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उपेक्षा से सिर झुकाने तक की कहानी

2017-08-15 17:21:00
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ईसापूर्व पांचवीं शताब्दी में चीन युद्धरत राज्यकाल से गुजर रहा था , उस जमाने में चीन की भूमि पर अनेक बड़े छोटे राज्य स्थापित हुए थे , जिन में छिन , छु ,यान , हान , चाओ , वी , छी शक्तिशाली थे , जो सप्त सशक्त राज्य के नाम से मशहूर थे । आज के चीन देश के उत्तर पश्चिम भाग में स्थित छिन राज्य राजनीतिक और आर्थिक सुधार किया जाने के फलस्वरूप लगातार प्रबल होता गया और सातों प्रमुख राज्यों में से सब से शक्तिशाली हो गया । अपनी बढ़ती हुई शक्ति के बूते पर छिन राज्य अन्य छै राज्यों के विरूद्ध युद्ध किया करता था । छिन के आक्रमण के प्रति छै राज्यों के शासकों में मतभेद था , एक मत था कि छै राज्यों को एकजुट हो कर छिन राज्य के आक्रमण का मुकाबला करना चाहिए और दूसरा मत था कि छै राज्य छिन राज्य के साथ मैत्री की नीति अपना कर उसे आक्रमण का बहाना देने से बच जाए ।

युद्धरत राज्य काल में समाज में एक ऐसा विशेष वर्ग उभरा था , जो विभिन्न राजाओं को अपनी राजनीतिक सलाह देता था और राजाओं को राज्य के प्रशासन में मदद देता था , इस वर्ग के लोग बहुधा प्रतीभाशाली और कुटनीति अच्छी तरह जानते थे । यदि किसी राज्य के राजा ने किसी का मत स्वीकार किया , तो उस व्यक्ति का नाम और राजनीतिक स्थान एक रात में ही ऊंचा हो जाता था और राज्य में मशहूर हो जाता था । सु छिन नाम का बुद्धिजीवी ही इस वर्ग में था ।

सु छिन एक बुद्धिमान कुटनीतिज्ञ था , अपना राजनीतिक मत को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से वह पहले छिन राज्य के राजा के पास गया , उस ने छिन राजा को छै राज्यों के साथ मैत्री का स्वांग करते हुए उन्हें एक एक परास्त कर हड़पने की सलाह दी , लेकिन छिन राजा ने उस के मत को स्वीकार नहीं किया , क्योंकि छै राज्यों पर आक्रमण के लिए छिन राज्य की तैयारी पूरी नहीं हो पाई थी । सु छिन लाचार हो कर अपना घर लोयांग शहर लौटा , इस समय उस का सभी पैसा खत्म हो गया था , वस्त्र भी फटा पुराना पड़ा था और वह बिलकुल भद्दा हालत में पड़ गया था ।

घर वालों ने जब देखा कि सु छिन बुरी हालत में वापस लौटा , तो सबों ने उस की उपेक्षा करना शुरू की , पिता माता उस के साथ बातें करना नहीं चाहते , पत्नी उस की बड़ी उपेक्षा कर अपने बुनाई काम में लगी और उस से मिलने का जी भी नहीं करती । भाभी से खाना मांगा , तो उस ने खाना देने के बजाए उस की खूब खरी बुरी कही । सु छिन को बड़ी दुख हुई , उस ने अपने शास्त्र अध्ययन में कड़ी मेहनत करने की ठान ली । वह दिन रात पढ़ता रहा और तत्कालीन राजनीति के अध्ययन में जुटा रहा । वह देर रात पढ़ता था , जब नींद आयी , तो वह सुतारी से अपने जांघ पर चुभो कर अपने को जगा देता था । सुतारी से जांघ चुभोने की मेहनत की कहानी आगे कहावत के रूप में चीन में मशहूर हो गया था ।

विभिन्न राज्यों की संपूर्ण स्थितियों के गहन अध्ययन के बाद सुछिन ने छै राज्यों को एक के सूत्र में बांध कर गठबंधन कायम कर छिन राज्य का मुकाबला करने की नीति व्यवहारिक और सार्थक मानी , उस ने अपनी इस राजनीतिक विचारधारा को ले कर पहले यान और चाओ राज्यों को स्वीकार करवाया , फिर उस ने यान , चाओ , छी , हान ,छु और वी छै राज्यों को गठबंधन बना कर छिन के आक्रणम का मुकाबला करने के लिए मंजूर करवाया । इस तरह सुछिन छै राज्यों के गठबंधन का प्रमुख सलाहकार नियुक्त किया गया और वह एक प्रभावकारी और सुप्रसिद्ध व्यक्ति हो गया । छै राज्यों के गठबंधन के सामने छिन राज्य को भी जल्दबाजी से किसी पर हमला करने का साहस नहीं आया , इसतरह 15 सालों तक शांति की स्थिति बनी रही ।

छै राज्यों के गठबंधन के प्रमुख सलाहकार होने के कारण सु छिन का नाम और स्थान असाधारण रूप से ऊँचा हो गया । एक बार किसी काम से वह अपने घर लोयांग शहर लौटा , स्थानीय अधिकारियों ने उस के स्वागत में रास्ता साफ करने तथा सभी शहर वासियों को मार्ग पर उपस्थित होने का आदेश दिया । सु छिन के माता पिता , भाभी पत्नी भी स्वागत के लिए सुबह सुबह ही चौराही पर खड़े हो गए । घर लौटने के बाद उस की पत्नी डर क�� मारे दुबकी दुबकी सी नजर आयी , भाभी उस के सामने सिर झुकाए उस की बातें सुनती रही । सुछिन ने मुस्कराते हुए कहा कि भाभी जी , क्या हुआ है कि आप के रवैये में इतना बड़ा परिवर्तन आया , जब पहले मेरी बड़ी उपेक्षा कर दुव्यवहार करती थी , अब तो सिर झुकता है । भाभी ने कांपती आवाज में कहाः आप आज बड़े पदाधिकारी बन कर आए हैं , आप के पैसा भी मालामाल हैं , तो मुझे आप के साथ पहले का जैसा बर्ताव करने की क्या हिम्मत हो । भाभी की बातें सुन कर सुछिन ने गहरी अनुभूति के साथ कहाः जब कोई गरीब है , तो उस का माता पिता भी उसे पसंद नहीं करते हैं , किन्तु जब वह समृद्ध और नामी हुआ , तो रिश्तेदार मित्र भी उस के आगे सिर झुकाते हैं । यह लोगों का दोष नहीं है कि वे धन दौलत और औहदे पर ज्यादा महत्व देते हैं ।

चीन में उपेक्षा से सिर झुकाने तक का कहावत बहुत मशहूर है, जिस से लोकाचार में दूसरों की परिवर्तित स्थिति के मुताबिक भिन्न भिन्न बर्ताव होनो पर व्यंग कस की जाती है ।

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