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छिंग

2017-08-15 15:06:49
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छिंग चीन का सब से प्राचीनतम जातीय ताल वाद्य यंत्र जाना जाता है , उस का आकार प्रकार सीदा साधा होने पर भी बहुत सुंदर लगता है । ताल वाद्य छिंग का इतिहास बहुत पुराना रहा है , आदिम काल के माता प्रधान समाज में छिंग को पत्थर और आवाज गूंजने वाला गोल कहलाया जाता था । उस समय लोग जीविका के रूप में मुख्य तौर पर मछली पकड़ने और शिकार करने पर आश्रित थे , अवकाश के समय वे पत्थर को पीटने की आवाज के ताल में विभिन्न जानवरों का पार्ट अदा कर नाचते और अन्य मनोरंजक गतिविधियां करते थे । बाद में इसी प्रकार के पत्थर को धीरे धीरे ताल वाद्य यंत्र छिंग का रूप दिया गया ।

सब से पहले छिंग का प्रयोग मुख्यतः आम जनता की मनोरंजक गतिविधियों में किया जाता था , बाद में उस का प्रयोग ऊपरी शासकों द्वारा युद्ध मैदान पर जाने की रस्म और पूजा प्रार्थना आदि विभिन्न प्रकार वाली गतिविधियों में भी किया जाने लगा ।

ताल वाद्य छिंग आम तौर पर विशेष छिंग और शृंखलाबद्ध छिंग में बांटा जाता है । विशेष छिंग राजाओं द्वारा भगवानों की पूजा प्रार्थना करने और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का वाद्य यंत्र माना जाता था , जबकि शृंखलाबद्ध छिंग अनेक छिंग को एक कड़ी में बांधा जाता है , बजाते समय उन्हें एक लकड़ी ढांचे पर रखा जाता है और उस का प्रयोग शाही संगीत में ज्यादा किया जाता था । आज से दो हजार वर्ष से पहले के युद्धरत काल में छू राज्य में शृंखलाबद्ध छिंग तैयार करने का स्तर काफी ऊंचा था ।

अगस्त 1978 में चीन के पुरातत्व वैज्ञानिकों ने मध्य चीन के हूपेह प्रांत की स्वी कांऊटी में आज से दो हजार चार सौ वर्ष पुरानी समाधि – नम्बर दो चंग हो समाधि की खुदाई में प्राचीन छू संस्कृति से संपन्न घंटों की कड़ी , छिंग की कड़ी , छिन , सई , श्याओ और ढोल आदि कुल एक सौ बीस से अधिक प्राचीन वाद्य यंत्र व बड़ी संख्या में सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त हुए हैं । साथ ही खुदाई में प्राप्त छिग की कड़ी में कुल 32 छिंग कांस्य से तैयार ढांचे की ऊपरी व नीची दोनों मंजिल पर सुव्यवस्थित रूप से लटके हुए थे । इस पूरे सेट के छिंग चूने पत्थर , काले पत्थर और जेट से बनाये गये हैं और उस की आवाज बहुत स्वच्छ व सुरीली है । खेद की बात यह है कि खुदाई के समय उन का अधिकांश भाग टूटा फटा था । 1980 में हूपेह प्रांत के म्युजियम और ऊहान भौतिक अनुसंधानशाला ने साथ मिलकर नम्बर दो चंग हो छिंग की कड़ी की नकल पर नये छिंग की कड़ी तैयार कर ली । इसी प्रकार वाले छिंग की आवाज पुरानी कड़ी जैसी मधुर लगती है ।

1983 में हूपेह प्रांतीय नृत्य गान कला मंडली ने पत्थरों से 32 छिंग की कड़ी तैयार की । सितम्बर 1984 में सूचाओ के जातीय वाद्य यंत्र कारखाने और जेट तराशी कारखाने ने फिर जेट से 18 छिंग की कड़ी तैयार कर दी ।

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