टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने तीसरी अप्रैल को घोषणा की कि फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र के विकिरण युक्त पानी को समुद्र में जा गिरने से रोकने में हुई दो बार की कोशिशें विफल रही हैं।जापान सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है कि परमाणु-रिसाव का संकट संभवतः कई महीनों तक जारी रहेगा।
टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने शनिवार को पाया था कि फुकुशिमा दायची संयंत्र के दूसरे रिएक्टर के उच्च स्तर पर विकिरण हुआ पानी पानी-निकासी गेट में आई दरार के जरिए सीधे समुद्र में जा गिरा,बल्कि पानी में रेडियोएक्टिव आयोडीन—131 का स्तर सामान्य से 10 हजार से भी अधिक पाया गया।पानी को समुद्र में दाखिल होने से रोकने के लिए कंपनी ने कंकरीट और विशेष आणुविक बहुलक सामग्री डालने के तरीके से दरार भरने की कोशिशें कीं,लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं।
कई महीनों तक संभवतः जारी रहने वाले इस संकट के मद्देनजर जापानी मंत्री-परिषद के सचिवालय के प्रधान एडानो यूकियो ने 3 अप्रैल को कहा कि फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र के आसपास के निवासियों के लिए किसी दूसरे क्षेत्र में शरण लेना दीर्धकालिक होगा।जापान जल्द ही ऐसी तीसरी समिति बनाएगा,जिसका मिशन दुर्घटना की गंभीरता का आकलन और दुर्घटना का निबटारा करने के सरकारी विभागों और टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी के कामों की पूरी जांच करना हो।















