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चीन का संक्षिप्त राजनयिक इतिहास

2017-08-15 14:40:01
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वर्ष 1949 में चीन लोक गणराज्य की स्थापना के बाद चीन के वैदेशिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा गया है।

वर्ष 1949 से पिछली शताब्दी के 50 वाले दशक के अंत तक, चीन ने सोवियत संघ और अन्य समाजवादी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग संबंधों की स्थापना की। वर्ष 1955 में इंडोनिशिया में हुए बांगडुंग सम्मेलन के बाद एशिया व अफ्रीका के कुछ देशों ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की। वर्ष 1956 तक चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 25 तक पहुंची ।

पिछली शताब्दी के 50 वाले दशक के अंत से 60 वाले दशक के अंत तक, चीन ने क्रमशः गिनिया , घाना,माली, कांगो,तान्जानिया आदि देशों के साथ मैत्री संधियों और आर्थिक व तकनीक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किये। चीन ने आंगला , गिनिया बिसाऊ , मोजाम्बिक, जिम्बाबुवे और नामिबिया आदि देशों की सशस्त्र स्वतंत्रता संघर्षों और दक्षिण अफ्रीकी जनता के श्वेत जातीय रंगभेद विरोधी संघर्ष का समर्थन किया। चीन ने क्रमशः म्येंमार, नेपाल, मंगोलिया और अफगानिस्तान के साथ इतिहास से छोड़े गये सीमा समस्याओं का हल किया और सीमा संधियों पर हस्ताक्षर किये। चीन ने पाकिस्तान के साथ चीन के शिन च्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश और पाकिस्तान के वास्त्विक नियंत्रित प्रतिरक्षा क्षेत्रों के बीच सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किया और इंडोनेशिया के साथ प्रवासी चीनियों के दोहरी राष्ट्रीयता सवाल का हल भी किया। वर्ष 1969 तक चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 50 तक पहंची थीं।

नये चीन के वैदेशिक मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 1971 के अक्तूबर में आया था। उसी वक्त, व्यापक विकासशील देशों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र महा सभा के 26 वें अधिवेशन ने भारी बहुमत से प्रस्ताव नम्बर 2758 पारित किया ,संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन लोक गणराज्य के सभी कानूनी अधिकारो की बहाली की और चीनी क्वो मिंग तांग पार्टी के प्रतिनिधियों को संयुक्त राष्ट्र संघ तथा उस के अधीनस्थ सभी संस्थाओं से निकाल दिया। इस के बाद चीन ने अधिकांश पश्चिमी देशों के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की, इसतरह विदेशों के साथ चीन के राजनयिक संबंधों की स्थापना का तीसरा ज्वार उभरा ।

पिछली शताब्दी के 70 के दशक के अंत से 80 के दशक के अंत तक, तत्कालीन चीनी शीर्ष नेता तंग श्यओ फींग की विचारधारा के निर्देशन में चीन ने अमरीका, जापान और पश्चिमी युरोप के साथ सामान्य संबंधों का विकास किया , सोवियत संघ के साथ संबंधों में सुधार लाया , तीसरी दुनिया के देशों के साथ संबंधों का चतुर्मुखी विकास किया , पड़ोसी देशों और व्यापक विकासमान देशों के साथ संबंधों का सुधार व विकास किया है। हांगकांग व मकाओ समस्या का अच्छी तरह समाधान करने के लिए चीन ने ब्रिटेन व पुर्तगाल के साथ राजनयिक वार्ता के बाद उक्ता दो देशों के साथ 1984 के दिसम्बर में और 1987 के अप्रैल में अलग अलग तौर पर संयुक्त वक्तव्य जारी कर इस बात की पुष्टि की कि चीन लोक गणराज्य वर्ष 1997 के पहली जुलाई को और वर्ष 1999 के 20 दिसम्बर को हांगकांग व मकाओ पर अपनी प्रभुसत्ता की बहाली करेगा।

पिछली शताब्दी के 90 के दशक से श्री चांग ज मिन के नेतृत्व वाले चीन के तीसरे नेतृत्व समूह ने श्री तंग श्याओ फिंग की विचारधारा और स्वतंत्रता व शांति की विदेश नीति को विरासत में लेकर इस का कार्यावयन किया, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर विश्व के विभिन्न देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग संबंधों की सक्रिय कोशिश की , नयी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था की स्थापना को आगे बढ़ाया और क्रमशः इंडोनेशिया, सिंगापुर, बुलैई और दक्षिण कोरिया के साथ राजनयिक संबंधों की बहाली की और वियतनाम व मंगोलिया के साथ संबंधों का सामान्यीकरण किया।

