06 मई 2021

2021-05-05 18:39:44

अनिलः सबसे पहले यह जानकारी....

ब्रिटेन में 21 साल की महिला ने एक बच्चे को जन्म देकर रिकॉर्ड बना दिया। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस महिला के पेट से जन्में बच्चे का वजन करीब छह किलो है। कम उम्र की महिला द्वारा इतने वजनी बच्चे को जन्म देना डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।

दरअसल, यह मामला ब्रिटेन के ऑक्सफोर्डशायर स्थित एस्टन का है। यहां एम्बर कंबरलैंड नामक एक महिला को जब लेबर पेन हुआ, तो उन्हें नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया। जब डॉक्टरों ने अम्बर को देखा, तो उन्हें लगा जुड़वा बच्चे पैदा होंगे। लेकिन यहां डॉक्टर गलत साबित हुए।

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एम्बर कंबरलैंड ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसका वजन 13 पाउंड यानी करीब छह किलोग्राम था। एम्बर ने 13 अप्रैल को अपनी बेटी को जन्म दिया और इसका नाम एमिलिया रखा। बता दें कि एमिलिया ने गर्भावस्था के दौरान अपने माता-पिता को चकित कर दिया था।

एम्बर के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान रेगुलर चेक-अप करने वाले डॉक्टर ने को उम्मीद थी कि जुड़वा बच्चा होगा। उन्होंने कहा कि पेट में ही यह इतनी बड़ी थी कि कोई भी यही सोच रहा था। हालांकि, हम इसे अल्ट्रासाउंड पर भी देख सकते थे।

बता दें कि एम्बर कंबरलैंड ने दूसरी सबसे वजनदार बच्ची को जन्म दिया है। इससे पहले साल 2012 में ब्रिटेन में ही एक काफी वजन वाली बच्ची पैदा हुई थी। उस बच्ची का वजन 14 पाउंड यानी करीब साढ़े छह किलो था।

नीलमः अब समय हो गया है, अगली जानकारी का..

कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पृथ्वी का तापमान गर्म हो रहा है। ग्रीन हाउस गैसों में निरंतर वृद्धि के चलते धरती का औसतन तापमान बढ़ने लगा है। इस कारण ध्रुवों पर जमे ग्लेशियर पिघल रहें हैं। इससे पृथ्वी का जल चक्र प्रभावित हो रहा है, जिसके वजह से एक बड़ा खतरा उभर सकता है। बता दें कि ग्लेशियर के भीतर बड़ी मात्रा में अज्ञात वायरस छिपे हुए हैं, जो पिघलने के चलते दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। 

हाल ही में अमेरिका के वैज्ञानिकों का एक समूह ग्लेशियर के भीतर दफन वायरसों पर शोध करने के लिए गया। उन्होंने वहां से सैंपल एकत्रित किए और रिसर्च में पाया कि जिस ग्लेशियर का उन्होंने सैंपल लिया था, उसमें 28 प्रकार के जिंदा वायरस थे, जो कि 15 हजार सालों से बर्फ के अंदर दफन थे। वैज्ञानिकों ने इस अनुसंधान के बाद बताया कि ये बहुत ही खतरनाक वायरस हैं। ये अलग-अलग तरह की जलवायु में भी जीवित रहने में सक्षम हैं। ऐसे में कल को अगर ये सक्रिय होते हैं, तो परिणाम काफी भयंकर होंगे। इनके वजह से लाखों लोगों की जान जा सकती हैं। हम इनसे लड़ने के लिए अभी तैयार नहीं हैं।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि आज अंटार्कटिका का ग्लेशियर पहले के मुकाबले काफी तेजी से पिघल रहा है। इसके ग्लेशियर में न जाने कितने वायरस छिपे हुए हैं, जो आने वाले समय में पृथ्वी पर एक भयंकर महामारी ला सकते हैं। ये महामारी आज के कोरोना महामारी से भी ज्यादा खतरनाक होगी।

हाल ही में कुछ महीनों पहले उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर पिघलने की खबर सामने आई थी। भारत के इस इलाके में काफी ज्यादा ग्लेशियर हैं। पर्यावरणविदों की माने तो निरंतर बढ़ते तापमान से इनके पिघलने की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। ऐसे में ग्लेशियर के भीतर दफन वायरस बर्फ पिघलने की वजह से नदी में मिल सकते हैं। इस कारण इन वायरसों का नदी के सहारे पूरे भारत भर में फैलने की संभावना है, जिसके कारण आशंका जताई जा रही है कि एक गंभीर महामारी भारत में जन्म ले सकती है।

