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छु के लोकगीत से हार खाने की कहानी

2017-08-15 17:21:00
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ईसा पूर्व 202 में चीन के प्रथम एकीकृत सामंती राजवंश छिन राजवंश की स्थापना हुई । लेकिन चीन के एकीकरण के बाद छिन राजवंश के सम्राट छिन शहुंग बेहद तनाशाही , निरंकुश और अहंकार से भरे निकले । अपने सुखभोग के लिए छिन शहुंग ने बेशुमार धन दौलत का खर्च कर आलीशान राजमल और मकबरा बनवाया और हुण के आक्रमण को रोकने के लिए लम्बी दीवार का निर्माण करवाया । छिन राजवंश के शासक प्रजा का बेरहमी के साथ शोषण अत्याचार करते थे , जिस से प्रजा में उस के विरूद्ध लगातार विद्रोह भड़क उठा । इसतरह 15 सालों के बाद ही छिन राजवंश का तख्ता उलट कर दिया गया और राज्य सत्ता छीनने के लिए उसम मुख्यतः दो शक्तिशाली सेनाएं रह गईं , एक सेना प्राचीन चीन के मशहूर राजा श्यांगयु की थी और दूसरी सेना उपरांत के हान राजवंश के संस्थापक ल्यूबांग की थी ।

दोनों सेनाओं के बीच राज्य सत्ता छीनने के लिए भीषण युद्ध चले । शुरूआत में श्यांगयु की सेना बहुत सशक्त थी , राजा श्यांगयु एक वीर बहादूर युद्धा था , लेकिन वह बहुत घमंड और तानशाह भी था । जब की ल्युबांग शुरू में एक छोटे पद का अधिकारी था , वह स्वभाव में चालाक था , पर वह दूसरे लोगों को अपने उद्देश्य के लिए वशीभूत करने में कुशल था । छिन राजवंश का तख्ता पलटने के संघर्ष में दोनों सेनाओं के बीच गठबंधन कायम हुआ था । दोनों में बंधु का रिश्ता भी बना । किन्तु छिन राजवंश को खत्म किया जाने के बाद दोनों एक दूसरे का दुश्मन हो गए।

श्यांगयु शक्तिशाली था , उस ने अपने को पश्चिमी छु का राजा घोषित किया , जिस का स्थान सम्राट के बराबर था । उस ने ल्युबांग को हान राजा नियुक्त किया , जो स्थानीय राजा के तूल्य था । अपनी शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए ल्यूबांग ने प्रकट में श्यांगयु का शासक स्थान मान लिया । लेकिन गुप्त रूप में वह विभिन्न प्रतिभाशाली लोगों को अपने पक्ष में ला खड़ा करने तथा अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। धीरे धीरे उस की शक्ति श्यागं यु के बराबर हो गई ।

सत्ता पर कब्जे के लिए श्यांगयु और ल्यूबांग के बीच कई सालों तक युद्ध चला । एक बार श्यांगयु ने ल्यूबांग की सेना को बुरी तरह परास्त कर दिया और ल्यूबांग के पिता और पत्नी को भी पकड़ा । ल्यूबांग के पिता और पत्नी को बंधक के रूप में इस्तेमाल कर श्यांग यु ने ल्यूबांग से आत्मसमर्पण करने की मांग की , वरना उन दोनों को जान से मार कर शरबा बनाने की धमकी भी दी गई । किन्तु क्या पता था कि ल्यूबांग ने बड़ी चालाक का परिचय कर कहा कि छिन राजवंश के विरूद्ध युद्ध के समय हम दोनों भाई के रिश्ते बने थे , मेरा पिता आप का पिता ही था । अब आप हमारे पिता का शरबा बनाना चाहते है , तो बनाओ , इस का एक प्याला शरबा मुझे खाने को भी दे दे। ल्यूबांग की इस प्रकार की चालाकी पर श्यांगयु कुछ कर सकने में असमर्थ सिद्ध हुआ और उसे ल्यूबांग के पिता व पत्नी वापस लौटना पड़ा ।

कई सालों के युद्ध के बाद श्यांगयु की शक्ति कमजोर होती गई । अंत में दोनों सेनाओं के बीच हेशा नाम की जगह निर्णयात्मक लड़ाई हुई । इस समय ल्यूबांग की विशाल सेना ने श्यांगयु की सेना को चारों ओर घेर लिया , फिर भी श्यांगयु के पास एक लाख सैनिकों की सैन्य टुकड़ी थी , ल्यूबांग की सेना के लिए युद्ध जीतना कोई आसान काम नहीं था ।

एक रात घेराबंदी में फंसी श्यांगयु की सेना को चारों ओर परिचित धुन का गीत गूंज उठा सुनाई पड़ा । ध्यान से सुनने पर मालूम हुआ कि यह गीत उन की जन्म भूमि छु का लोकगीत था। यह गीत ल्यूबांग की सेना से सुनाई दे रही थी , श्यांगयु और उस की सेना बहुत सहम हो उठे , वे गलत समझ गए कि ल्यूबांग की सेना उन की जन्म भूमि छु पर कब्जा किया था और उन के बहुत से रिश्तेदारों व गांववासियों को पकड़ कर यहां लाए थे । इस सुपरिचित गीत से श्यांगयु के सैनिकों को घर की याद आई , उन का मनोबल एकदम पस्त हो गया और अधिकांश सैनिक युद्ध से फरार हो गए । एक लाख की सेना अंत में मात्र पांच छै सौ रह गई ।

असल में यह गीत ल्यूबांग के सैन्य सलाहकार द्वारा चलायी एक चाल था , श्यांगयु की सेना को मनोबल से हराने के लिए उस ने अपनी सेना को छु का दुख से भरा लोकगीत गाने को गोलबंद किया था ।

हेशा के युद्ध से श्यांगयु की सेना पूरी तरह नष्ट हो गई और खुद श्यांगयु ने आत्महत्या की । ल्यूबांग ने देश पर पूरी विजय कर हान राजवंश की स्थापना की ।

छु के लोकगीत से हार खाने की कहानी भी इस एतिहासिक कथा के साथ चीन के इतिहास में मशहूर हो गया और वह एक कहावत में प्रचलित हुआ ।

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