श्रोता दोस्तों, आएं शांगहाई विश्व मेले के बारे में एक रिपोर्ट सुनें।
श्रोता दोस्तो, आप सुन रहे हैं विश्व में सब से तेज पियानो वादक श्री हावाश द्वारा चीन के शांगहाई विश्व मेले के लिए संगीत बद्ध की गई सिम्फनी। 25 जुलाई को हंगरी से आए पियानो वादक श्री हावाश ने चीन के शांगहाई विश्व मेले में हंगरी के संग्रहालय में आकर पर्यटकों के सामने प्रस्तुति पेश की । उन्होंने शांगहाई विश्व मेले के सांस्कृतिक केंद्र में शांगहाई सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के साथ सहयोग करके इस लाल सिम्फनी को बजाया।
क्या आप ने लीजेंड ऑफ 1900 नामक फिल्म देखी है। इस फिल्म में एक लीजेंड पियानो वादक है, वे बहुत जल्दी पियानो बजा सकते हैं। वास्तव में हमारी दुनिया में भी ऐसे तेजी से पियानो बजाने वाले व्यक्ति हैं। हंगरी से आए श्री हावाश का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सब से तेजी से पियानो बजाने वाले वादक के रुप में दर्ज है। उन्होंने शांगहाई विश्व मेले के हंगरी संग्रहालय में आयोजित न्यूज ब्रीफिंग में संवाददाता से कहा
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की परीक्षा हंगरी संगीत कॉलेज में आयोजित हुई। उस समय गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स आयोग के व्यक्ति लंदन से आए थे। सिर्फ आखों से पयानो बजाने की तेज गति नहीं देखी जा सकती। इसलिए हम ने पियानो बजाने की प्रक्रिया को कैमरे में रिकॉर्ड किया। उस समय मैं एक मिनट में केवल 200 बार की बोर्ड पर उंगलियां चलाता तो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल हो सकता था। मैं ने एक मिनट में 498 बार की बोर्ड पर उंगलियां चलाईं जिस में सब से तेज समय एक सेकंड में 13 बार था।
लेकिन श्री हावाश ने यह भी कहा कि यह तेजी से की बोर्ड पर उंगलियां चला कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम शामिल होना कोई सांस्कृतिक मूल्य नहीं है। यह सिर्फ उन की एक विशेषता है। क्या वे इतने तेजी से पियानो बजा सकते हैं। यह उन के चीनी वूशू के अभ्यास करने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि चीनी वूशू का अभ्यास करने से उन की उंगलियां बहुत शक्तिशाली हो गई हैं। इसलिए वे अन्य पियानोवादकों की तुलना में तेजी से पयानों बजा सकते हैं। वूशू के अलावा श्री हावाश का चीन के साथ घनिष्ठ संबंध है। उन्होंने कहा
मैं चीन को पसंद करता हूं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चीन का बल बढ़ रहा है। मेरा चीन के साथ घनिष्ठ संबंध भी है। मेरी मा मेरे जन्म से पहले चीन के पेइचिंग में 5 साल तक रही थी। मैं बचपन से चॉपस्टिक का उपयोग करना सीख गया था। चीन में आना भी मेरे परिवार का एक सपना था। मुझे आशा है कि अगले साल जब मैं चीन में अपने कार्यक्रम का प्रदर्शन करुगां उस समय मेरी मां यहां आकर देख सकेंगी।
श्री हावाश ने कहा कि उन की मा की वजह से उन्होंने अगले साल चीन में प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उस समय वे चीन के पेइचिंग, शांगहाई, हाईनान और शा मन की यात्रा करेंगे। वे शांगहाई विश्व मेले के लिए संगीत बद्ध की गयी लाल सिम्फनी का प्रदर्शन करेंगे। चीन की विशेषता दिखाने के लिए लाल सिम्फनी में चीन के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र भी शामिल किए गए हैं।
मैं ने लाल सिम्फनी को बनाते समय चीन के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र का उपयोग भी किया। चीन एक लंबे इतिहास वाला महा देश है। इसलिए मुझे चीन की विशेषता दिखाने के लिए अपने संगीत में चीनी पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र को शामिल करना चाहिए।
श्री हावाश 4 वर्ष की उम्र से पियानो का अभ्यास करने लगे थे। उन का मुख्य विषय शास्त्रीय संगीत है। वे हंगरी के लिस्ट संगीत कॉलेज में स्नातक होने के बाद बुडापेस्ट के संगीत कॉलेज में अध्यापक बन गए। उन्होंने बचपन से संगीत के रास्ते को चुना है।
2 साल का था ,तो मैं ढोल बजाना पसंद करता था। लेकिन मेरे माता पिता को ढोल पसंद नहीं था। 3 वर्ष के होने पर उन्होंने मुझे एक गिटार खरीद दिया। बाद में उन्होंने मेरे लिए एक पियानो खरीदा जिस से मैं पियानो बजाने लगा।
श्री हावाश के शस्त्रीय संगीत में समकालीन संगीत भी शामिल है जिस से उन की अपनी विशेष संगीत शैली बन गयी है। श्री हावाश ने कहा कि उन्हें आशा है कि उन का संगीत हंगरी और चीन के बीच संस्कृति व कला के आदान प्रदान में एक पुल बन सकेगा। इस बार शांगहाई विश्व मेले ने उन्हें एक अच्छा मौका दिया है।
मेरे विचार में मेरा संगीत और शांगहाई विश्व मेले का लक्ष्य एक ही है। इस मौके पर सब लोग आदान-प्रदान कर सकते हैं, दोस्त बन सकते हैं।
अच्छा श्रोता दोस्तो, आज का शांगहाई विश्व मेला कार्यक्रम यहीं समाप्त होता है। अब पवन को आज्ञा दें, नमस्कार । (पवन)
















