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संयुक्त राष्ट्र संघ और चीन

2017-08-15 14:43:08
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वर्ष 1945 के 25 अप्रैल को 50 देशों से आये प्रतिनिधियों ने अमरीका के सन फ्रांसिसिको में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय संगठन का सम्मेलन आयोजित किया। 25 जून को सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर पारित किया गया । 26 जून को चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, ब्रिटेन, अमरीका और अन्य अधिकांश हस्ताक्षरक देशों ने इस की पुष्टि के पत्र पेश किये , जिस से संयुक्त राष्ट्र चार्टर स्वभाविक रूप से प्रभावित हो गया तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की औपचारिक स्थापना हुई। वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र महा सभा में निर्णय लिया गया कि आगे हर 24 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा की रक्षा करना, अंतरराष्ट्रीय समुदायों के बीच विभिन्न देशों की जनताओं के समान अधिकारों और आत्म निर्णय सिद्धांत के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास करना, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व मानवतावादी समस्याओं के हल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग करना और सारी मानव जाति के मानवाधिकार व बुनियादी स्वतंत्रता के सम्मान को बढ़ाना है। वर्ष 2002 के सितम्बर तक, संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल 191 सदस्य देश हो चुके हैं, जिन में संघ के 49 संस्थापक देश शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय अमरीका के न्यूयार्क में है। स्वीजरलैंड के जेनेवा, औस्ट्रिया के वियना, केन्या के नेरोबी और थाईलैंड के बेंकार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय हैं।

चीन एक बड़ा विकासमान देश है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य भी हैं। चीन अंतरराष्ट्रीय मामलों में हमेशा ही सिद्धांतों पर कायम रहता है और न्याय का समर्थन करता है । इसलिए, संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन का महत्वपूर्ण व विशेष स्थान होता है। वर्तान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ध्यानाकर्षक बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ न्यायपूर्ण व उचित नयी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था में किसी तरह की भूमिका अदा कर सकेगा। चीन नयी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था की स्थापना करने, शांति की रक्षा करने, विकास को बढ़ाने और प्रभुतववाद का विरोध करने का पक्ष लेता है। चीन विश्व की शांति व विकास के लिए सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के बीच समनव्य व सहयोग पर जोर देता है।

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