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नानखो का सपना

2017-08-15 17:21:00
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चीनी भाषा में नानखो का सपना कहावत के रूप में अव्यवहारिक दिवास्वप्न कहलाता है , जिस के पीछे एक दिलचस्पी कहानी प्रचलित है।

ईस्वी नौवीं शताब्दी में छ्वन युफन नाम का एक लोग रहता था , वह शराब पीना बहुत पसंद करता था । उस के घर के आंगन में एक विराट हराभरा चाइना स्कोलर वृक्ष खड़ा था ,गर्मियों की रात चांदनी वृक्ष के पत्तों से छंटती थी , रात्रि पवन चल रहा था और वृक्ष घरवालों को गर्मी से बचने की शीतल साया देता था ।

छ्वन युफन के जन्म दिवस के दिन , घर पर बड़ी दावत हुई , बड़ी संख्या में रिश्तेदार और मित्र बधाई देने आए । बड़ी खुशी में मग्न हो कर छ्वन युफन ने कुछ ज्यादा शराब पीया । रात को सभी रिश्तेदार और मित्र चले गए , तो छवन युफन शराब में चूर हो कर चाइना स्कोलर वृक्ष के नीचे जा कर विश्राम के लिए बैठ गया, थोड़ी ही देर में वह सपना की दुनिया में खो हो गया ।

छवन युफन सपने में यह देख रहा था कि दो राजकीय दूतों के निमंत्रण पर वह एक विशाल वृक्ष की गुफा में प्रवेश कर गया । गुफा के भीतर आकाश बहुत साफ होता था , धूप सुहावना पड़ती थी , बिलकुल एक अलग सी दुनिया लगती थी , नाम था महा स्कोलर वृक्ष राज्य । उस समय इस की राजधानी में अफसरों के चुनाव के लिए परीक्षा चल रही थी , तो छ्वन युफन ने भी अपना नामकन कराया । तीन तीन परीक्षाएं चलीं , तीनों में छ्वन युफन ने अच्छे अच्छे लेख लिख कर ऊंचे अंक पाया । जब परीक्षा का अंतिम परिणाम निकला , तो उसे प्रथम स्थान प्राप्त हुआ । लिखित परीक्षा के बाद राजा के सामने मौखिक परीक्षा भी चली । राजा ने देखा कि छवन युफन शक्स सूरत में बहुत सुन्दर था और बहुत प्रतीभाशाली भी था , तो बहुत पसंद आया । राजा ने छ्वन युफन को अफसरों के चुनाव की परीक्षा में अव्वल दर्जे का चुना और अपनी पुत्री राजकुमारी को उस के साथ शादी करवायी । इस तरह छवन युफन का नाम राजधानी में बहुत मशहूर हो गया ।

शादी के बाद पति पत्नी का विवाहित जीवन बहुत सुखमय रहा । कुछ समय के बाद राजा ने छवन युफन को नामखो शहर के महापौर के पद पर नियुक्त किया । अपने पद पर छवन युफन बड़ी मेहनत से काम करता था , अपनी प्रजा को प्यार करता था और साफ सुथरा प्रशासन चलाता था , इसलिए स्थानीय निवासियों में उस की ऊंची साख थी । शीघ्र ही तीस साल बीता , छ्वन युफन का प्रशासनिक कार्य देश भर में प्रसिद्ध हो गया और उस के भी पांच पुत्र और दो पुत्रियां जन्मीं और जीवन बड़ा सुखद से चल रहा था । राजा ने कई बार उसे शाही दरबार में पदोन्नति के लिए बुलाना चाहा , लेकिन स्थानीय निवासियों ने उसे नानखो में प्रशासन जारी रखने रोका , स्थानीय निवासियों का प्यार और समर्थन देख कर छवन युफन को नानखो में रूकना पड़ा . राजा ने उस के योगदान की प्रशस्ति में बड़ी राशि में धनदौलत पुरस्कृत किया ।

फिर एक साल आया , त्यानलो राज्य की सेना ने महा स्कोलर वृक्ष राज्य पर हमला बोला । महा स्कोलर वृक्ष राज्य की सेनापतियों को राजा की आज्ञा पर दुश्मन का मुकाबला करने भेजा गया , लेकिन उन सभी को दुश्मनी सेना से हार खाना पड़ा । पराजय की खबर राजधानी तक पहुंचने के बाद राजा बहुत घबरा हुआ । उस ने आपात तौर पर अधिकारियों की बैठक बुलाई । अपनी सेना की भारी हार और दुश्मनी सेना के राजधानी के नजदीक आने की खबर सुन कर सभी मंत्रियों व अधिकारियों में मुख का रंग उड़ गया , उन के दिमाग से कोई भी चारा नहीं निकल पाया ।

राजा को मंत्रियों की इस हालत पर बड़ा गुस्सा आया , उस ने कहा कि तुम लोग शांति के समय बड़ा एशो आराम करते थे और दुनिया का सुख भोग कर चुके थे , लेकिन जब देश पर कहर चढ़ा , तो तुम सभी लोगों के मुंह सील से हो गए और बड़ा डरपोक निकले । तुम लोगों का क्या काम आ सकता है ।

इसी मौके पर वजीर को नानखो के प्रशासन में असाधारण योग करने वाले छवन युफन की याद आई , तो उस ने राजा से छवन युफन की सिफारिश की ।राजा ने तुरंत आज्ञा दे कर छवनयुफन को राज्य सेना का सेनापति नियुक्त कर युद्ध के मोर्चे पर भेजा ।

राजा की आज्ञा पा कर छवन युफन फोरन सेना ले कर दुश्मनी सेना का मुकाबला करने गया । लेकिन उसे रणनीति और युद्ध कला का अज्ञान था , इसलिए दुश्मनी सेना से युद्ध चलते ही उसे भारी हार खानी पड़ी , उस की सेना को घोर क्षति पहुंची । वह भी युद्ध बंदी बनने से बाल बाल बचा । राजा को उस पर पूरी निराशा हुई और उस ने छवन युफन के सभी पदों को खारिज कर दिया और उसे एक मामली प्रजा के रूप में घर वापल लौटाया। अपनी जिन्दगी भर की ऊंची साख एकबारगी नष्ट होने पर छवन युफन को असहनीय लज्जा और रोष आया , उस ने ऊंची आवाज में चीखा , इसी से उस की सपना भी टूट पड़ी और वह जाग उठा । सपना से जागने के बाद छवन युफन ने अपनी सपना में देखी चीजों का पता लगाने की कोशिश की , तो पाया कि उस विशाल चाइना स्कोलर वृक्ष के नीचे चिंउटियों का एक बड़ा गढ़ा था , चिंउटियों का एक बड़ा झुंड उस में रहता था ।

कहानी प्रकाशित होने के बाद नानखो का सपना वाला कहावत भी चीन में मशहूर हो गया , जो यह दर्शाता है कि जीवन निराकार होता है और समृद्धि व बल अधिकार क्षणिक होता है ।

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