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चीन का मशहूर खाना चाओत्ज़

2017-08-15 15:41:30
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यह कहा जा सकता है कि चाओत्ज़ चीनी संस्कृति का एक भाग है । चाओत्ज़ चीन का सब से मशहूर खाना है । घर में चाओत्ज़ खाने से पूरे परिवार का मिलन जाहिर होता है । अतिथियों के समादर और सत्कार में भी चाओत्ज़ खिलाया जाता है । अगर कोई विदेशी चीन में रहकर चाओत्ज़ खाए बिना वापस लौटे , तो इस का चीन में रहना बेकार बताया जाएगा ।

संक्षेप में कहें तो चाओत्ज़ ऐसा भोजन है , जो समोसे की तरह होता है , जिसके अन्दर मांस या सब्जी भरी जाती है । फिर समोसे की तरह उसे बंद कर पानी में उबाला जाता है । समोसे और चाओत्ज़ में सिर्फ इतना अंतर है कि समोसे को तेल में उबाला जाता है और चाओत्ज़ को पानी में । पहले चाओत्ज़ आम तौर पर त्योहार का खाना होता था । पर आज वह एक आम भोजन है । नव वर्ष की पूर्व संध्या पर चीन के हरेक घर में आवश्यक रूप से चाओत्ज़ खाने का रिवाज़ है । चीनी परंपरा में चाओत्ज़ बनाने और खाने के कुछ नियम भी हैं ।

चाओत्ज़ में मांस भी भरा जाता है और कभी सब्जी भी । आम तौर पर मांस और सब्जी का मिश्रण भरा जाता है । चाओत्ज़ में भरे जाने वाली इस सामग्री को बनाने का हुनर आना चाहिये । मांस , सब्जी और कुछ मसालों को मिला कर यह सामग्री तैयार की जाती है । पर सर्वप्रथम मांस आदि को लकड़ी के फटटे पर रखकर इसे चाकू से इस का कीमा बनाया जाता है । चाकू से कीमा बनाते समय ठक ठक की जो सुन्दर संगीत जैसी आवाज़ पैदा होती है , उसे सुनने के बाद पड़ोसी भी जान जाते हैं कि किसी के घर में चाओत्ज़ बनाया जा रहा है । अगर किसी घर में चाओत्ज़ कीमा बनाने की आवाज़ बुलंद है , तो इससे परिवार की संपन्नता जाहिर होती है । इसलिए पुराने काल में चीनी लोग चाओत्ज़ के लिए कीमा के काम को बहुत महत्व देते थे । बेशक समाज की प्रगति के साथ साथ यह सब बदला है ।

चाओत्ज़ का विशेष आकार होता है जिस का विशेष अर्थ है । आम तौर पर चाओत्ज़ का आकार अर्द्धचन्द्र की तरह होता है । चाओत्ज़ बनाते समय मैदे की छोटी गोल बनाकर उस में भरने वाली सामग्री रखी जाती है , फिर इसे बंद करके अर्द्धचंद्राकार की तरह बनाया जाता है । कुछ क्षेत्रों में चाओत्ज़ को प्राचीन चीनी सिक्के के आकार का भी बनाया जाता है । ऐसा चाओत्ज़ बनाकर लकड़ी के फटटे पर रखा जाता है जिस से संपन्नता का अर्थ जाहिर होता है । कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में लोग चाओत्ज़ के किनारों को गेहूं की बालियों की तरह बनाते हैं । ऐसा करने से किसानों की नये साल में अच्छी फसल होने की उम्मीद रहती है । चाओत्ज़ बनाकर इसे पानी में उबाला जाता है । चाओत्ज़ को कूकर में पानी उबलने के बाद ही डाला जाता है । फिर कड़छी से कूकर में बार बार चलाते रहना पड़ता है , नहीं तो चाओत्ज़ कूकर की सतह के साथ चिपक सकती है । कूकर में पानी उबलने के बाद भी इस में दो तीन बार ठंडा पानी डालना चाहिये , दसेक मिनट बाद चाओत्ज़ पक सकता है । पुराने समय में चाओत्ज़ खाने के भी विशेष तरीके होते थे । लोग चाओत्ज़ खाने से पहले प्रथम कटोरे की चाओत्ज़ को पूर्वजनों के सम्मान में प्रस्तुत करते थे । दूसरे कटोरे की चाओत्ज़ को रसोईघर के देवता आदि के सम्मान में प्रस्तुत किया जाता था । पुराने समय में कुछ क्षेत्रों में चाओत्ज़ खाते समय कविता सुनाने का भी रिवाज़ था । जैसेः

स्वर्ण कटोरा , चांदी का कटोरा ,

इन में चाओत्ज़ भरो ,

देवता खा��र खुश हो ,

साल भर शांति रहे ।

पूर्वज और देवता का सम्मान करने के बाद ही लोग खुद चाओत्ज़ खाना शुरू करते थे । चीनी परंपरा के मुताबिक दो कटोरे चाओत्ज़ खाना अच्छी बात है , एक कटोरा नहीं । इसलिए चाओत्ज़ खाते समय हिसाब रखने की जरूरत है । इसलिए कूकर , कटोरे और चाओत्ज़ रखने वाले फटटे पर रखे जाने वाले चाओत्ज़ की सम संख्या होनी चाहिये , विषम नहीं ।

चीनी पंचांग के मुताबिक एक साल के अंतिम दिन यानी नव वर्ष की पूर्व संध्या को चाओत्ज़ खाना पड़ता है । बाहर रहने वाले लोगों को इस दिन से पहले ही घर वापस लौटना चाहिये और अपने सभी परिजनों के साथ बैठकर चाओत्ज़ खाना चाहिये । लेकिन आधुनिक समय में चाओत्ज़ खाने का सिर्फ सांस्कृतिक अर्थ मौजूद रह गया है । चाओत्ज़ खाने के बहुत से परंपरागत तरीकों में बदलाव आ गया है । आज चीन के शहरों में लोग कम खुद चाओत्ज़ बनाते हैं । जब वे चाओत्ज़ खाना चाहते हैं तो वे या सुपर बाजार में डीपफ्रीज़ में रखी चाओत्ज़ खरीदने जाते हैं , या रेस्तरां में चाओत्ज़ खाने जाते हैं । आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में भी चाओत्ज़ खाने की आदत कम दिखने लगी है ।

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