उत्तर की दिशा में जा रहा है । तो मैं ने फिर पूछा, छुन राज्य दक्षिण में है , तुम्हारी गाड़ी क्यों उत्तर की ओर जा रही है ? गाड़ीवान ने बड़ी लापरवाही से कहा, कोई बात नहीं , मेरा घोड़ा बहुत तेज गति से दौड़ सकता है , वह मुझे छुन राज्य ले जाएगा । मुझे और समझ में नहीं आ सका , तो पूछाः मान लो , तुम्हारा घोड़ा बहुत बढिया है , फिर तो दिशा छुन राज्य को नहीं जाती है । उस ने फिर लापरवाही से कहा, चिंता मत , मेरे पास धन दौलत बहुत है । मैं ने फिर आश्चर्य के साथ पूछा, मान लो , तुम्हारा पैसा काफी है , फिर तो रास्ता छुन राज्य को जाने वाला नहीं है । गाड़ीवान ने परिहास करते हुए कहाः तो क्या हर्ज होगा , मैं गाड़ी हांकने में कुशल हूं । चील्यांग ने कहानी सुनाते हुए कहा कि महामहिम राजा , वह गाड़ीवान अंत में भी मेरा सलाह नहीं मानता और वह उत्तर की दिशा में चला जा रहा । विई राजा ने कहानी में बड़ा मजा ले कर हंसते हुए कहा कि दुनिया में इसी प्रकार का बुद्धु भी है । चील्यांग ने मौका पा कर कहा कि महामहिल राजा , आप सभी राजाओं का मुखिया बनना चाहते हैं न , तो इस के लिए पहले देश के सभी लोगों से समर्थन मिलना चाहिए । लेकिन आप महज अपनी शक्ति के बल पर अपने से छोटे चाओ राज्य पर विजय पाने से अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाना चाहते हैं , इस का निश्चय ही ठीक उलटा परिणाम निकलेगा , जैसा कि वही गाड़ीवान हो , जो दक्षिण में स्थित छुन राज्य को जान के लिए उलटे उत्तर की दिशा में दौड़ रहा हो , इस तरह जितना वह तेज गति से दौड़ेगा , उतना दूर छुन राज्य पहुंचने के लक्ष्य से ज्यादा होगा । महामहिम आप का लक्ष्य भी इसी तरह पूरा नहीं हो सकता है ।

विई राजा को तभी मालूम हुआ कि असल में चील्यांग ने इस कहानी से उन्हें चाओ राज्य पर हमला बन्द करने के लिए समझाने की कोशिश की है , अच्छी तरह सोचने पर उन्हें चील्यांग का तर्क सही भी मानना पड़ा और उस ने अंत में चाओ राज्य पर हमले की योजना त्याग दी ।

चीन में दक्षिण के लिए उत्तर की दिशा में जाना शीषर्क नीति कथा काफी लोकप्रिय है , जो अकसर लक्ष्य की उलटी दिशा में कोशि करने की हरकत बताने में प्रयोग किया जाता है ।

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