चीन के आर्थिक करिश्मा का मूल मंत्र

2021-05-31 15:49:55

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“नान य्वेन पेइ चे ”चीन में एक बहुत लोकप्रिय कहावत है। लगभग हरेक पढ़े-लिखे व्यक्ति को उसके बारे में पता है। नान य्वेन का शाब्दिक अर्थ है कि तांगे का मूठ दक्षिण की ओर है, जबकि पेइ चे का मतलब है कि तांगे के पहियों के निशान उत्तर की ओर हैं। यह कहावत 2 हजार से अधिक साल पहले चीन के युद्धरत राज्य काल में एक कहानी से आयी है।

उस समय चीन में कई राज्य हुआ करते थे। एक दिन वेइ राज्य का एक व्यक्ति छु राज्य जा रहा था। उसने अपने साथ बहुत पैसे रखे, एक अच्छा तांगा किराये पर लिया और एक सार्थक सारथी को निमंत्रित किया। छु राज्य वेइ राज्य के दक्षिण में स्थित है, लेकिन उस व्यक्ति ने दिशा की परवाह न कर सारथी को उत्तर जाने को कहा। एक राहगीर ने उससे पूछा कि आप कहां जा रहे हैं। उसने जोर से जवाब दिया मैं छु राज्य जा रहा हूं। राहगीर ने उसे बताया कि छु राज्य तो दक्षिण में स्थित है, आप सही दिशा में नहीं जा रहे हैं। लेकिन उस व्यक्ति ने जरा भी चिंता न कर कहा कि कोई बात नहीं। मेरा घोड़ा बढ़िया है, मेरे पास पैसे बहुत हैं और मेरा सारथी निपुर्ण है। यह कहने के बाद उस व्यक्ति ने सारथी को जल्दी से आगे बढ़ने के लिए कहा। राहगीर ने असाय होकर सिर हिलाया और खुद से कहा कि आपका घोड़ा कितना भी तेज है, पैसे कितने भी ज्यादा हैं और सारथी कितना भी अच्छा है, लेकिन आप उतना ही छु राज्य से दूर होंगे। इस कहानी ने हमें बताया है कि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए रास्ता सर्वोपरि है। अगर रास्ता गलत है तो आप गंतव्य पर नहीं पहुंच पाएंगे।

इधर 40 से अधिक वर्षों में चीन ने विकास के झंडे गाढ़े हैं। अब चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, विश्व में वस्तु निर्यात का सबसे बड़ा देश है और वर्ष 2020 में अमेरिका को पीछे छोड़कर सबसे ज्यादा विदेशी पूंजी आकर्षित करने वाला देश बन गया है। बुनियादी संस्थापनों के निर्माण में चीन ने चौंकाने वाली उपलब्धियां प्राप्त की हैं, यहां तक कि उसे इंफ्रासट्रक्चर मानस्टर का नाम मिला। इस मार्च में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने घोषणा की कि चीन में अति गरीबी मिटायी जा चुकी है, जिसने दस साल पहले यूएन 2030 निरंतर विकास एजेंडा में निर्धारित गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरा किया है। अब चीन के ग्रामीण क्षेत्र में हरेक व्यक्ति को खाने और कपड़ों की किल्लत नहीं है और बुनियादी सामाजिक गारंटी भी मिली है। पिछली सदी के 80 के दशक की शुरूआत में चीन और भारत की जीडीपी के आकार में 19-20 का फर्क था, लेकिन अब चीन की जीडीपी भारत से 5 गुना अधिक है। वर्ष 1996 में चीन के संचालित रेलवे की कुल लंबाई पहली बार भारत को पार कर गयी और वर्ष 2001 में चीन के विद्युत रेलवे की लंबाई भारत से अधिक हो गयी। अब चीन में रेलवे की कुल लंबाई 1 लाख 46 हजार से अधिक किलोमीटर है, जिसमें हाई स्पीड ट्रेन की लंबाई 37 हजार किलोमीटर से ज्यादा है।

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विकास में चीन की शानदार सफलता के पीछे सबसे बड़ा राज यही है कि सत्तारूद्ध पार्टी सीपीसी के नेतृत्व में चीन ने अपनी स्थिति से मेल खाने वाला एक रास्ता निकाला है। यह रास्ता चीन में चीनी विशेषता वाला समाजवाद कहा जाता है। यह रास्ता निकालने में दिवंगत नेता तंग श्योपिंग ने असाधारण योगदान दिया है, जिन्हें चीन के सुधार और खुलेपन का प्रमुख रचनाकार कहा जाता है। चीनी विशेषता वाला समाजवाद सोवियत संघ व पूर्वी यूरोप के समाजवाद से अलग है और पूंजीवाद एकदम नहीं है। बाहरी लोगों के लिए इस रास्ते को सटीक रूप से समझना मुश्किल है, क्योंकि इसके प्रचुर विषय और विभिन्न पहलुओं से संबंधित हैं। पर इस की दो मुख्य विशेषताओं का पता लगाना वर्तमान चीन को समझने में मददगार हैं। पहला, राजनीति में चीन सीपीसी के नेतृत्व पर कायम रहता है। यह 1 अरब 40 करोड़ से अधिक आबादी और 56 जातियां होने वाले देश के लिए राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और मजबूत निष्पादन होने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूसरा, आर्थिक क्षेत्र में चीन आधुनिक बाजार व्यवस्था के निर्माण में संलग्न है। यह चीनी अर्थव्यवस्था की जीवंत शक्ति रिलीज करने और प्रेरित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चीन का रास्ता अभ्यासों में निकाला गया है। इस दौरान अवश्य ही कुछ न कुछ सवाल पैदा हुए हैं, जैसे भ्रष्टाचार, अमीर और गरीब का फासला, आर्थिक ढांचे में मौजूद असंतुलन, लालफिताशाही, प्रदूषण इत्यादि। चीन सरकार इन सवालों को दूर करने की कोशिश भी कर रही है। भविष्य में वो चुनौतियां जरूर उभरेंगी, जो कभी सोची नहीं होगी। चीन को अधिक प्रवर्तन, साहस और सावधानी की जरूरत होगी। मगर रास्ते की मुख्य दिशा गलत नहीं है, तो उतार-चढ़ाव के बावजूद चीन आगे बढ़ता रहेगा।(वेइतुंग)

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