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युन्न राजवंश

2017-08-15 16:46:39
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मंगोल जाति के वीर चंगेज खां ने ईसा 1206 में मंगोल राज्य की स्थापना की , ईसा 1271 में उस के पोता कुबेल खां ने मंगोन राज्य का नाम बदल कर युन्न राजवंश का इतिहास आरंभ किया , युन्न राजवंश ने ईसा 1279 में सङ राजवंश का विनाश कर आज के पेइंचिंग के स्थान पर अपनी राजधानी बनायी , जिस का नाम तातु था ।

मंगोल जाति पहले मंगोलिया रेगिस्तान के उत्तरी भाग में रहती थी , उस के वीर नेता चंगेज खां , जिस का नाम थमुचन था , ने विभिन्न मंगोल कबीलों को पराजित कर मंगोल राज्य की स्थापना की और अपने को चंगेज खां कहलाया गया ।

चंगेज खां की सेना ने पश्चिम की ओर मध्य एशिया , फारस तथा पूर्वी यूरोप तक सैन्य अभियान किया । चंगेज खां के विराट राज्य में एशिया और यूरोप की विशाल भूमि शामिल थी , जिस का शासन केन्द्र हेलिन यानी आज के मंगोल लोक गणराज्य के हरहेलिन में था , लेकिन बहुत अल्प समय में ही विशाल मंगोल राज्य कई कुछ स्वतंत्र राज्यों में बंटा हुआ था , किन्तु जाहिरा तौर पर वे सभी स्वतंत्र राज्य मंगोल सम्राट को महा खान मानते थे ।

वर्षों से युद्ध चलने के कारण कुबेल खां द्वारा स्थापित युन्न राजवंश के उत्तरी भाग में भारी बर्बादी हुई , इस स्थिति को दूर करने के लिए युन्न राजवंश के सम्राट युन्न श जु यानी कुबेल खां ने कृषि का विकास करने तथा पीली नदी की बाढ़ पर काबू पाने की नीति लागू की ।

थांग , सङ और युन्न राजवंशों के समय चीन विश्व का सब से विकसित देश था , उस समय चीन के अर्थतंत्र और संस्कृति से पड़ोसी देश बरबस आकर्षित हो रहे थे । विभिन्न देशों के राजदूत , व्यापारी तथा विद्वान बड़ी संख्या में चीन आए और बाहरी दुनिया के साथ चीन का आदान प्रदान व संपर्क बहुत क्रियाशील थे ।युन्न राजवंश के शासन काल में पूर्व और पश्चिम के बीच राजदूतों और व्यापारियों की आवाजाही किसी भी समय से कहीं ज्यादा थी । युन्न राजवंश और जापान व दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच संपर्क कायम हुआ , चीन और भारत के बीच समुद्री जल मार्ग पर चीनी जहाज आते जाते दिखाई देता था ।चीन के छपाई व बारूद तकनीक तथा दिग्दर्शक सुई यंत्र तीन महा आविष्कार अरब से यूरोप तक पहुंचे। अरब देशों के खगोल शास्त्र , चिकित्सा शास्त्र तथा गणित शास्त्र चीन आए , इस्लाम धर्म का भी चीन में प्रसार हो गया ।युन्न राज्य काल में चीन और अरब प्रायद्वीप के बीच समुद्री जल मार्ग के अलावा चीन के युन्न प्रांत से वहां जाने का थल मार्ग भी था , इन मार्गों से चीनी मिट्टी के बर्तन पूर्वी अफ्रिका और मरोक्को तक पहुंचाये गए ।ईसा 1275 में वेनिजिया के व्यापारी के पुत्र मार्को पोलो अपने पिता के साथ चीन आया और युन्न राजवंश में 17 सालों तक रह रहे । उस की रचना .यात्रा वृतांत विश्वविख्यात है , जो सदियों से पश्चिम के लोगों को चीन और एशिया के बारे में ज्ञान पाने के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक बन गयी ।

युन्न राज्य काल में सांस्कृतिक उपलब्धियों में आपेरा सर्वश्रेष्ठ था, युन्न ओपेरा के महान लेखक क्वांग हान छिंग , वांग श फू , पाई फू तथा मा ची य्वान बहुत विख्यात थे , उन की रचनाएं त्वो-अ पर झूठा आरोप तथा पश्चिमी भवन की प्रेम कथा आदि आज तक भी रंगमंच पर लोकप्रिय रही है ।

युन्न राजवंश में देश की बहुसंख्यक जाति हान पर मंगोल शासकों का शोषण और अत्याचार बहुत क्रूर था , इस से हान जाति में जबरदस्त विरोध भड़क उठा । ईसा 1333 में धार्मिक संप्रदाय तथा गुप्त संगठन के रूप में हान किसानों का विद्रोह देश भर में फैल गया । ईसा 1351 में पीली नदी के सुधार व निर्माण में लगे श्रमिकों ने प्रबल विद्रोह किया , सिर पर लाल रंग के पट्टा पहनने के कारण वह लाल पट्टा सेना के नाम से मशहूर था । लाल पट्टा सेना के होचाओ क्षेत्र के सेनापति जु युन्न चांग ने गैर हान लोगों को निकालो तथा चीनी राष्ट्र की बहाली करो नारे पेश कर युन्न राजवंश की राजधानी तातु पर दलबल से धावा बोला और युन्न राजवंश को पलट कर मिंग राजवंश की स्थापना की ।

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