
चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति के पूर्व उपाध्यक्ष शंग ह्वा-रन ने 10 मार्च को पेइचिंग में कहा कि चुनाव-कानून में संशोधन के मसौदे में निश्चित शहरों व गांवों के बीच समानता,क्षेत्रीय समानता और जातीय समानता जैसे सिद्धांत जनता के अपने भाग्य का आप मालिक बनने के अधिकार को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त व सुनिश्चित किया गया है।
श्री शंग ह्वा-रन ने निंगशा प्रांत के जन प्रतिनिधि-मंडल की एक बैठक में बोलते हुए कहा कि चुनाव-कानून में संशोधन के मसौदे में साफ तौर पर लिखा गया है कि शहरों व गांवों के जन प्रतिनिधियों की संख्या बराबर है।इस का मतलब है कि गांववासी और शहरवासी बराबर चुनाव-अधिकार का उपभोग कर सकते है।चीन के विभिन्न प्रांतों और स्वायत्त प्रदेशों को प्रशासनिक क्षेत्रों के तौर पर सत्ता की सर्वोच्च संस्था में अभिव्यक्ति,भागीदारी और फैसला लेने के समान अधिकार है।चाहे उन की आबादी बड़ी हो या छोटी,उन के समुचित संख्या में जन प्रतिनिधि होते हैं।इस से क्षेत्रीय समानता दिखाई देती है।विभिन्न जातियों के चाहे उन की आबादी कितनी क्यों न हो,सत्ता की सर्वोच्च संस्था में प्रतिनिधि होते हैं।यह जातीय समानता का द्योतक है।
श्री शंग का कहना था कि यदि चुनाव-कानून में संशोधन का मसौदा पारित किया जाता है,तो निस्संदेह उस की जनता के अधिकारों की सुनिश्चिता में बेहद बड़ी भूमिका होगी।















