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मंदिर और मठ

2017-08-15 15:05:19
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मंदिर और मठ चीन के बौध धर्म के वास्तु निर्माण में गिना जाता है , मंदिर का निर्माण सब से पहले भारत में आरंभ हुआ था , चीन के उत्तरी वुई राज्यकाल में मंदिर का निर्माण जोरों पर चलने लगा । मंदिरों व मठों के विकास से चीन के सामंती समाज के सांस्कृतिक विकास तथा धार्मिक उत्पत्ति व ह्रास की झलक मिलती है , जिस का बड़ा एतिहासिक मूल्य और कला का महत्व होता है ।

प्राचीन काल में चीनी लोग वास्तु निर्माणों में यन-यांग वाले चीनी दर्शन शास्त्र के विश्व दृष्टिकोण पर विश्वास रखते थे और निर्माणों में संतुलन , सममिति और स्थायित्व का सौंदर्य बौध मानते थे , इस से प्रस्थान हो कर चीन के बौध मंदिर निर्माणों में पूर्वज भक्ति तथा ब्रह्मण कर्म का विशिष्ट समावेश देखा जा सकता है , मंदिर की संरचना चतुर्कोण है , बींचोंबीच के धुरी पर मुख्य भवन का निर्माण है और दोनों तरफ समानांतर वास्तु निर्माण होते हैं , पूरे निर्माण समूह के संतुलित और सुव्यवस्थित होने पर बल दिया जाता है । इस के अलावा उद्यान सरीखा मंदिर भी चीन में देखने को बहुत पाता है । इन दोनों शैली के प्रयोग से चीन के मंदिर और मठ देखने में बड़ा भव्य और गांभीर्य लिए हुआ है , साथ ही उस में असाधारण प्राकृतिक सौंदर्य और गहन चेत भाव व्यक्त होता है ।

निर्माण संरचना पर प्राचीन काल के चीनी मंदिर और मठ के सामने बीचोंबीच मुख्य द्वार होता है , उस की दोनों तरफ घंटा टावर और ढोल टावर है , मुख्य द्वार पर दिगिश्वर भवन है , मुख्य द्वार के भीतर चार वज्रधर मुर्तियां विराजमान है , मंदिर के भीतर क्रमशः महावीर भवन तथा सूत्र भंडारण भवन आता है , उन के दोनों तरफ भिक्षु निवास और भोजनालय है । महावीर भवन बौध मंदिर का सब से अहम और सब से बड़ा भवन निर्माण है , भवन में महात्मा बुद्ध की प्रतीमा विराजमान है । स्वी और थांग राज्य काल से पहले चीन के मंदिरों में मुख्य दरवाजे के बाहर या प्रांगन के भीतर स्तूप बनाये गए थे , उस के पश्चात मंदिर के भीतर बुद्ध भवन स्थापित किया गया और स्तूप अलग जगह बनाये जाने लगा ।

लोयांग शहर का श्वेत अश्व मठ 

मध्य चीन के हनान प्रांत के लोयांग शहर में अवस्थित श्वेत अश्व मठ चीन के हान राजवंश में निर्मित हुआ था , वह चीन में सरकार द्वारा निर्मित सब से पुराना बौध मंदिर है , मंदिर आयताकार है ,जो चालीस हजार वर्ग मीटर की भूमि घेर लेता है । श्वेत अश्व मठ के निर्माण से चीन , पूर्वी एशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया में बौध धर्म के विकास को प्रबल प्रेरणा मिली थी । यही वजह है कि आज तक भी बहुत से देशों के बौध जगत के लोग इस की तीर्थ यात्रा करने आते हैं ।

वुथाई पर्वत का बौध मंदिर 

चीन के शानसी प्रांत का वुथाई पर्वत देश के बौध धर्म का सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थान है । पर्वत पर 58 प्राचीन बौध मंदिर सुरक्षित हैं , जिन में थांग राजवंश में निर्मित मशहूर नानछान मठ और फ्वोक्वांग मठ शामिल हैं । नानछान मठ अर्थात दक्षिण ध्यान मठ चीन में अब तक सुरक्षित सब से पुराना काष्ठ बौध मंदिर है । फ्वोक्वांग अर्थात बुद्ध आलोक मठ में चीन के विभिन्न एतिहासिक कालों में विभिन्न वास्तु शैली पर निर्मित निर्माण एकत्र हुए है , मंदिर की वास्तु कला , मुर्ति कला , भित्ति चित्र तथा लिपिकृति चार किस्मों के करिश्मा माने जाते हैं ।

हङशान पर्वत पर हवा में खड़ा मठ 

शानसी प्रांत के हङशान पर्वत में खड़ी चट्टान पर निर्मित एक मठ इस के कारण देशभर मशहूर है कि वह हवा में खड़ा हुआ मठ है , असल में वह साधी खड़ी चट्टान पर बनाया गया अधर में लटका हुआ वास्तु निर्माण है , उस के नीचे गहरी घाटी है और उस का बनावट विशेष और अनोखा है , जो वास्तु निर्माण में बहुत कम देखने को मिलता है । यह अनोखा मठ ह्वनय़्वान काउंटी के दक्षिण में 3.5 किलोमीटर दूर चिनलुंग पहाड़ी घाटी के पश्चिम पक्ष में खड़ी चट्टान के बीच में स्थित है , वह चीन में अब तक सुरक्षित एकमात्र सीधी चट्टान में निर्मित काष्ठ निर्माण है , इस का निर्माण उत्तरी वुई राज्य काल में हुआ था , थांग , चिन , मिन और छिंग राजवंशों में इस का जोर्णोद्धार किया गया था , इस मठ के सामने चीन का मशहूर पहाड़ हङशान खड़ा है , मठ चट्टान पर लटका हुआ है , सीधी खड़ी चट्टान पर कोई चढ़ने वाली सीढी नहीं है , दूर से देखने पर वह हवा में खड़ा सा जान पड़ता है , जो सचमुच हङशान पहाड़ का एक अनोखा दृश्य है ।

पोताला महल 

तिब्बत का लामा धर्म चीनी बौध धर्म का एक विशेष संप्रदाय है ।लामा मंदिर आकार में बहुत विशाल है , भवन महल ऊंचा है और बहुत से मंदिर पहाड़ के ढलान पर बनाये गये । तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में आबाद पोताला महल ठेठ लामा मंदिर है ।पोताला महल का निर्माण थांग राजवंश के काल में शुरू हुआ था , कालांतर में उस का विस्तार और पुनर्निर्माण किया गया , और आज का जितना विशाल मंदिर समूह का रूप धारण किया गया । पूरा महल पहाड़ों पर नीचे से ऊपर की दिशा में बनाया गया है , जो देखने में असाधारण आलीशान और विराट होता है । महल का पूरा क्षेत्रफल बीस हजार वर्ग मीटर है , भीतर बीस से अधिक भवन और महल हैं , मुख्य भवन में 12 साल की आयु के बुद्ध शाक्यामुनी की प्रतीमा आसन् है , जो एक सोना का पानी मढ़ी मूल्यवान कांस्य़ मुर्ति है । पोताला महल थांग राजवंश की वास्तु कला पर निर्मित है , निर्माण में नेपाल और भारत की वास्तु कलाओं की श्रेष्ठता भी अपनाई गई है ।

तस्वीरः पोताला महल

पोताला महल के अलावा उत्तर चीन के छङत्ये शहर में निर्मित आठ मंदिर और पेइचिंग का य्वाङ ह भवन भी मशहूर लामा मंदिर हैं ।

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