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स्वी राजवंश और थांग राजवंश

2017-08-15 16:45:56
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ईस्वी 581 में सम्राट स्वी वुन ती यानी यांग च्यान ने स्वी राजवंश की स्थापना की , ईस्वी 618 में उस के पुत्र सम्राट स्वी यांग ती की हत्या तक स्वी राजवंश कोई 37 साल शासन करता रहा । स्वी राजवंश का शासन काल बहुत छोटा था । इस काल में सम्राट स्वी वुन ती ने इतिहास के लिए जो योगदान किए थे , उन में सरकारी विभाग व्यवस्था का सुधार , नया कानून निर्माण तथा नयी अधिकारी चयन पद्धति शामिल थे। सरकारी विभाग व्यवस्था के लिए स्वी वुन ती ने उस के पूर्ववर्ती राज्य पै चो की शष्ट विभाग व्यवस्था को रद्द कर त्रि दरबारी विभाग व शष्ट मंत्रालय व्यवस्था कायम की , स्वी वुन ती के राजवंश की दंड विधि उत्तर दक्षिण राज्य काल की विधि से कहीं अधिक नरम थी । इस के अलाव स्वी वुन ती ने सरकारी पदों की नियुक्ति के लिए परीक्षा से अधिकारी चयन की पद्धति बनायी , जो उस के उत्तरवर्ती सभी सामंत राजवंशों में जारी रही । स्वी वुन ती के पुत्र सम्राट स्वी यांग ती एक अत्यन्त क्रूर और विलासी शासक था , उस के आदेश पर चीन में महा नहर खोदी गई , जो विश्व में सब से लम्बी मानव निर्मित नहर है । महा नहर के निर्माण का उस का उद्देश्य सैर पाट करने का आनंद उठाना था , किन्तु इस के निर्माण से चीन के आर्थिक विकास को सुविधा मिली है । अपनी क्रूरता तथा भोगविलास के कारण स्वी यांग ती चीन के इतिहास में बड़े कुनाम शासक के रूप में मशहूर है । क्रूर शासन तथा बेरहम कर वसूली की वजह से शीघ्र ही प्रजा में व्यापक रोष भड़क उठा और राज्य के हर स्थान में विद्रोह मच गया । अंत में सम्राट स्वी यांग ती की चांग तू नगर में हत्या की गई , इस के साथ ही स्वी राजवंश का भी पतन हो गया ।

ईस्वी 618 में थांग राजवंश की स्थापना से ले कर 907 में जु वन द्वारा उसे खत्म किया जाने तक थांग राजवंश कुल 289 साल शासन करता था । चीन के इतिहास में थांग राजवंश का दो कालों में बंटवारा हुआ था , दोनों कालों के बीच सेनापति आन लु शान और श स मिन का विद्रोह था । थांग राजवंश के पूर्ववर्ती काल में साम्राज्य की शक्ति लगातार बढ़ती गई और आर्थिक समृद्धि आई , उस के उत्तरवर्ती काल में थांग राजवंश की शक्ति का निरंतर ह्रास रहा । थांग राजवंश का संस्थापक थांग क्वो जु था , इस के काल में उस के पुत्र ली श म्येन के नेतृत्व में थांग की सेना ने सभी विपक्षी सैन्य शक्तियों को खत्म कर चीन के एकीकरण का महान काम किया । इस के बाद थांग राजवंश के इतिहास में श्वान वु मन घटना घटित हुई , इस घटना के परिणामस्वरूप ली श म्येन सम्राट बन गया , जो थांग थ्ये चुंग के नाम से चीन के इतिहास में अत्यन्त मशहूर है । थांग थ्ये चुंग एक असाधारण विवेक व ताक्तवर शासक था ,उस ने साम्राजय को शक्तिशाली और समृद्ध बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी , अंततः थांग राजवंश चीन के सामंत समाज में एक अतूल्य समृद्ध राजवंश के रूप में उभरा । उस का शासन काल क्वान चङ स्वर्ण युग कहलाता है । उस समय थांग राजवंश की राजनीतिक , आर्थिक व सांस्कृतिक प्रगति तत्कालीन विश्व में विकास की चरम सीमा पर थी । इस के उपरांत सम्राट थांग श्वान चुंग के शासन काल में पुनः खाई युन्न स्वर्ण युग प्रकाश में आया , इस समय साम्राज्य शक्तिशाली था , प्रजा धनी थी , राजनीतिक सुशासन चला । लेकिन थांग श्वान चुंग के शासन की अंतिम अवधि में शक्तिशाली ��ो चुके सेनापति आन लु शान और श स मिन ने सम्राट के साथ गद्दारी कर विद्रोह किया , तभी से थांग राजवंश ह्रास की दिशा में बढ़ने लगा ।

