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दो आड़ू से तीन यौद्धाओं की हत्या की कहानी

2017-08-15 17:23:00
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ईसापूर्व 7वीं शताब्दी में चीन की भूमि पर अनेक राज्य शासन करते थे । छी राज्य में उस समय तीन मशहूर यौद्धा थे ,जो बहादुर व युद्धकुशल होने के कारण छी राजा से अभूतपूर्व सम्मानित और पसंदीदा थे , इन तीन वीर यौद्धाओं के नाम थ्यान काईछ्यांग , कु येची और कोंग सुनचे थे । समय गुजरने के साथ साथ ये तीनों लोग अपने योगदान से अहंकार कर बड़े घमंड हो गए और मनमानियां भी करने लगे । छी राज्य के एक षड़यंत्रकार छन वुयू ने इन तीनों लोगों को अपने पक्ष में खड़े करा कर राजा को गद्दी से उतार देने की योजना भी बनायी ।

छी राज्य के प्रधान मंत्री आनयङ को देश के भीतर छुपी ऐसी साजिश और दुष्ट शक्तियों के विस्तार पर अत्यन्त चिंता हुई । राज्य की सुरक्षा के लिए उस ने तीनों यौद्धों को खत्म करने की ठान ली । लेकिन वह खुद कमजोर बुद्धिजीवी था , वह कैसे राजा के विश्वासपात्र तीन बहादुर यौद्धाओं का सफाया कर सके? वह मौके की घात में बैठा रहा । एक दिन छी राज्य के पड़ोसी राज्य लु राज्य का राजा यात्रा पर आया , उस के स्वागत में छी राजा ने राजमहल में दावत दी । दावत में छी राज्य के माने जाने व्यक्ति आनयङ , तीनों यौद्धा और विभिन्न पदाधिकारी भी उपस्थित थे । दावत में तीन यौद्धाओं ने बड़े अहंकार व घमंडी का परिचय किया । उन की हालत देख कर आनयङ को एक चाल सुझी । दावत चल रही थी , बीच में आनयङ ने राजा से राजकीय उद्यान से आड़ू तोड़ कर मेहमानों को खिलाने जाने की अनुमति मांगी , राजा की अनुमति पर आनयङ राजा के बगीचे से छै आड़ू तोड़ कर लाए । छै आड़ू में से दो दोनों राजा को दिये , अन्य दो दोनों राज्यों के प्रधान मंत्रियों ने खा लिया , अब दो बाकी रह गए । आनयङ ने राजा को सुझाव दिया कि छी राज्य के सभी पदाधिकारी अपना अपना योगदान बताएं , जिस किसी का योगदान बड़ा हो , उसे शेष आड़ू खाने के लिए भेंट किया जाए ।

राजा ने आनयङ का सुझाव अच्छा माना और समझा कि इस से दावत का माहौल और उत्साहित हो जाए , तो उस ने अपने अधिकारियों से उन का अपना अपना योग बताने की मांग की । इसी मौके पर तीन बहादुर यौद्धाओं में से एक कोंग सुनचे सब से पहले आगे बढ़ कर बोलाः एक दिन , मैं राजा के साथ आखेट करने गया , वहां राजा को बचाने के लिए मैं ने एक बाघ को मार डाला , बताओ , मेरा योगदान बड़ा है कि नहीं ? आनयङ ने कहा कि यह योगदना बड़ा है , इस के लिए इनाम देना चाहिए । इस तरह राजा ने कोंग सुनचे को एक आड़ू दिया , उसे खाने पर कोंग सुनचे बड़ा अभिमानित हो उठा ।

तीनों यौद्धाओं में से दूसरा कु येची ने हालत देख कर तुरंत खड़े हो कर कहा कि बाघ को मारना कोई खास बहादुरी नहीं है , एक साल में मैं ने पीली नदी की भीषण लहरों में एक भीमकाय कच्छ को मार कर राजा की जान बचायी थी , मेरा यह काम कोंग सुनचे से कम नहीं है । राजा ने उस का तर्क भी माना और उसे शेष अंतिम आड़ू इनाम के लिए दे दिया ।

तब जा कर तीसरे यौद्धा थ्यान काईछांग वहां मौन बैठे नहीं रह सका , उस ने बड़े असंतोष से भड़क कर कहा कि उस ने किस तरह सेना ले कर दुश्मन राज्य पर चढ़ाई की , उस ने पांच सौ दुश्मनों को पकड़े और राज्य की शक्ति बढ़ाने के लिए असाधारण योगदान किया । उस से राजा से पूछा कि क्या मेरा यह योगदान बड़ा नहीं था ? राजा ने इस वक्त नाचार हो कर महज उसे ढाढस देते हुए कहा कि तुम्हारा योगदान सचमुच बहुत बहुत बड़ा है , लेकिन तुम ने देर से बताया है , अब आड़ू खत्म हो गया है। बेहतर होगा कि अगले मौके पर तुम को इनाम दिया जाए।

थ्यान काईछांग को बर्दाश्त नहीं हुआ , वह समझता था कि राज्य के लिए युद्ध की महान विजय जीतने पर भी उस की उपेक्षा की जा रही है और भर दावत में उस का अपमान किया जा रहा है , तो गुस्से में आकर उस ने वही पर तलवार निकाल क आत्महत्या की । उस की मौत देख कर पहले यौद्धा कोंग सुनचे ने भी तलवार निकाल कर कहाः छोटा योगदान के लिए मुझे इनाम दिया गया , किन्तु जनरल थ्यान को बड़ा योगदान करने पर भी इनाम नहीं मिला , सचमुच अन्याय है । कहते ही उस ने भी तलवार से आत्महत्या की । इसी वक्त शेष एक यौद्धा कु येची ने आगे आकर कहाः हम तीनों ने यह कसम खाया था कि जीवन और मौत में साथ साथ रहेंगे । आज उन दोनों ने आत्महत्या की है , मैं अकेला कैसा जिन्दा रहूं । अंत में उस ने भी तलवार से आत्महत्या की ।

बातों की बातों में तीनों यौद्धाओं ने आत्महत्या की , उन्हें रोकने का मौका भी हाथ नहीं लग पाया , दावत में उपस्थित सभी लोग हवास से रह पड़े । बुद्धिमान आनयङ ने सुझबुझ कर दो आड़ू से तीन बहादुर लोगों को जान से मार डलवाया और चालाकी से राज्य के लिए निहित खतरा खत्म कर दिया ।

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