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च्येन श मठ की कहानी

2017-08-15 17:19:00
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उत्तर चीन के शानसी प्रांत की राजधानी थाईयुन के उप नगर में स्थित च्येन श मठ देश के सुप्रसिद्ध प्राचीन उद्यानों में से एक है ।

च्येन श मठ थाईयुन के दक्षिणी उप नगर में खड़े श्यानवङ पहाड़ की तलहटी में स्थित है , जहां से च्येन श्वी नदी का पानी निकलता है । पहाड़ों और नदियों से घिरे मठ में करीब सौ भवन , महल , मंडप ,मंच , पुल व कृत्रिम पहाड़ देखने को मिलते हैं । इस सुन्दर रमणिक स्थान के बारे में बड़ी रोमांचक एतिहासिक कथा प्र���लित है ।

ईसा पूर्व 1064 में चीन के प्राचीन चो राजवंश के संस्थापक राजा चो वुवांग सांग राजवंश का अंत करने के बाद दूसरे साल स्वर्गवासी हो गया , उस का पुत्र चीसुंग राजा की गद्धी पर बैठा , जो चीन के इतिहास में चो छङवांग कहलाता है । कहा जाता था कि चो छङवांग जब राजा बना , वह एक छोटा बच्चा था । चो राजवंश के प्रमुख मंत्री चो कोंग रोज उसे पीठे पर बिठाए राज महल जाता था और राज्य के मामलों का निपटारा करने में राजा छङवांग की मदद करता था । राजा उम्र में बहुत छोटा होने की स्थिति में राज सत्ता का बागडोर चो कोंग के हाथ में था , चो कोंग एक बड़ा वफादार मंत्री था , उस ने राजा की मदद के लिए राज्य में हुए कई विपलवों को शांत कर दिया और छोटे राजा को नेक शासक बनने की शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ा ।

एक दिन , छोटा राजा छङवांग और उस का छोटा भाई शुची दोनों राजमहल के पिछड़वाले आंगन में खेल रहे थे , उस ने पेड़ का एक पत्ता पदाधिकारी सूचक तख्ता के आकार में काट कर अपने भाई शु ची को दिया और कहा कि मैं तुम को एक जागिर दूंगा । खबर चोकोंग के पास पहुंची । कुछ दिन बाद चो कोंग ने चो छङवांग से एक मुहुर्त समय चुन कर शुची को जागिर प्रदान करने का आज्ञा देने का आग्रह किया । चो छङवांग ने हंसते हुए कहा कि मैं उस के साथ मजाक कर रहा था । लेकिन चो कोंग ने गंभीरतापूर्वक कहा कि राजा मनचला मजाक नहीं कर सकता है , उस की बातें राजवंश के इतिहासकार कलमबंद करता है और मंत्री और अधिकारी उस का पालन करते हुए प्रसारित भी करते हैं । चो छङवांग ने गंभीरता से इस मामले को लिया और तांग नाम का एक जागिर अपने छोटे भाई को प्रदान किया । यह चीन के इतिहास में एक मशहूर कहानी बन गई ।

तत्कालीन तांग जागिर आज के शानसी प्रांत की यीस्यान काऊंटी की जगह पर था । बड़ा होने के बाद चो छङवांग का छोटा भाई शु ची अपने जागिर तांग पर प्रशासन करने लगा । उस ने वहां कृषि का विकास किया , सिंचाई संस्थापनों का निर्माण किया , जिस के परिणामस्वरूप जागिर की प्रजा सुखचैन का जीवन बिताती रही । शुची के प्रशासन को लगों से बड़ी सराहना मिली । उस के पुत्र छीफु ने जागिर का राजा बनने के बाद जब देखा कि च्येन श्वी नदी के पानी से सिंचित तांग की भूमि अच्छी तरह प्रजा को खिलाती थी , तो उस ने तांग का नाम बदल कर च्येन रखा । इस के उपरांत शानसी को च्येन कहलाने लगा । शुची की स्मृति में चयेन राज्य के लोगों ने चयेनश्वी नदी के उद्गम स्थल पर एक मंदिर बनाया , नाम रखा शु ची मठ ,उसे च्येन श मठ के नाम से बाद में बहुत मशहूर हो गया ।

च्येनश मठ के निर्माण का समय अब निश्चित नहीं हो पाया है । उस के बारे में सब से पुराना एतिहासिक उल्लेख सन् 466 से 572 तक के उत्तरी व्वी राज काल में प्रकाशित नद पर्वत वृतांत में मिलता है । यदि च्येनश मठ का इतिहास उत्तरी व्वी राजकाल से गिना जाए , वह भी एक हजार पांच सौ साल ज्यादा लम्बा है । लम्बे कालांतर में च्येनश मठ का कई बार जीर्णोंद्धार किया गया और विस्तार भी किया गया, जिस से उस का रूपाकार काफी बदल भी गया । सन् 646 में थांग राजवंश के दूसरे सम्राट ली शमिन ने च्येनश मठ में एक मशहूर शिलालेख लिखा और उस का बड़े पैमाने पर पुनःनिर्माण करने की आज्ञा दी । ईस्वी 11 वीं शताब्दी में सुंग राजवंश के सम्राट ने शुची की माता यीच्यांग की स्मृति में एक विशाल देवी मां भवन बनवाया। इस के बाद देवी मां भवन को धुरी मान कर चारों ओर अनेकों वास्तु निर्माण किए गए , जिन में जल दर्पण मंच , देवता मंच , स्वर्ण मानव मंच और अमृत तालाब मंडप जैसे विभिन्न कालों के निर्माण शामिल हैं । विभिन्न कालों में निर्मित निर्माण बड़े अनोखे रूप से एक दूसरे के शोभा बढाते हैं , वे मंदिर के भवन और आंगन सदृश्य लगते हैं और राजमहल के भवन समूह भी समान दिखते हैं ।

च्येनश मठ में विभिन्न एतिहासिक कालों के सुन्दर वास्तु निर्माणों के अलावा चो राजवंश और स्वी राज्य काल के देवदार पेड़ और चीड़ उगे हैं । कहा जाता था कि चो राजवंश का देवदार पेड़ ईसापूर्व 11 वीं से आठवीं शताब्दी तक लगाये गये थे , जो देवी मां भवन के बाहिने भाग में खड़े हैं , पेड़ जमीन से 40 डिग्री का कोण बनाए खड़े हैं , जो भवन को पूरा छाया देते हैं । चो राज्य के देवदार पेड़ अब तक तीन हजार साल पुराना हो गये है और स्वी राज्य के चीड़ एक हजार पांच सौ साल ज्यादा पुराना है । ये प्राचीन पेड़ आज भी हरे भरे और मजबूत नजर आते हैं , उन की हरियाली और मठ में बल खाती बहती झरनों के स्वच्छ पानी से अद्भुत सुन्दर प्राकृतिक समा बन जाता है । च्येनश मठ चीन का एक आकर्षक दर्शनीय स्थान बन गया है ।

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