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म्वोची की कहानी

2017-08-15 17:23:00
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म्वोची ईसापूर्व पांचवीं शताब्दी का एक प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक था , उसके जमाने में चीन पर अनेक छोटे बड़े राज्यों का शासन हुआ करता था , जिन में से छु एक बड़ा राज्य था और सोंग छोटा वाला ।

क्वोंगसुबान नाम का एक शिल्पकार उस समय बहुत मशहूर था , उस ने छु राज्य के लिए शहरी दिवार पर चढाई करने में उपयोगी शस्त्र का आविष्कार किया , नाम रखा गया था बादल सीढी । लकड़ी से बनी इस प्रकार की सीढी बहुत ऊंची और विशाल थी , दुश्मन के शहर की दिवार और दरवाजे पर चढाई करने वाला एक शक्तिशाली अस्त्र सिद्ध हुआ था । बादल सीढी के सफल निर्माण के बाद छु राज्य सोंग राज्य पर हमला बोलने को तैयार हो गया ।

खबर पाने के बाद म्वोची दस दिन रात का सफर तय कर छु राज्य की राजधानी पहुंचा और वह इस युद्ध को रोकने के लिए क्वोंगसुबान से मिलना चाहता था । जब क्वोंगसुबान से मिला , तो उस ने उस से कहाः उत्तरी भाग में एक आदमी ने मेरा अपमान किया है , मैं आप की मदद से उसे मार डालना चाहता हूं । म्वोची की यह बात सुन कर क्वोंगसुबान को बड़ी नाखुशी हुई और वह कुछ नहीं बोला । म्वोची ने फिर कहाः उस आदमी की हत्या करने के बदले में मैं आप को ढेर सारे धन दे सकता हूं । क्वोंगसुबान ने जवाब देते हुए कहाः मैं नैक व्यक्ति हूं , पैसे के लिए दूसरों को जान से मारना नहीं जानता हूं । तब म्वोची ने कहाः छु राज्य एक बड़ा राज्य है , उस की जन संख्या ज्यादा तो नहीं , पर भूमि विशाल है । लेकिन अब वह एक छोटे कमजोर सोंग राज्य पर आक्रमण करने को तैयार हो गया है , यह अन्यायपूर्ण युद्ध होगा । आप तो कहते हैं कि आप मानव की हत्या नहीं जानते , पर जब युद्ध छिड़ा , तो बड़ी संख्या में बेगुनाह लोग आप के नई किस्म के अस्त्र से मारे जाएंगे , तो यह नदीजा खुद आप के हाथों से कत्लेआम किये जाने से क्या फर्क है?

क्वोंगसुबान के मुह से कोई शब्द निकल नहीं पाया , उस ने वाद विवाद को टालते हुए कहा कि सोंग राज्य पर आक्रमण करने का फैसला छु राजा ने लिया था । इस तरह दोनों छु राजा के पास गए । छु राजा से मिलने के बाद म्वोची ने सर्वप्रथम राजा से यह कहा कि महा राजा , मैं आप से एक प्रश्न पूछना चाहता हूं , कृपया अनुमति दें । छु राजा ने उस से प्रश्न पूछा , तो म्वोची ने कहाः अब कोई अपनी सुन्दर गाड़ी छोड़ कर पड़ोसी की खस्ता हाल वाली गाड़ी तथा अपना सुन्दर वस्त्र छोड़ कर पड़ोसी के फटा पुराना कपड़े की चोरी करना चाहता है , क्या ऐसा आदमी ठीक है ? म्वोची के जाल में फंस कर छु राजा तुरंत बोलो, वह जरूर चोरी करने के आदि हो गया । इसी मौके से लाभ उठा कर म्वोची ने कहाः छु राज्य की विशाल भूमि है और सोंग राज्य बहुत छोटा है ,दोनों की तूलना सुन्दर गाड़ी और खराब गाड़ी से होती है , छु राज्य में प्रचूर संसाधन है , सोंग राज्य बहुत गरीब है , वे भी सुन्दर कपड़े और फटा पुराने कपड़े के तूल्य हैं । इसलिए मैं कहता हूं कि जब छु राज्य सोंग राज्य पर हमला कर रहा हो , तो वह उस चोर जैसा बन जाएगा ।

इस का जवाब देने के लिए छु राजा के पास भी कोई शब्द नहीं रहा । लेकिन उस ने बड़े अहंकार के साथ कहाः आप ने ठीक कहा है , किन्तु कोंगसुबान ने मेरे लिए शक्तिशाली बादल सीढी बनायी है , मैं अवश्य सोंग राज्य पर धावा बोलूंगा । म्वोची ने बड़े शांत भाव में कहाः असल में वह बादल सीढ़ी भी कोई अभेद्य अस्त्र नहीं है । मैं कोंगसुबान से मिसाली तौर पर वार प्रतिवार कर दिखा सकता हूं । म्वोची का सुझाव मान कर छु राजा ने दोनों के लिए युद्ध साधनों के नमूने तैयार किए , जिन में शहरी दिवार , प्रतिरक्षा के अस्त्र , बादल सीढ़ी और हमले के साधन शामिल थे । दोनों के बीच मिसाली तौर पर युद्ध चला , क्वोंग सुबान ने हर तरह के अस्त्रों और तरीकों से सोंग राज्य की शहरी दिवार पर चढाई करने की कोशिश की , तो भी म्वोची की प्रतिरक्षा से विफल हो गई, अंत में जब क्वोंगसुबान के सभी अस्त्र शस्त्र खत्म हो गए , तभी शहर की रक्षा के लिए म्वीची के पास कुछ साधन और बने रहे थे ।

कोंगसुबान ने अपनी हार नहीं मानी , उस ने म्वोची से कहाः मेरे पास आप का सामना करने का तरीका है , पर मैं नहीं बताऊंगा । म्वोची ने कहाः मैं भी जानता हूं कि किस तरीके से आ�� का मुकाबला करे , मैं भी नहीं बताता हूं । छु राजा ने म्वोची से उन की बातचीत का मतलब पूछा , तो म्वोची का जवाब था कि कोंगलुबान का मकसद मुझे मार कर खत्म कर देना है , वह सोचते हैं कि मुझे मारा जाने के बाद सोंग राज्य में छु राज्य का आक्रमण रोकने के लिए कोई व्यक्ति नहीं रहेगा । किन्तु वे नहीं जानते है कि मैं ने अपने इन सभी तरीकों को अपने शिष्यों को सिखाया है , मेरी हत्या की गई , तो भी सोंग राज्य के शहरी दरवाजे को तोड़ा नहीं जा सकता ।

बात यहां चलने पर छु राज्य के पास कोई चारा नहीं रहा , उस ने विवश हो कर कहा कि मैं ने सोंग राज्य पर हमला छोड़ने का निश्चय किया है । इस तरह म्वोची ने अपनी बुद्धि और हिम्मत के बल पर सोंग राज्य को युद्ध संकट से बचाया ।

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