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च्वांग ज़

2017-08-15 17:12:04
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च्वांग ज़ लाओ ज़ के बाद युद्धरत काल के दाओ धर्म का प्रमुख विद्वान था।

चवांग ज़ का परिवार का नाम च्यो है, वह ईसापूर्व चार शताब्दी के सुंग राजवंश का निवासी था। एक बार उस ने सुंग राजवंश के एक स्थानीय अधिकारी के पद पर भी काम किया था। कहा जाता है कि च्वांग ज़ बचपन से ही बहुत बुद्धिमान था और पढ़ने में उस की बहुत रुचि थी। वह एक सरल व सदिच्छापूर्ण व्यक्ति था। वह प्रकृति से प्रेम करता था और छोटे बड़े राजाओं को नजरअंदाज करता था। छ्वू के राजा ने बहुत संपत्ति का लालच देकर उसे अपने देश में प्रधान मंत्री का पद संभालने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन, च्यो ने इंकार कर दिया। इस के बाद उस ने कभी कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं किया। घास से जूता बनाने के काम से वह अपना जीवन भापन करता था और अध्ययन में मग्न रहता था। उस ने अपनी मशहूर लाखों कथनियों को अपनी पुस्तकों में दर्ज किया है।

च्वांग ज़ नामक पुस्तक में अब 33 भाग हैं, जिन में भीतरी भाग, बाहरी भाग और अन्य भाग हैं। भीतरी चार्टर ज्वांग ज़ ने खुद ही लिखा था, जबकि बाहरी और विभिन्न चार्टर संभवतः ज्वांग ज़ के छात्रों और बाद के विद्वानों द्वारा लिख गया था। भीतरी चार्टर में छी वू शात्र, श्याओ याओ यो और दा जुंग शी आदि लेखों ने ज्वांग ज़ के दर्शनशास्त्र को अच्छी तरह प्रतिबिंबित किया है।

दर्शनशात्र में ज्वांग ज़ ने लाओ ज़ और दाओ धर्म की विचारधारणाओं का प्रचार प्रसार करके अपनी विशेषता वाली विचारधारा की व्यवस्था और विशेष पढ़ाई की व्यवस्था स्थापित की है। उन का मानना है कि दाओ यथार्थ दुनिया में सच्चे रुप से मौजूद है । उस ने दाओ को अंतरिक्ष की सभी चीजों का स्रोत माना था। राजनीति में उस ने स्वाभाविक प्रशासन करने का पक्ष लिया। मनुष्यों के जीवन तरीकों में भी उस ने प्रकृति की ओर वापस लौटने का आह्वान किया। उस ने तत्कालीन प्रशासकों की नैतिकता और कानूनी प्रशासन की कड़ी आलोचना की। इतना ही नहीं, उस ने समाज में मर्यादा, कानून, अधिकार व शक्ति की कड़ी निंदा भी की। मनुष्यों के जीवन तरीकों पर, वह प्रकृति का सम्मान करता था और मानता था कि मनुष्यों के लिए सब से अच्छी मानसिक स्थिति बिलकुल मानसिक स्वतंत्रता ही है, नकि भौतिक व मानवीय ख्याति । ज्वांग ज़ की इस विचारधारा व रुख का बाद में चीनी लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो मनुष्य के विचारधारा के इतिहास में एक मूल्यवान संपत्ति है।

ज्वांग ज़ पुस्तक का ईसवी तीन शताब्दी से ईसवी पांच शताब्दी के बीच के वेई चिन राजवंशों के दौरान महत्वपूर्ण प्रभाव दिखाई देता है । वह च्यो ई और लाओ ज़ दो पुस्तकों के साथ तीन शास्त्रों में गिनी जाती है, जिन का चीन के सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। ज्वांग ज़ पुस्तक थांग राजवंश में (ईसा सदी 618 से 907 तक) औपचारिक रुप से दाओ धर्म के मशहूर शास्त्रों में से एक मानी जाती थी।

ज्वांग ज़ ने न केवल अपने विशेष दर्शनशास्त्र से, बल्कि संस्कृति व राजनीतिक विचारों से भी चीनी लोगों पर गहरा असर डाला है। उस के दर्शनशास्त्र में केवल कहानियां नहीं हैं, बल्कि ज्वांग ज़ ने अनेक जीवित व बुद्धिमान प्रतीक कथाओं से लजीले रुप से अपने दर्शनशास्त्र को प्रतिबिंबित किया था। यह पुस्तक मानो एक प्रतीक कथाओं का संग्रह ही है, जिस में अभूतपूर्व कल्पना व कला की शक्ति ओतप्रोत ।

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