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वांग जाओ च्वन

2017-08-15 17:18:29
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प्राचीन चीन में मध्यम चीन की हान जाति की केंद्रीय सत्ता और आसपास की अल्पसंख्यक जातियों की स्थानीय सत्ताओं के बीच अकसर विवाद उठते रहते थे। आम तौर पर युद्ध विवादों का हल करने का त��ीका होता था। लेकिन, कभी कभी राजा अपनी बेटी का दूसरे राजा से विवाह कर देने के तरीकों से भी विवादों का समाधान करते थे। ज्याओ च्वन शू सेई की कहानी इसी तरह की कहानी है।

ईसापूर्व पहली शताब्दी के समय, चीन में हान राज्यवंश का शासन था। दक्षिण पश्चिमी चीन की अल्पसंख्यक जाति शोंग नु के राज्य पर अधिकार करने के लिए छीना झपटी झुक हो गयी। पांच शेन व्यूओं (कबीली सरगना) ने इस मकसद से एक दूसरे से युद्ध किया। अंत में केवल दो शेन व्यू ही जीवित बचे । वे दोनों को इस बात की चिंता थी कि दूसरा शेन व्यू केंद्रीय हान राज्यवंश से मिलकर उस पर आक्रमण न कर दे। इसी कारण हू हेन श्ये नामक शेन व्यू ने खुद ही हान राज्यवंश की राजधानी छांग एन आकर हान के सम्राट के सामने ईमानदारी से अपने मन की बात प्रकट की। हान के सम्राट ने गर्मजोशी से उस का स्वागत किया और उस का सत्कार भी किया। जब हू हेन श्ये छांग एन से रवाना हुए, तो सम्राट ने उसे खूब अनाज दिया और सैनिकों को भेजकर उसे अपने घर वापस लौटने में मदद दी। हान राज्यवंश के समर्थन में हू हेन श्ये ने अंत में पुनः शोंग नु का एकीकरण किया।

हान राज्यवंश के साथ पीढ़ी दर पीढ़ी मैत्रीपूर्ण सहअस्तित्व बनान रहे, इस के लिए ईसापूर्व 33 में, हू हेन श्ये तीसरी बार छांग एन आया। उस ने हान राज्यवंश के सम्राट से उस की एक बेटी का हाथ अपने लिए मांगा। हान के सम्राट ने शेन व्यू की इस मांग को स्वीकार कर लिया, लेकिन, वे अपनी बेटी को शोंग नु नहीं भेजना चाहते थे। इसलिए, हान के सम्राट ने राज्यमहल की सब लड़कियों से कहा कि जो लड़की शोंग नु से विवाह करेगी, सम्राट उसे अपनी बेटी मानेगा।

राज्यमहल की इन लड़कियां की महल में आने के बाद स्वतंत्रता तो खो गयी थी। इसलिए वे किसी भी मैके का लाभ उठाकर महल से चले जाना चाहती थीं, लेकिन, फिर भी उन में से कोई भी शोंग नु से विवाह नहीं करना चाहती थी।

उस वक्त के नियमों के अनुसार, महल की लड़कियां अपने आप सम्राट से नहीं मिल सकती थीं। महल के चित्रकार हर एक लड़की का चित्र बनाकर सम्राट को चुनने के लिए देते थे। जो लड़कियां सम्राट चुनता था, वे ही सम्राट से मिल सकती थीं। उस समय माओ येन शो नामक एक चित्रकार ने लड़कियों से रिश्वत लेने की कोशिश की। लड़कियों ने सम्राट से मिलने के लिए माओ येन शो को अनेक पैसे दिये। एक वांग छांग यानी वांग जाओ च्वन नामक सुन्दरी बहुत बुद्धिमान थी, और वह कविता लिख सकती थी और वाद्य भी बजा सकती थी। लेकिन, वह एक बहुत सरल व ईमानदार भी थी। उस ने माओ येन शो को अपना चित्र बनाने के लिए एक भी पैसा नहीं दिया। माओ येन शो इसलिए गुस्से में था और वांग जाओ च्वन था चित्र नहीं बनाना चाहता था। फलस्वरुप, वांग जाओ च्वन अनेक वर्षों के लिए महल में नजरबंद ही रही गयी और सम्राट से नहीं मिल पायीं।

जब वांग जाओ च्वन ने सुना कि शोंग नु हान राज्य की किसी लड़की से विवाह करना चाहता है, तो खुद के सुखमय भविष्य के लिए ही नहीं, हान और शोंग नु दो जातियों के मैत्रीपूर्ण सहअस्तित्व के लिए उस ने कहा कि वह शोंग नु के शेन व्यू से विवाह करने के लिए तैयार है। हांन के सम्राट बहुत खुश थे और राजधानी छांग एन में हू हेन श्ये और वांग जाओ च्वन के लिए एक भव्य विवाह समारोह का आयोजन किया गया।

हू हेन च्वन अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे। जब वे दोनों हांन सम्राट का आभार प्रकट करने के लिए सम्राट से मिले, तो हान के सम्राट ने प्रथम बार वांग जाओ च्वन को देखा। सम्राट ने देखा कि वांग जाओ च्वन बहुत सुन्दर थी। हालांकि उसे बहुंत दुख हुआ, फिर भी उसे अपने वचन का पालन करना पड़ा। इसी तरह, हान के सम्राट ने वांग जाओ च्वन को अनेक उपहार दिये और उसे अपनी बेटी का स्थान भी दिया।

वांग जाओ च्वन सफ़ेद घोड़ी पर हांन और शोंग नु के अधिकारियों की शरण में छांग एन से रवाना हुई और शोंग नु पहुंची। वांग जाओ च्वन शोंग नु जाति की रस्मों, आदतें को नहीं जानती थीं, फिर भी उस ने धीरे धीरे इन कठिनाइयों को दूर किया और शोंग नु के लोगों के साथ मेल मिलाप से रहने लगी।

वांग जाओ च्वन आजीवन शोंग नु में ही नहीं , उस ने हान जाति की संस्कृति को शोंग नु जाति को हस्तांतरित किया। उस के बेटे व बेटियों ने भी हान जाति और शोंग नु जाति के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास किया। आज चीन के भीतरी मंगोलिया के हु ह हाओ थ शहर के उपनगर में जाओ च्वन का एक मकबरा बना हुआ है, जिसे प्राचीन काल में शोंग नु की जनता ने इस जातीय मैत्री के दूत के लिए बनाया। हजारों वर्षों के लिए जाओ च्वन शू सेई की कहानी चीन के इतिहास में सब से प्रचिलित कहानियों में से एक मानी जाती है। यह कहानी भी चीनी साहित्य विशेष कर कविता और नाटक के क्षेत्र में एक परम्परागत सामग्री स्रोत बन गयी है।

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