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भौगोलिक स्थितियां

2017-08-15 14:07:41
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चीन पहाड़ बहुल देश है , जहां पहाड़ी क्षेत्रों का क्षेत्रफल देश की कुल भूमि का दो तिहाई होता है ।यहां चर्चित पहाड़ी क्षेत्रों में पर्वत ,टीला व पठार शामिल हैं ।चीन की विभिन्न भौगोलिक स्थितियों के अन्तर्गत 33 प्रतिशत पर्वतीय क्षेत्र ,26 प्रतिशत पठार , 19 प्रतिशत बेसिन और 10 प्रतिशत टीला हैं ,जबकि मैदान 12 प्रतिशत है । दसियों लाख वर्षों से पहले छिंगहाइ तिब्बत पठार का उदय हुआ ।इस बड़े भू क्रस्ट हलचल से चीन की वर्तमान भौगोलिक स्थितियां बन गयी हैं । हवाई जहाज से देखा जाए , तो चीन की आम भौगोलिक स्थिति सीढीनुमा होती है ,यानी वह पश्चिम से पूर्व तक कदम ब कदम नीची होती चली आती है । हिन्द भू प्लेट और एशिया व यूरोप महाद्विपी प्लेट के टक्कर से उत्पन्न हुए छिंगहाइ तिब्बत पठार समुद्रसतह से औसततः चार हजार मीटर से अधिक ऊंचा है ,जो विश्व की छत के नाम से विख्यात है ।छिंगहाइ तिब्बत पठार चीन की भौगोलिक स्थिति में सब से ऊंची सीढी है । इस पठार पर स्थित हिमालय पर्वत-श्रृंखला की सब से ऊंची चोटी चुमूलांमा है ,जो समुद्रसतह से 8848.13 मीटर ऊंची है ।चुमूलांमा विश्व में सब से ऊंची चोटी भी है ।चीन की भू स्थिति की दूसरी सीढी भीतरी मंगोलिया पठार ,पीली मिट्टी वाले पठार ,युन क्वो पठार और तारिम बेसिन ,चुंकर बेसिन व सछवान बेसिन से बनता है ,समुद्र सतह से उन की औसत ऊंचाई 1000 से 2000 मीटर तक है । चीन की भूमि पर तीसरी सीढी दूसरी सीढी के पूर्वी छोर में खड़े ताशङआनलिन पर्वत , ताईहान पर्वत , वुशान पर्वत तथा श्येफङशान पर्वत से देश के पूर्वी समुद्रतट तक फैली है , इस भू स्थिति में भूमि की ऊँचाई एक हजार से ले कर पांच सौ मीटर तक नीची आई है , जहां उत्तर से दक्षिण में क्रमशः उत्तर पूर्व चीन मैदान , उत्तर चीन मैदान , यांगत्सी नदी के मध्य व निचले भाग का मैदान तथा मैदानों से जुड़े नीची पहाडियां और टीले देखने को मिलते हैं । चीन के सब से पूर्व के भाग में समुद्री शेल्फ का छिछला पानी वाला जल क्षेत्र है ,जो दो सौ मीटर से कम गहरा है , यह चीन की भूमि की चौथी सीढी है । 

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