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छ्यानलिंग मकबरे का अक्षर रहित समाधि प्रस्तर

2017-08-15 17:19:00
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पश्चिमी चीन के श्येनसी प्रांत में वी ह नदी के उत्तर में मशहूर छ्यानलिंग मकबरा स्थित है । चीन के दो हजार साल लम्बे सामंती इतिहास में यह एकमात्र ऐसी शाही मकबरा है , जिस में दो सम्राट दफनाए गए थे । छ्यानलिंग मकबरे में थांग राजवंश के सम्राट ली ची और चाओ राजवंश की सम्राट वु चेत्यान समाधिस्थ हुए थे , दोनों पती पत्नी थे और दो राजकालों के अलग अलग सम्राट भी थे । वु चेत्यान चीन के इतिहास में एकलौती महिला सम्राट थी , उस की जीवनी असाधारण रुचिकर थी । उस के स्वर्गवास के बाद उस की समाधि के सामने एक विशाल प्रस्तर स्तंभ खड़ा किया गया , पर उस पर कोई शब्द नहीं लिखा गया , इसलिए वह अक्षर रहित समाधि प्रस्तर के नाम से चीन के इतिहास में नामी रहा है । फिलहाल छ्यानलिंग मकबरे को विश्व सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल करने का आवेदन चल रहा है ।

वु चेत्यान का जन्म सन् 624 में हुआ था , 14 साल की उम्र में वह थांग राजवंश के दूसरे सम्राट थांग थाइचुंग की छोटी रानी के रूप में राज महल में बुलाई गई । युवावस्था में ही वु चेत्यान का अद्भुत दृढ़ स्वभाव और साहस प्रकट हुआ था । थांग थाइचुंग के पास एक मशहूर तेज तबियत वाला घोड़ा था , जो किसी से भी वशीभूत नहीं हुआ था । वु चेत्यान ने थांग थाइचुंग से कहा कि मैं उसे वश में ला सकती हूं , लेकिन इस के लिए लोह चाबुक और चाकू की आवश्यकता है । उसे वश में लाने के लिए पहले लोह चाबुक से मार मार कर उस की मरम्मत करो , वश में नहीं आने पर फिर उस के सिर पर दे मारो , इस से भी काम नहीं बनेगा , तो चाकू से उस का गला काट कर मारो । वु चेत्यान की बातों पर थांग थाइचुंग को अत्यन्त आश्चर्य हुआ , उसे लगा कि किसी भी सुशील और शिष्टाचार रानी के मुंह से ऐसी क्रूरतापूर्ण बातें नहीं निकलनी चाहिए । लेकिन युवाराज ली ची को मन में अपने से चार साल बड़ी वु चेत्यान बहुत ही पसंद आयी ।

सम्राट थांग थाइचुंग के निधन के बाद वु चेत्यान तत्कालीन शाही नियम के मुताबिक भिक्षुनी के रूप में बौद्ध मंदिर में भेजी गई । युवाराज ली ची शाही गद्दी पर बैठने के बाद सम्राट कोचुंग हो गया । लीची का दिल हमेशा वु चेत्यान की याद में परेशान रहा , अंततः ज्यादा समय भी नहीं गुजरा था कि उस ने वु चेत्यान को राजमहल में वापल बुलाया और उसे पटरानी बनायी । वु चेत्यान को पटरानी के स्थान पर संतोष नहीं आया , वह तो सम्राज्ञी बनना चाहती थी । उसे एक बेरहमी चाल सूझी । थांग कोचुंग की मुख्य पत्नी सम्राज्ञी वांग श से कोई भी बच्चा नहीं जन्मा , पर वह बच्चों को बहुत प्यार करती थी । एक दिन सम्राज्ञी वांग श वु चेत्यान के महल में उस की नवजात शिशु देखने गई , उस के वहां से चली जाने के बाद वु चे त्यान ने अपनी नवजात पुत्री का गला घोंट कर मारा और शव को रजाई से ढका । थोड़ी देर बाद सम्राट ली ची ने अपनी पुत्री को दुलारने वापस आया , तो पाया कि उस की पुत्री मर गई थी । ली ची को भारी सतब्ध हुआ और वु चेत्यान ने भी उस के पास रो रो कर बेहोश होने का स्वांग किया । राज महल की दासियों से पूछताछ से पता चला कि अभी कुछ समय पहले सम्राज्ञी वांग श आ गई थी । थांग कोचुंग को बड़ा रोष आया और वांग श को अपनी पुत्री की हत्यारा समझा । तभी से सम्राट ली ची अपनी सम्राज्ञी वांग से नफरत हो गया । इस के बाद वु चेत्यान ने फिर एक षड़यंत्र रच कर कोचुंग से सम्राज्ञी वांग को सम्राज्ञी के स्थान से हटवाया और खुद अपने को सम्राज्ञी बनवायी ।

