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प्राचीन चीनी स्थापत्य कला

2017-08-15 15:07:04
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स्थापत्य कला अचल संगीत के नाम से भी मशहूर है , वह मानव सभ्यता का धरोहर है । प्राचीन काल के चीनी स्थापत्य निमाणों में हान जाति का काष्ठ स्थापत्य निर्माण प्रमुख था और अल्प संख्यक जातियों के श्रेष्ठ वास्तु निर्माण भी शामिल थे । प्राचीन चीनी स्थापत्य कला चीन की परम्परागत संस्कृति से सिंचित भूमि से पैदा , विकसित और परिपक्व हुई थी , ईसापूर्व दूसरी सदी से ले कर ईसा के बाद 19 वीं सदी तक चीन की स्थापत्य कला बाह्य दुनिया से बन्द हुई अपनी अलग व्यवस्था संपन्न हुई थी । चीनी प्राचीन स्थापत्य कला का अत्यन्त उच्च सौंदर्य मूल्य और शिल्प स्तर होता है , जिस में गहन सांस्कृतिक चेतन गर्भित है । चीनी प्राचीन स्थापत्य कला विश्व में एक ऐसी विशेष कला पद्धति है , जिस का इतिहास सब से लम्बा पुराना है , जो व्यापक क्षेत्रों में विकसित हो गया है तथा जिस की शैली में अपनी अलग पहचान कायम हुई है । चीनी प्राचीन स्थापत्य कला से जापान , कोरिया और वियतनाम की प्राचीन स्थापत्य कला काफी बड़ी प्रभावित हो गई थी , 17 वीं शताब्दी के बाद इस का यूरोप की वास्तु कला पर भी प्रभाव पड़ा था ।

चीन की भूमि विशाल है , जन संख्या अधिक है , चीन के विभिन्न स्थानों में रहने वाले लोगों ने विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक व भौगोलिक स्थितियों के मुताबिक स्थानीय सुविधाओं का लाभ उठा कर विभिन्न संरचनाओं और शैलियों के प्राचीन वास्तु निर्माणों का आविस्कार किया था । उत्तर चीन के पीली नदी के घाटी क्षेत्र में प्राचीन चीनियों ने लकड़ी और पीली मिट्टी से मकान बना कर सर्दी व आंधी बारिश से बचने की कोशिश की थी , दक्षिण चीन में प्राचीन लोगों ने स्थापत्य काम के लिए लकड़ी व मिट्टी के अलावा बांस और सरपत का इस्तेमाल भी किया था । चीन के कुछ स्थानों में आर्द्रता से बचने और कमरों को हवादार बनाने के लिए लोगों ने मकान के निचले भाग को जालीदार भी बनाया था । इस के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले प्राचीन चीनियों ने पत्थरों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया तथा वन्य क्षेत्रों में कूप रूपी मकान बनाया था ।

इतिहास में प्राचीन चीनी स्थापत्य विकास के तीन प्रमुख उभार काल से गुजरा था , जो क्रमशः छिन और हान राज्य काल में , स्वी व थांग राज्यकाल में तथा मिन व छिंग राज्यकाल में उभरा था । इन तीन विकास कालों में चीनी स्थापत्य निर्माण की जो एक बड़ी विशेषता देखी जा सकती है , वह यह है कि बड़ी संख्या में प्रतिनिधित्व रखने वाले वास्तु निर्माण बनाए गए थे , जिन में राजमहल , मकबरा , राजधानी का नगरी निर्माण , रक्षा संस्थापन तथा जल सिंचाई परियोजना आदि शामिल थे । इन तीनों कालों की प्राचीन स्थापत्य कला से शैली तथा निर्माण सामग्री के पहलु में चीन के उत्तरवर्ती काल बहुत प्रभावित हो गए । छिन राजवंश के छिनशहुंग का मकबरा तथा लम्बी दीवार , स्वी राजवंश में निर्मित चाओ चो पुल तथा मिन व छिंग राजवंशों में स्थापित पेइचिंग का शाही प्रासाद आज भी लोगों को प्राचीन चीनी स्थापत्य कला की बेजोड़ मोहकता दिखाते हैं ।

लेकिन वक्त लम्बे पुराने होने , प्राकृतिक क्षति लगने तथा युद्ध व आग से ग्रस्त होने के परिणामस्वरूप बहुत से प्राचीन निर्माण देश की भूमि पर लिप्त हो गए है , वर्तमान में जो प्राचीन स्थापत्य निर्माण सुरक्षित रह गए हैं , वे बहुधा थांग राज्यकाल ( ईसा 7 वीं शताब्दी ) के बाद बनाए गए थे । इस स्तंभ में आगे थांग राजवंश के पश्चात चीन के प्राचीन स्थापत्य कला की संक्षिप्त जानकारी दी जाएगी ।

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