स्वी राजवंश और थांग राजवंश के शासन काल में राजनीति व्यवस्था में अनेक सुधार लाए गए थे , जो सामंत समाज के विकास के लिए योगदान था । उस समय लागू त्रि दरबारी विभागों व शष्ट मंत्रालयों की व्यवस्था , सरकारी अधिकारियों के चयन के लिए परीक्षा की व्यवस्था , लगान ,बेगार व कर वसूली की नई विधि का उस के उत्तरवर्ती एतिहासिक कालों पर गहरा प्रभाव पड़ा । स्वी और थांग राजवंशों ने विदेशों के प्रति उदार रवैया अपना कर खुलेपन की नीति लागू की , जिस से चीन और विश्व के अन्य भागों के बीच आर्थिक व सांस्कृतिक आवाजाही क्रियाशील और कामयाब रही थी । कला साहित्य के क्षेत्र में थांग राजवंश की कविता चीन के काव्य इतिहास में चोटी पर पहुंची। थांग राजवंश के प्रारंभिक काल में कवि छन जी आंग का नाम सब से प्रसिद्ध था , थांग के स्वर्ण युग में कवि ली पाई और तु फू चीन के महान प्राचीन कवि के रूप में उभरे , थांग के मध्य काल में कवि पाई च्यु ई और युन्न शन तथा उत्तरवर्ती काल में कवि ली सांग इन तथा तु मू श्रेष्ठ कवि पंक्ति में शामिल हुए । थांग राजवंश के साहित्यकार हान य्यु तथा ल्यु चुंग युन्न की अगुवाई में प्राचीन साहित्य सीखने का अभियान चला , जिस का आगे के कालों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा था । लिपिकार यान चन छिंग की लिपिकला , यन ली बन , वु ताओ जी , ली श स्वन तथा वांग वी की चित्रकला आज तक भी मशहूर है । थांग राजवंश में नृत्यगान का जोरदार विकास हुआ , दरबारी नाचगान के रूप में निसांग परी नृत्य नाम का संगीत और नृत्य बहुत मशहूर है , उस समय की बड़ी मात्रा में सुरक्षित गुफा कलाएं भी उत्तम कला मानी जाती है । विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में विकसित मुद्रण कौशल और बारूद बनाने का तरीका चीन के चार प्राचीन आविष्कारों में गिने जाते हैं ।

थांग राजवंश के उत्तरवर्ती काल में राजनीतिक भ्रष्टाचार मच रहा , राज्य शासन घोर गड़बड़ी से ग्रस्त था , विभिन्न सरकारी गुटों में तीव्र खींचतान चला तथा राज्यसत्ता पर राजपरिवार की सेवा में लगे खोजा अधिकारियों का आधिपत्या रहा ,विभिन्न स्थानों में किसान विद्रोह का सिलसिला जारी रहा और अंत में हुंग छाओ के नेतृत्व में विशाल विद्रोह उत्पन्न हुआ , विद्रोही सेना के एक सेनापति जु वुन विद्रोही सेना से गद्दारी कर थांग राजवंश में जा मिला , उस ने आगे चल कर थांग राजवंश की जगह ले कर अपने को सम्राट घोषित किया और उत्तरी ल्यान राज्य की स्थापना की , इस तरह थांग राजवंश का पतन हो गया और चीन के इतिहास में पंच राज्य काल का आरंभ हुआ ।

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