वर्ष 1996 में चीनी राष्ट्राध्यक्ष चांग ज मिन ने दक्षिण एशिया के तीन देशों की यात्राएं कीं। सलाह मश्विरे के जरिए, चीन व भारत ने 21वीं शताब्दी के उन्नमुख रचनात्मक साझेदार संबंधों की स्थापना की। चीन व पाकिस्तान ने 21वीं शताब्दी के उन्नमुख चतुर्मुखी सहयोग व साझेदारी संबंधों की स्थापना की। चीन व नेपाल ने पीढ़ी दर पीढ़ी अच्छे पड़ोसी स्वरूपी मैत्रीपूर्ण संबंधों की स्थापना की। चीन ने सक्रिय रुप से एशिया, अफ्रीका व लातिन अमरीका के देशों के साथ संबंधों का निरंतर विकास किया और सहारा के दक्षिण स्थित अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत किया। चीन ने लातिन अमरीका के देशों के साथ संबंधों का निरंतर विकास किया। लातिन अमरीकी देशों व चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 19 तक पहुंची । कुछ देश जिस ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना नहीं की है, भी चीन के साथ संबंधों का विकास करने पर विचार कर रहे हैं।

नयी शताब्दी में प्रवेश के बाद विश्व का प्रमुख प्रतीक यह है कि विश्व बहुध्रुवीकरण और आर्थिक भूमंडलीकरण की ओर बढ़ रहा है। चीन विश्व में सब से अधिक जन संख्या वाला देश है। चीन का विकास विश्व से अलग नहीं हो सकता। विश्व के विकास को चीन की जरुरत भी है। चीन की सदिच्छा है कि शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर विश्व के सभी देशों व क्षेत्रों के साथ सहयोग को मजबूत करेगा और समान विकास करेगा।

चीन का संक्षिप्त राजनयिक इतिहास

中国国际广播电台

वर्ष 1949 में चीन लोक गणराज्य की स्थापना के बाद चीन के वैदेशिक

संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा गया है।

वर्ष 1949 से पिछली शताब्दी के 50 वाले दशक के अंत तक, चीन ने सोवियत संघ और अन्य समाजवादी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग संबंधों की स्थापना की। वर्ष 1955 में इंडोनिशिया में हुए बांगडुंग सम्मेलन के बाद एशिया व अफ्रीका के कुछ देशों ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की। वर्ष 1956 तक चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 25 तक पहुंची ।

पिछली शताब्दी के 50 वाले दशक के अंत से 60 वाले दशक के अंत तक, चीन ने क्रमशः गिनिया , घाना,माली, कांगो,तान्जानिया आदि देशों के साथ मैत्री संधियों और आर्थिक व तकनीक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किये। चीन ने आंगला , गिनिया बिसाऊ , मोजाम्बिक, जिम्बाबुवे और नामिबिया आदि देशों की सशस्त्र स्वतंत्रता संघर्षों और दक्षिण अफ्रीकी जनता के श्वेत जातीय रंगभेद विरोधी संघर्ष का समर्थन किया। चीन ने क्रमशः म्येंमार, नेपाल, मंगोलिया और अफगानिस्तान के साथ इतिहास से छोड़े गये सीमा समस्याओं का हल किया और सीमा संधियों पर हस्ताक्षर किये। चीन ने पाकिस्तान के साथ चीन के शिन च्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश और पाकिस्तान के वास्त्विक नियंत्रित प्रतिरक्षा क्षेत्रों के बीच सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किया और इंडोनेशिया के साथ प्रवासी चीनियों के दोहरी राष्ट्रीयता सवाल का हल भी किया। वर्ष 1969 तक चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 50 तक पहंची थीं।