इस समय पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। महामारी क्या होती है? ये अब हमें पता चल रहा है। इसके गंभीर परिणाम क्या हैं? ये आज हमारी आंखों के सामने दिख रहें हैं। विश्व भर में रोजाना हजारों जानें जा रहीं हैं। करोड़ों लोग अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं। इंसान सीमित हो गया है।

अनिलः अब एक और जानकारी का समय हो गया है... पाकिस्तान को एक बार फिर से शर्मिंदा होना पड़ा है। दक्षिण कोरिया में पाकिस्तान के दो राजनयिकों को चोरी करते हुए पकड़ा गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दोनों राजनयिक एक दुकान से चॉकलेट और हैट चोरी कर रहे थे। इस दौरान वो ऐसा करते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। सबसे ज्यादा दिलचस्प बात ये है कि दक्षिण कोरिया के यॉन्गसान में ये घटनाएं अलग-अलग दिनों में हुई हैं। हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान को कई बार अपने लोगों की वजह से शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।

कोरिया टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी दूतावास के दो कर्मचारी दक्षिण कोरिया में 1,900 वॉन (कोरियाई करेंसी) और 1,000 वॉन के सामान की चोरी करते हुए पकड़े गए हैं। पाकिस्तानी दूतावास के एक राजनयिक पर आरोप है कि उसने 10 जनवरी को 1,900 वॉन की चॉकलेट चोरी की, जबकि दूसरे राजनयिक ने 1,100 वॉन की हैट चुराने का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हैट चोरी होने के बाद स्टोर के कर्मचारी ने केस फाइल कराया, जिसके बाद इस मामले की जांच शुरू हो गई। जांच में जुटी पुलिस ने जब स्टोर के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला, तो दोनों आरोपियों की पहचान पाकिस्तान के राजनयिकों के तौर पर हुई। हालांकि, दोनों राजनयिकों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया है। क्योंकि उन्हें डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी मिली हुई है।

आपको बता दें कि विएना कन्वेंशन के मुताबिक, दूसरे देश में तैनात किसी भी देश के राजनयिक और उसके परिवार को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं राजनयिक और उसके परिवार को हिरासत में या फिर पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया जा सकता है।

नीलमः अब रूबरू कराते हैं इस जानकारी से। निकोला टेस्ला सदी के उन गिने-चुने महान वैज्ञानिकों में एक थे, जिन्होंने मानव जाति के पूरे इतिहास को ही बदल के रख दिया। इनका जन्म 10 जुलाई 1856 को क्रोशिया में हुआ था। टेस्ला अपने स्कूली दिनों में काफी तेज थे। वे गणित के मुश्किल से मुश्किल सवालों को अपने मन में ही हल कर लेते थे। 1875 में निकोला टेस्ला ने पोलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। वहां इन्होंने 9 परिक्षाओं में पहला स्थान प्राप्त किया।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद निकोला टेस्ला ने कई जगहों पर काम किया। इसके बाद वह थॉमस एडीशन के साथ काम करने लगे। वहां इन्होंने एडीशन के कई अविष्कारों को खोजने में काफी मदद की। इस दौरान एडीशन ने टेस्ला को अपने जनरेटर और मोटर को अच्छा बनाने का चैलेंज दिया। उन्होंने टेस्ला से कहा अगर वह ऐसा करते हैं तो एडीशन उन्हें कई हजार डॉलर देंगे। वहीं जब टेस्ला ने इस कार्य को कर दिया तो थॉमस एडीशन अपने वायदे से मुकर गए। इस कारण निकोला टेस्ला और एडिशन के बीच मतभेद हो गया और टेस्ला ने वहां से नौकरी छोड़ दी। 

इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की कंपनी की शुरुआत की। यहां इन्होंने सदी की सबसे बड़ी खोज ए.सी करंट प्रणाली को ढूंढा। इसके अंतर्गत बिजली को एक जगह से दूसरी जगह तक आसानी से ले जाया जा सकता था। वहीं दूसरी ओर थॉमस एडीशन डीसी करंट प्रणाली के पक्ष में थे। इसके बाद दोनों के बीच एसी/डीसी वार शुरु हो गया। आगे चलकर यह एसी/डीसी वार विज्ञान जगत का सबसे मशहूर वार बना। इसमें जीत निकोला टेस्ला की हुई। निकोला टेस्ला ने अपने जीवन में कई अविष्कार किए। इन्होंने टेस्ला कॉइल्स, विद्युत से चलने वाली मोटर, एक्स-रे तकनीक, रेडियो, एसी करेंट जैसे कई महत्वपूर्ण खोजें की। 