सम्राज्ञी के आसन पर बैठने के बाद वु चेत्यान ने सामंती समाज में प्रशासनिक मामलों में महिलाओं की निषेध के नियम को तोड़ कर जबरदस्ती से राज्य के अहम मामलों का फैसला लेने में हाथ बटाया और धीरे धीरे कमजोर स्वाभाव वाले सम्राट ली ची को भी निकम्मा समझा । इस तरह की हालत आगे चल कर अंत में सम्राट ली ची ने राजवंश के सभी अहम मामलों के निपटारे का अधिकार वु चेत्यान के हाथ में सौंपा और वु चेत्यान राजमहल के मंत्रियों व अधिकारियों की नजर में थांग कोचुंग के बराबर दूसरा सम्राट जैसा बन गयी ।

थांग कोचुंग के देहांत कर बाद राज्य की सत्ता पूरी तरह वु चेत्यान के हाथ में पड़ गई , वह एक तानाशाही के रूप में पेश हो गई और उस ने क्रमशः दो सम्राटों को गद्दी पर बिठाया और हटाया । 67 साल की आयु में वु चेत्यान ने थांग राजवंश का नाम बदल कर चाओ राज्य रखा । वह खुद औपचारिक रूप से सम्राट के सिन्हासन पर बैठ कर चीन के इतिहास में एकमात्र महिला सम्राट बन गई ।

सत्ता पर आने के बाद वु चेत्यान ने तानाशाही का शासन चलाया , बेरहम व दुष्ट अधिकारियों पर विश्वास कर बेगुनाहों की अंधाधुंध हत्या करवायी और अपने से मतभेद वालों का सफाया कर दिया , उस ने थांग रजवंश के अभिजात परवारों का कत्लेआम किया , यहां तक अपने पुत्रों यानी थांग राजवंश के सम्राट के उत्तराधिरियों को हत्या का अपवाद नहीं छोड़ा । थांग राजवंश के पुराने अधिकारी श्यु चिनये और लो पिनवांग ने थांग राजवंश की सत्ता बहाल करने के उद्देश्य में दक्षिण चीन के यांगचाओ शहर में सैन्य विद्रोह किया और वु चेत्यान को हटाने की कोशिश की । वु चेत्यान के कुकर्मों को सार्वजिनक करने तथा उस के विरूद्ध विद्रोह के आह्वान के लिए लो पिनवांग ने उस की भर्तसना करने वाला एक आलेख लिखा । आलेख पढ़ने के बाद वु चेत्यान ने मंत्रियों से पूछा कि यह लेख किस ने लिखा था , मंत्रियों ने जवाब में कहा कि वह लो पिनवांग का कलम था , तो वु चेत्यान ने बड़ा अफसोस प्रकट कर कहा कि गलती तुम प्रधान मंत्री की है , इस प्रकार का असाधारण प्रतिभा राजमहल के काम के लिए नहीं बुलाया आया , उसे प्रजा में बेकार छूटने दिया गया । विद्रोही सेना को पराजित करने के लिए वु चेत्यान ने तीन लाख सैनिकों की फौज भेजी , अल्प समय में ही श्यु चिनये के विद्रोह को शांत कर दिया । विद्रोह के नेता श्यु चिनये और लो पिनवांग को मौत की सजा दी गई ।

