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व्युन श्याओ पर्व

2017-08-15 15:35:06
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चीनी पंचांग के अनुसार, साल के पहले मास की 15 तारीख को चीन के परम्परागत त्यौहारों में एक व्युन श्याओ पर्व होता है ,जो वसंत त्यौहार का अंतिम दिन भी माना जाता है।

व्युन श्याओ पर्व व्युन शी, व्युन ये और शांग व्युन के नाम से भी जाना जाता है। व्युन श्याओ पर्व की रात चीनी पंचांग के नव वर्ष की प्रथम पुर्णिमा होती है। चीनी रीति रिवाज़ के अनुसार, व्युन श्याओ पर्व की रात रंगबिरंगी कंडीलें जलायी जाती हैं, इसलिए, व्युन श्याओ वर्त कंडील त्यौहार के नाम से मशहूर होता है ।

कंडीलों की प्रदर्शनी और व्युन श्याओ नामक पकवान खाना व्युन श्याओ पर्व के दो प्रमुख विषय होते हैं। व्युन श्याओ पर्व पर चीनी लोग क्यों कंडीलें टांगते हैं ? इस के पीछे यह कथा चलती है कि ईसा पूर्व 180 में चीन के पश्चिमी हान राज्यवंश के सम्राट हान वन ती चीनी पंचांग के अनुसार, वर्ष के प्रथम मास कें 15 वें दिन पर गद्दी पर बैठा , संयोग से चीनी पंचांग के वर्ष की प्रथम मास की 15 वीं रात पुर्णिमा होती है । अपने इस खुशगवार दिन को मनाने के लिए, हान वन ती ने हर वर्ष के पहले मास की 15 वीं तारीख को कंडीलों का त्यौहार तैय किया , इस रात शहर की सभी सड़कों पर विविध शैलियों और विभिन्न रंगों की कंडीलें लटकाई जाती थी। इस के बाद हर वर्ष की इसी रात, वह राज महल से बाहर निकल कर आम प्रजाओं के साथ मिल कर विविध व रंगबिरंगे रूपाकारों की कंडिलें देखने का आनंद उठाता था। ईसा पूर्व 104 में हर साल की इसी रात को औपचारिक रुप से देश का प्रमुख त्यौहार निश्चित किया गया। इस निर्णय ने व्युन श्याओ पर्व को चीनी जनता का औपचारिक त्यौहान बनाने के साथ उस के पैमाने को भी विस्तृत किया था। सरकारी निर्धारण के अनुसार, पर्व की रात भर सार्वजनिक स्थलों और हर घर में कंडील जलाना जरुरी था। विशेषकर रौनक सड़कों और सांस्कृतिक केंद्रों में शानदार कंडील प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाता था। लोग कंडीलों पर लिखी गई पहेलियां बुझाने और शैर व ड्रैगन नुमा नृत्य करने में लग जाते थे। ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार, ईस्वी 713 में, तत्कालीन थांग राज्यवंश ने राजधानी छांग एन (आज के शी आन) शहर में कंडीलों और दीपों से एक बड़े आकार वाले पहाड़ का निर्माण किया, जिस की ऊंचाई लगभग सात मीटर थी और उस पर 50 हजार से ज्यादा रंगबिरंगी कंडीलें टांगी गई थीं।

व्युन श्याओ पर्व की सुन्दर कंडीलें आम तौर पर रंगीन काग़ज़ों द्वारा बनायी गयी हैं , जो पहाड़, भवन मंडप , मानव आकृति , फल-फूल और जीव जन्तु की आकृति में होती हैं। ज़ो मा तङ नामक घूमती कंडी नाना प्रकारों की कंडीलों में सब से ज्यादा चीनी विशेषता दिखती है। वास्त्व में ज़ो मा तङ नामक कंडील एक प्रकार का खेल दीपक है। कहा जाता है कि इस किस्म की कंडील का एक हजार से ज्यादा वर्ष पुराना इतिहास रहा है। इस प्रकार की कंडील के भीतर ऐसा सरल वायु यंत्र लगा है , जिस में जब मोमबत्ति जल रही है, तो गर्म हवा ऊपर की ओर उठ जाने से वायु यंत्र के पत्ते चक्कर काटते हुए घूम रहे हैं और पत्तों पर चिपके कागज़ से बने घोड़े भी घूमते हुए चक्कर काटते है। कंडील के बाहर से देखने पर तो मालूम होता है कि कंडील की कागजी भित्ति पर असंख्ये घोड़े दौड़ते घूमते हों।  

व्युन श्याओ पर्व के अवसर पर व्युन श्याओ नाम का चीनी परम्परागत पकवान खाना भी चीनी लोगों की एक रीति रिवाज़ है। लगभग सुंग राज्यवंश (ईस्वी 960 से ईस्वी 1279 तक) में, चीनी लोग व्युन श्याओ पर्व मनाते समय एक अनुठा स्वादिष्ट पकवान बना कर खाने लगे। चीनी लोग चिकनी आटा से गोलाकार पकवान बनाते हैं , जिस के अम्दर विभिन्न किस्मों के फलों की मिठ्ठी किशमिश डालते हैं , तैयारशुदा पकवान को उबला पानी में पकाने ��े बाद खाया जाता है। व्युन श्याओ पर्व के उपलक्ष में बनाए जाने वाले इस किस्म के पकवान को उत्तर चीन के लोगों ने पर्व का समान नाम व्युन श्याओ दिया, जबकि दक्षिण चीन के लोग इसे थांग व्युन और थांग थ्वुन अर्थात उबला पानी में बना गोलाकार पकवान कहलाते हैं।

आज व्युन श्याओ की लगभग तीस किस्में मिलती हैं। व्युन श्याओ पकवान के भीतर बेर , पिसा हुआ दाल , तिल , अखरोट व मूंगफली , चोकलेट और किशमिस आदि भरा जाता है। चीन के विभिन्न स्थानों में व्युन श्याओ का भिन्न भिन्न स्वाद चखने को मिलता है।

व्युन श्याओ पर्व में चीनी लोग कंडील देखने के अलावा, अनेक मनोरंजन गतिविधियों का आयोजन भी करते हैं, जैसा कि चीनी परम्परागत लोक नृत्य यांग ग , पैलडी नृत्य और सिंह नृत्य प्रस्तुत करते हैं। चीन ही नहीं, विश्व के सभी चीनी लोगों के आवास स्थानों में भी त्यौहार के अवसर पर चीनी लोग सिंह का नृत्य पेश करते हैं। चीनी राष्ट्र का परम्परागत सिंह नृत्य दक्षिणी व उत्तरी दो शैलियों में विभाजित होता है। दक्षिणी शैली के सिंह नृत्य में नृत्य के कौशल व दांवपेंच की परिवर्तनशीलता को बड़ा महत्व दिया जाता है, जिस में आम तौर पर दो नृतक सिंह नृत्य कते हैं। जबकि उत्तरी चीन के सिंह नृत्य में दस या दर्जनों लोग एक साथ नाचते हैं। चीनी परम्परात संगीत के साथ साथ नृतक सिंह नृत्य में नाचते और खेल कौशल पेश करते हैं। दर्शक भी बड़े उत्साह के साथ नृत्य में भाग ले सकते हैं।

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