एक रिपोर्ट की माने तो रेडियो की खोज जी मार्कोनी ने नहीं निकोला टेस्ला ने की थी। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन जी मार्कोनी के रेडियो की खोज को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य ठहराया था। इसके बाद उसने इस अविष्कार का पेटेंट निकोला टेस्ला को दे दिया था। निकोला टेस्ला ने कई सारी किताबों को पढ़ा था। वे 8 भाषाओं के जानकार थे। उनके पास एक अद्भुत स्मृति थी।  

अनिलः निकोला टेस्ला के मुताबिक उन्होंने एक ही समय में भूत, भविष्य और वर्तमान को देखा था। टेस्ला ने अपने समय में कई हैरतअंगेज भविष्यवाणियां की थी, जो कि आगे चलकर सही साबित हुई। जीवन के अंत दिनों में उनके कुछ प्रयोग असफल साबित हो गए। इस कारण वे डिप्रेशन में चले गए। उन्होंने सब से मिलना जुलना बंद कर दिया था। वह अकेले ही रहने लगे थे। सन 1943 में इस महान वैज्ञानिक का निधन हो गया। निकोला टेस्ला ने कई बड़ी वैज्ञानिक खोजें की, जिसका उन्हें कभी कोई श्रेय नहीं मिला। इतना कुछ करने के बाद भी इस महान वैज्ञानिक का जीवन काफी गरीबी में गुजरा।

इसी के साथ प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला संपन्न होता है। अब बारी है श्रोताओं के पत्रों की।

पहला पत्र हमें आया है, खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे का। लिखते हैं, हमें दिनांक 29 अप्रैल का टी-टाइम कार्यक्रम बेहद लाजवाब लगा ।

इस प्रोग्राम में आपने जापान में भूकंप के झटके से विशाल घड़ी के चालू होने की बात बतायी, जो कि खुशी प्रदान कर गया । साथ ही पंजाब मे एक कबूतर के खिलाफ कार्रवाई वाली जानकारी हैरान करने वाली लगी । वहीं मिनी भारत के बारे में बताई गई जानकारियां भी शानदार लगी।

इसी के साथ शायरी भेज रहा हूं। शायरी  :-  दिन गुरुवार का खास हो जाता है, जब श्रोताओं का मनपसंद टी-टाइम कार्यक्रम रेडियो पर आ जाता है , हम धन्यवाद करते हैं पूरी टीम का, जिनकी मेहनत से हमारा भरपूर मनोरंजन हो जाता है ।

धन्यवाद जी।

दुर्गेश जी बहुत-बहुत शुक्रिया।

नीलमः अब बारी है अगले पत्र की। जिसे भेजा है, खुर्जा, यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं, भाई अनिल पांडेय जी बहन नीलम जी, सप्रेम नमस्ते।

पिछला टी-टाइम भाई अनिल पांडेय जी और बहन नीलम जी की शानदार प्रस्तुति में सुनकर दिल खुशी से झूम उठा। कार्यक्रम सुना और पसंद आया।

कार्यक्रम में एक जानकारी जापान से सुनवायी गयी जिसमें आपने बताया कि 100 साल पुरानी घड़ी भूकंप के आने से बंद हो गयी। 2021 में भूकंप आने से घड़ी बिलकुल ठीक हो गयी। इस घटना को तो हम कुदरत का चमत्कार ही कहेंगे।

अगली जानकारी पंजाब से सुनी, जिसमें बताया गया कि पंजाब पुलिस ने कबूतर पर ही एफ आई आर दर्ज कर दी। यह जानकारी प्रंशसा योग्य ही कही जायेगी।

अगली जानकारी आयरलैंड से सुनी, जिसमें एक किशोर पर विमान में सफर करते हुए उसके पैरों पर खौलती चाय गिर गयी। हर्जाने के तौर पर उसे 58 लाख रुपये प्राप्त हुए। इस घटना के बाद उस किशोर के परिजनों को कितनी परेशानी हुई, यह भी हमने सुना। उधर कार्यक्रम में फिजी में 37 फीसदी आबादी भारतीय लोगों की है और राजभाषा हिंदी को भी दर्जा प्राप्त है। यह हम भारतीय लोगों के लिये बहुत ही गर्व की बात है। कार्यक्रम में फिल्मी गीत हमको मालूम है इश्क मासूम है सुनकर बहुत मज़ा आया। साथ ही श्रोता बंधुओ के पत्र भी सराहनीय लगे। जबकि जोक्स बिलकुल नए और शानदार लगे। शानदार कार्यक्रम के लिए बहुत धन्यवाद। अरोड़ा जी पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

