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सामंतों से युद्ध का मजाक

2017-08-15 17:21:00
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चीन के सामंती राजवंशों में राजा राज्य का सर्वोच्च शासक थे , उस के पास असीम सत्ता अधिकार होते थे , यदि इस सत्ता अधिकार का दुरूपयोग किया गया , तो राजवंश का अंत हो सकता था । सामंतों से युद्ध का मजाक ऐसी एक एतिहासिक कहानी थी ।

चो योवांग ईसापूर्व आठवीं शताब्दी के चो राजवंश का अंतिम राजा था। वह एक अनैतिक और अविवेक शासक था , वह भोगविलास में डूबे राज्य के प्रशासन में मन नहीं रखता था । वह रोज राजमहल में रानियों और सुन्दरियों के साथ सुखभोग में अनुरासी था । चो योवांग की एक सुन्दर रानी थी, जिस का नाम पो श से चीन के इतिहास में मशहूर था , राजा उसे अत्यन्त प्यार करता था और उस की हर मांग को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ता था । लेकिन पोश हमेशा नाखुश रहती थी और कभी उस के मुखड़े पर मुस्कान नहीं दिखती थी । राजा चो योवांग ने उसे हंसने देने के लिए हर उपाये सोच निकाला ,पर वह बराबर दुख उदास मुद्रा में दिखी रहती थी और मुस्कराने से दूर रही थी । अपनी मनपसंद रानी को मुस्कराने देने के लिए राजा चो योवांग ने दिमाग बुरी तरह खपाया ।

एक दिन चो योवांग पोश को ले कर बाहर सैर सपाट के लिए निकला , वे ली शान पहाड़ पर निर्मित युद्ध सूचना देने में प्रयुक्त होने वाले दुर्ग पर जा पहुंचे । चो योवांग ने पोश को इस दुर्ग के काम से अवगत कराते हुए कहा कि इस प्रकार का दुर्ग दुश्मन की सेना के आक्रमण करने आ पहुंचने की सूचना देने के काम में लाया जाता था । उस जमाने में राज्य की सीमा से लेकर राजधानी तक हर निश्चित फासले पर एक ऊंचा दुर्ग बनाया गया था , जिस पर सिपाही तैनात थे । जब दुश्मन आक्रमण करने आया , तो दुर्ग पर युद्ध की सूचना देने के लिए ऊंची आग जलायी जाती थी और आग की धूंआ से युद्ध की सूचना एक दुर्ग से दूसरे दुर्ग तक पहुंचायी जाती थी और अंत में सूचना राजधानी तक पहुंच जाती थी । यदि राजधानी आक्रमण का निशाना बनी , तो इस की सूचना राजवंश के अधीनस्थ विभिन्न सामंत जागिरदारों को पहुंचाने के लिए राजधानी के पास खड़े लीशान पहाड़ पर निर्मित दुर्ग पर भी आग जलायी जाती थी , ताकि वे सेना ले कर सहायता दे सके ।

पोश को राजा चो योवांग की बातों पर विश्वास नहीं आया , उसे समझ में नहीं आ सकता कि एक मिट्टी पत्थर के दुर्ग पर आग जला कर कैसे हजार किलोमीटर दूर रहने वाली सेना वापस बुलायी जाए । पोश की जिज्ञासा शांत करने और उस से मुस्कराहट पाने के लिए राजा चो योवांग ने तुरंत सिपाहियों को दुर्ग पर आग जलाने का आज्ञा दिया , आग की सूचना एक दुर्ग के दूसरे दुर्ग से बेरोकटोक विभिन्न सामंत जागिरदारों तक पहुंच गई । सामंत जागिरदारों ने खबर पाकर यह समझा था कि राजधानी पर आक्रमण किया गया है , तो वे तुरंत अपनी अपनी सेना ले कर दूर से राजधानी आ पहुंचे ।

जब विभिन्न सामंत जागिरदार जल्दबाजी में ली शान पहाड़ के पास पहुंचे , तो देखने को पाया कि चो योवांग अपनी रानी के साथ दुर्ग पर मदिरा भोग में मस्त रहा था , उन्हें तभी पता चला कि उन्हें राजा ने उल्लू सीधा बनाया था , पर उन्हें अपना क्रोध प्रकट करने का साहस नहीं था , तो आक्रोश को मन में दबा कर सेना ले कर वापस चले गए । उच्च पदवी से असाधारण सामंतों को धोखे में आकर खासा लाचार दिखते देख कर रानी पोश को बड़ा मजा आया और उस के चेहरे पर मुस्कान दौड़ी , अपनी मनपसंद रानी को अखिरकार हंस हुई देख कर राजा चो योवांग बेहद खुश हुआ । जब सभी सामंत जागिरदारों और उन की सेनाएं चली गई , तो उस ने फिर सिपाहियों को आग जलाने का आज्ञा दिया , सामंत जागिरदारों की सेनाएं फिर दौड़ दौड़ आ पहुंची । उन्हें फिर से धोखे में आते देख कर चो योवांग और पोश को और बड़ा मजा आया और दुर्ग पर बैठे ऊंची आवाज में परिहास करने लगे । इसी प्रकार चोयोवांग ने कई बार सामंत जागिदारों के साथ ऐसा मजाक किया । अंत में जब कभी दुर्ग पर आग जली , तो भी किसी भी सामंत जागिरदार को उस पर विश्वास नहीं होता था ।

कुछ समय के बाद राजा चो योवांग ने पोश को महा रानी ���नाना चाहा , उस ने पोश के पुत्र को युवराज के रूप में नियुक्त किया और अपनी पहले की महा रानी और युवराज को पदच्युत कर दिया । महा रानी का पिता तत्कालीन चीन के शन राज्य का राजा था , अपनी पुत्री को रानी के पद से हटाया जाने की खबर पाकर उसे बड़ा गुस्सा आया और उस ने दूसरे राज्यों के साथ गठबंधन कर चो राजवंश पर हमला बोला । युद्ध छिड़ने पर चो योवांग ने तुरंत दुर्ग पर आग जला कर युद्ध की सूचना सामंत जागिरदारों को पहुंचाने का आज्ञा दिया , लेकिन इस बार भी किसी को राजा चो योवांग पर विश्वास नहीं आया । दुर्गों पर बार बार आग जलायी गई , किन्तु कोई भी सेना सहायता के लिए नहीं आयी । बहुत कम समय में ही चो राजवंश की राजधानी पर आक्रमणकारी सेना ने कब्जा किया , राजा चोयोवांग को जान से मारा गया और रानी पोश पकड़ी गई और चो राजवंश का खात्मा हो गया ।

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