लेकिन अपने शासन काल में महिला सम्राट वु चेत्यान ने देश के विभिन्न कार्यों के विकास के लिए अनेक सही नीतियां भी लागू की थी , उस ने कृषि उत्पादन के विकास को प्रोत्साहन दिया , प्रतिभाओं को सरकारी काम में लगाने के लिए अधिकारियों के चयन के लिए देशव्यापी ज्ञान परीक्षा व्यवस्था बढ़ायी , अपने रिश्तेदारों व विश्वस्त पदाधिकारियों पर नियंत्रण किया तथा महिलाओं के सामाजिक स्थान उन्नत करने की कोशिश की। सत्ता में हस्तक्षेप के पचास सालों तथा सम्राट के रूप में 15 सालों के शासन काल में थांग और चाओ राजवंश उस के प्रशासन से शक्तिशाली हो गया , सामजिक सुरक्षा व स्थिरता बनी रही , जन संख्या में भारी वृद्धि हुई , आर्थिक विकास तेज हो गया और कई बार बाहर से आए आक्रमणों को खदेड़ कर दिया गया और थांग राजवंश का स्वर्ण युग जारी रहा ।

वु चेत्यान 82 साल की आयु में स्वर्ग वासी हो गई , स्वर्गवास के बाद उसे उस के पती थांग कोचुंग के साथ छ्यानलिंग मकबरे में दफनाया गया । उस ने अपनी समाधि के सामने बिन अक्षर स्तंभ खड़ा करवाया । यह समाधि स्तंभ एक विशाल समूचे पत्थर को तराश कर बनाया गया था , जो आठ मीटर ऊंचा और दो मीटर चौड़ा है , पत्थर के इस स्तंभ पर बड़ा सुन्दर व सुक्ष्म तराश का काम किया गया , लेकिन एक अक्षर भी नहीं खुदा , इसी कारण से यह समाधि स्तंभ भी चीन के इतिहास में खासा मशहूर है । उत्तरवर्ती कालों में वु चेत्यान के इस अक्षर रहित समाधि स्तंभ पर तरह तरह के अटकलें चली थीं । किसी का मत था कि वु चेत्यान ने अपने को शोभा देने के लिए ऐसा समाधि स्तंभ बनवाया था , वह लोगों को यह बताना चाहती थी कि उस के असाधारण कारनामे किसी तरह के शब्दों से उल्लिखित हो , कम है । किसी का मानना था कि वु चेत्यान ने चीन की परम्परागत पुरूष प्रधान समाज व्यवस्था को उलट कर दिया था , वह अपना घोर अपराध जानती थी , इसलिए उसे अपने समाधि स्तंभ पर अपनी जीवनी लिखवाने का साहस नहीं था । और ऐसी राय भी मिलती थी कि अपने निधन के बाद वु चेत्यान सम्राट थांग कोचुंग के साथ एक मकबरे में दफनायी गई थी , उस के समाधि स्तंभ पर थांग राजवंश की महा रानी अथवा चाओ राजवंश की सम्राट लिखने का फैसला बहुत कठिन था , इस सिरदर्द सवाल के हल के लिए बिन अक्षर स्तंभ खड़ा करना उचित था । लेकिन ज्यादा लोगों का मत था कि अक्षर रहित समाधि स्तंभ खड़ा करने में वु चेत्यान की विवेकता अभिव्यक्त हुई थी , क्योंकि वह जानती थी कि उस के उपरांत लोग उस का तरह तरह के मतों से मूल्यांकन करेंगे , एक समाधि स्तंभ में उस के जीवन भर कर्मों का उल्लेख करना असंभव है , एक बिन अक्षर समाधि स्तंभ खड़ा करके उस का मूल्यांकन करने की छूट उत्तरवर्ती लोगों पर छोड़ी जानी चाहिए ।

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