हालांकि जापान के फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र के नंबर 3 रिएक्टर में 14 मार्च को हाइड्रोजन का विस्फोट हुआ और 15 मार्च की सुबह नंबर 2 में भी विस्फोट की ध्वनि सुनायी दी, फिर भी जापान के अधिकारियों ने कहा कि फ़ुकुशिमा का पहले परमाणु संयंत्र में बड़े पैमाने पर न्यूक्लियर रिसाव होने की संभावना कम है। यह परमाणु संयंत्र व जापान के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के अन्य परमाणु संयंत्र अभी नियंत्रण में हैं।
जापान के मंत्रिमंडल के प्रमुख्य सचिव एदानो यूकीओ ने 15 मार्च को कहा, संभव है कि विस्फोटित हुए संयंत्रों में रिएक्टर कंटेनर पूरी तरह से विकिरण को सील नहीं कर सकते हों। लेकिन परमाणु संयंत्रों के पास नाभिकीय विकिरण का स्तर अभी स्पष्टतः नहीं बढ़ा है, जिस का आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
एक ऑस्ट्रेलियाई परमाणु वैज्ञानिक ने कहा कि भूकंप व सुनामी की तुलना में जापान के परमाणु संयंत्रों में मौजूदा न्यूक्लियर रिसाव से होने वाली हानि कम होगी। अब फ़ुकुशिमा के पहले परमाणु संयंत्र में रेडियमधर्मी रिसाव बड़े पैमाने पर होने की संभावना कम है।
फ़ुकुशिमा पहला परमाणु संयंत्र में पैदा होने वाली समस्याओं से निपटने के लिये जापान ने प्रधानमंत्री नाओतो कान के नेतृत्व में न्यूक्लियर दुर्घटना निवारण नियामक विभाग की स्थापना की है।
भूकंप आने के बाद जापान में कुल 4 परमाणु संयंत्रों को अलग अलग हद तक क्षति पहुंची है। अब 11 रिएक्टरों का काम बंद हो गया है।
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