नये चीन के वैदेशिक मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 1971 के अक्तूबर में आया था। उसी वक्त, व्यापक विकासशील देशों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र महा सभा के 26 वें अधिवेशन ने भारी बहुमत से प्रस्ताव नम्बर 2758 पारित किया ,संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन लोक गणराज्य के सभी कानूनी अधिकारो की बहाली की और चीनी क्वो मिंग तांग पार्टी के प्रतिनिधियों को संयुक्त राष्ट्र संघ तथा उस के अधीनस्थ सभी संस्थाओं से निकाल दिया। इस के बाद चीन ने अधिकांश पश्चिमी देशों के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की, इसतरह विदेशों के साथ चीन के राजनयिक संबंधों की स्थापना का तीसरा ज्वार उभरा ।

पिछली शताब्दी के 70 के दशक के अंत से 80 के दशक के अंत तक, तत्कालीन चीनी शीर्ष नेता तंग श्यओ फींग की विचारधारा के निर्देशन में चीन ने अमरीका, जापान और पश्चिमी युरोप के साथ सामान्य संबंधों का विकास किया , सोवियत संघ के साथ संबंधों में सुधार लाया , तीसरी दुनिया के देशों के साथ संबंधों का चतुर्मुखी विकास किया , पड़ोसी देशों और व्यापक विकासमान देशों के साथ संबंधों का सुधार व विकास किया है। हांगकांग व मकाओ समस्या का अच्छी तरह समाधान करने के लिए चीन ने ब्रिटेन व पुर्तगाल के साथ राजनयिक वार्ता के बाद उक्ता दो देशों के साथ 1984 के दिसम्बर में और 1987 के अप्रैल में अलग अलग तौर पर संयुक्त वक्तव्य जारी कर इस बात की पुष्टि की कि चीन लोक गणराज्य वर्ष 1997 के पहली जुलाई को और वर्ष 1999 के 20 दिसम्बर को हांगकांग व मकाओ पर अपनी प्रभुसत्ता की बहाली करेगा।

पिछली शताब्दी के 90 के दशक से श्री चांग ज मिन के नेतृत्व वाले चीन के तीसरे नेतृत्व समूह ने श्री तंग श्याओ फिंग की विचारधारा और स्वतंत्रता व शांति की विदेश नीति को विरासत में लेकर इस का कार्यावयन किया, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर विश्व के विभिन्न देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग संबंधों की सक्रिय कोशिश की , नयी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था की स्थापना को आगे बढ़ाया और क्रमशः इंडोनेशिया, सिंगापुर, बुलैई और दक्षिण कोरिया के साथ राजनयिक संबंधों की बहाली की और वियतनाम व मंगोलिया के साथ संबंधों का सामान्यीकरण किया।

वर्ष 1996 में चीनी राष्ट्राध्यक्ष चांग ज मिन ने दक्षिण एशिया के तीन देशों की यात्राएं कीं। सलाह मश्विरे के जरिए, चीन व भारत ने 21वीं शताब्दी के उन्नमुख रचनात्मक साझेदार संबंधों की स्थापना की। चीन व पाकिस्तान ने 21वीं शताब्दी के उन्नमुख चतुर्मुखी सहयोग व साझेदारी संबंधों की स्थापना की। चीन व नेपाल ने पीढ़ी दर पीढ़ी अच्छे पड़ोसी स्वरूपी मैत्रीपूर्ण संबंधों की स्थापना की। चीन ने सक्रिय रुप से एशिया, अफ्रीका व लातिन अमरीका के देशों के साथ संबंधों का निरंतर विकास किया और सहारा के दक्षिण स्थित अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत किया। चीन ने लातिन अमरीका के देशों के साथ संबंधों का निरंतर विकास किया। लातिन अमरीकी देशों व चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना करने वाले देशों की संख्या 19 तक पहुंची । कुछ देश जिस ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना नहीं की है, भी चीन के साथ संबंधों का विकास करने पर विचार कर रहे हैं।

नयी शताब्दी में प्रवेश के बाद विश्व का प्रमुख प्रतीक यह है कि विश्व बहुध्रुवीकरण और आर्थिक भूमंडलीकरण की ओर बढ़ रहा है। चीन विश्व में सब से अधिक जन संख्या वाला देश है। चीन का विकास विश्व से अलग नहीं हो सकता। विश्व के विकास को चीन की जरुरत भी है। चीन की सदिच्छा है कि शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर विश्व के सभी देशों व क्षेत्रों के साथ सहयोग को मजबूत करेगा और समान विकास करेगा।

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