अनिलः अब पेश करते हैं केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल का पत्र। लिखते हैं, आदरणीय अनिलजी एवं नीलमजी, नमस्कार।

दिनांक 29 अप्रैल की साप्ताहिक 'टी टाइम' की प्रस्तुति भी जानकारियों की लिहाज़ से बेजोड़ रही। मेरी राय में यह कहना ग़लत न होगा कि -यही एकमात्र ऐसा कार्यक्रम बचा है, जो कि श्रोताओं को सीआरआई हिन्दी से जोड़े हुये है। जापान या कहीं भी भूकम्प आने का मुख्य कारण धरती की सबसे अशांत टेक्टोनिक प्लेट्स का होना सम्बन्धी जानकारी काफी ज्ञानवर्ध्दक लगी। इसके साथ ही यह जान कर हैरानी हुई कि जापान के यामामोटो प्रिफेक्चर के एक बौद्ध मठ में लगी सौ साल पुरानी  विशाल घड़ी कैसे वर्ष 2011 की सुनामी में बन्द हो गयी थी और फिर सन 2021 में आये एक भूकंप के कारण एकाएक फिर से चालू हो गयी। वहींअमृतसर के कहागढ़ पुलिस थाने में एक कबूतर पर केस दर्ज होने का किस्सा भी रोचक कहा जायेगा। वहीं आयरलैंड में रहने वाले एमरे कराक्या नामक युवक को टर्किश एयरलाइंस से हर्जाने के तौर पर 58 लाख रुपए मिलने का समाचार बेहद सुखद लगा, अन्यथा बड़े-बड़े विमान हादसों में भी इतनी बड़ी राशि कहाँ मिलती है।        

नीलमः सुरेश आगे लिखते हैं कि जानकारियों के क्रम में दक्षिण प्रशान्तीय द्वीप देश फिजी पर दी गयी जानकारी इसलिये सबसे अच्छी लगी, क्योंकि यह भारतवंशियों से जुड़ी हुई थी। निश्चित तौर पर जहां की 37 फीसदी आबादी भारतीय मूल के लोगों की हो, उसे तो मिनी भारत कहा ही जायेगा। कार्यक्रम में फिजी में प्रचुर मात्रा में मौज़ूद प्राकृतिक संसाधनों, वहां के पर्यटन एवं व्यापार आदि पर भी अहम जानकारी प्रदान की गयी। विशेषकर, यहां के दो प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु पर दी गयी जानकारी काफी सूचनाप्रद लगी। इंटरनेट पर सर्च करने वाले मित्र जानते होंगे कि वर्तमान में फिजी से दिन भर हिन्दी फ़िल्मी गाने एवं भजन आदि प्रसारित होते रहते हैं।

इन तमाम जानकारियों के साथ आज भी कार्यक्रम में पेश श्रोताओं की राय एवं चुटीले जोक्स प्रस्तुति में जान डाल गये। धन्यवाद फिर एक बेहतरीन पेशकश के लिये। सुरेश जी पत्र भेजने और कार्यक्रम के बारे में टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद।

अनिलः इसी के साथ प्रोग्राम में श्रोताओं की टिप्पणी संपन्न होती है। अब समय हो गया है जोक्स का..

पहला जोक.

सोनू बहुत दुखी था...!

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किसी ने पूछा क्यों टेंशन में हो...?

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सोनू- यार एक दोस्त को प्लास्टिक सर्जरी के लिए

2 लाख रुपये उधार दिए थे। अब उसे पहचान नहीं पा रहा हूं...!

दूसरा जोक..

पप्पू समोसे को खोलकर

अंदर का मसाला ही खा रहा था।

.संजू- अरे! तू पूरा समोसा क्यों नहीं खा रहा...?

.पप्पू- अरे मैं बीमार हूं ना...

इसलिए डॉक्टर ने बाहर की चीज खाने से मना किया है।

तीसरा जोक.

एक बार बस के कंडक्टर ने एक बच्चे से पूछा-

तुम हर रोज दरवाजे के पास ही खड़े रहते हो,

तुम्हारा बाप चौकीदार है क्या...?

.बच्चा बहुत ही शरारती था,

बोला - तुम हमेशा मुझसे पैसे मांगते रहते हो,

तुम्हारा बाप भिखारी है क्या...?

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