15 अप्रैल 2021

2021-04-14 18:22:18

अनिलः सबसे पहले यह जानकारी...

हर इंसान का जीवन जीने का अपना-अपना तरीका होता है। कुछ लोगों को कई तरह की सुख-सुविधाओं का शौक होता है, तो वहीं कुछ लोग बहुत सीमित चीजों में ही अपनी जिंदगी गुजार लेते हैं। आसान शब्दों में कहें, तो इंसान ने अपने जिंदगी को जीने के लिए एक पैमाने तय कर रखे हैं। भागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण लोग शांति औक सुकून की तलाश कर रहे हैं। कुछ इसी तरह अमेरिका के रहने वाले टिम डेविडसन ने शाति की तलाश में घर छोड़ दिया और आगे की जिंदगी जीने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए।

दरअसल, टिम डेविडसन ने पहले एक टिफनी वैन (पहियों पर बना घर) खरीदा और बाद में इस वैन को पार्क करने के लिए फ्लोरिडा में 1.5 एकड़ यानी 65 हजार 340 वर्ग फीट में फैला एक आईलैंड ही खरीद लिया। इसके लिए टिम डेविडसन को 2 लाख डॉलर यानी भारतीय करेंसी के हिसाब से 1 करोड़ 46 लाख रुपए चुकाने पड़े थे। इतनी बड़ी रकम टिम डेविडसन ने केवल शांति और सुकून की तलाश में खर्च कर दिए।

टिम डेविडसन ने रहने के लिए जो टिफनी वैन खरीदा है, उसमें 270 वर्ग फीट की जगह है। इतने में ही उन्होंने लिविंग स्पेस, वर्क स्पेस और किचन बना रखा है। वैन पर बने इस घर को खरीदने के बाद डेविडसन एक ऐसी जगह की तलाश में निकले जहां वो अपने इस छोटे से आशियाने को लेकर जा सकें। डेविडसन का मानना है कि वो मिनिमलिस्ट हैं यानी वो कम चीजों में जिंदगी जीने में विश्वास रखते हैं।

टिम डेविडसन की इस चाहत को पूरा करने में उनकी पत्नी सैम ने भी काफी मदद की। उनका यह छोटा सा घर इतना सुरक्षित है कि उन्होंने पूरा लॉकडाउन ही इसमें ही बिता दिया। साथ ही पहियों पर बने इस घर को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। इसके बाद आइलैंड पर शिफ्ट होने के बाद टिम को ये ख्याल आया कि तूफान से बचने के लिए भी तैयार रहना होगा।

नीलमः अब एक जानकारी ऐसी कि जो महिलाओं से जुड़ी है।

मानव शरीर एक जटिल संरचना है और इसके बारे में समझना आसान नहीं है। किसी भी इंसान के साथ कभी भी कुछ ऐसा हो सकता है, जो आपको हैरत में डाल सकता है। कुछ इसी तरह का मामला इंग्लैंड से सामने आया है। यहां एक महिला प्रेग्नेंट होने के कुछ दिनों के बाद फिर से गर्भवती हो गई। इस अजीबोगरीब मामले ने डॉक्टरों को भी आश्चर्य में डाल दिया था।

दरअसल, रेबेका रॉबर्ट्स और उनकी पत्नी काफी समय से बांझपन की समस्या से जूझ रहे थे। कुछ सप्ताह पहले घर पर किए गए प्रेग्नेंसी टेस्ट के पॉजिटिव आने से ये दंपति काफी खुश थे। इसके बाद इन्होंने डॉक्टर से सलाह लेकर अल्ट्रासाउंड के दौरान अपने बच्चे को सोनोग्राम स्क्रीन पर देखा।

इंग्लैंड के विल्टशायर में रहने वाले 39 वर्षीय रेबेका रॉबर्ट्स ने बताया कि मुझे पहले अल्ट्रासाउंड स्कैन को देख काफी खुशी मिली थी, लेकिन 12 सप्ताह के बाद दूसरे अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ने मुझे सदमे में ला दिया। इतना ही नहीं सोनोग्राफर को भी ये रिपोर्ट आश्चर्यजनक लगा। कमरे में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। इसके बाद सोनोग्राफर ने मेरी तरफ देख पूछा कि क्या आप जुड़वां बच्चों की उम्मीद कर रहे हैं?

बता दें कि महिला के गर्भ में एक ही साथ जुड़वा बच्चे नहीं थे। पहले गर्भ के कुछ दिनों के बाद महिला फिर से प्रेग्नेंट हो गई थी। विज्ञान की भाषा में ऐसे मामले को सुपरफेटेशन कहा जाता है। प्रसूति विशेषज्ञ डेविड वॉकर ने कहा कि इस महिला की गर्भावस्था भी चिकित्सा साहित्य में दर्ज कुछ सुपरफेटेशन मामलों में से एक है।

सुपरफेटेशन की समस्या कोई सामान्य बात नहीं है। डॉक्टर डेविड वॉकर को इसके निदान में काफी मेहनत करनी पड़ी। प्रसूति विशेषज्ञ के तौर पर डेविड वॉकर ने 25 वर्षों के अपने अनुभव में ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। उन्होंने बताया कि, "हम चिंतित थे, क्योंकि दूसरा जुड़वा बच्चा बहुत छोटा था। यह केवल नियमित रूप से स्कैन करके देखा गया था। उसके विकास की दर लगातार तीन सप्ताह पीछे थी। हमें एहसास हुआ कि यह सुपरफटेशन था।" हालांकि, महिला ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया।

अनिलः भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों रांची शहर के लोगों को अपने फार्म का आर्गेनिक सब्जी और फल खिला रहे हैं। क्रिकेट के मैदान में अपनी शानदार बल्लेबाजी और चतुर कप्तानी से लोगों का दिल जीतने वाले महेंद्र सिंह धोनी अपने फॉर्म हाउस में तरह-तरह के फल और सब्जियां उगा रहे हैं। उनके फॉर्म हाउस में उपजे फल-सब्जियों की रांची में बहुत अच्छी डिमांड है।

बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी ने अपने फॉर्महाउस में स्ट्रॉबेरी की भी खेती किए हैं। उनके फॉर्महाउस में 10 टन स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हुआ है। इतने भारी पैमाने पर स्ट्रॉबेरी उपजाकर महेंद्र सिंह धोनी ने करीब 30 लाख रुपये की कमाई की है। स्ट्रॉबेरी के साथ ही धोनी के फॉर्महाउस में खरबूजा और तरबूजा की भी खूब पैदावार हुई है। फॉर्महाउस से रोजाना 300 किलो तरबूज और 200 किलो खरबूजा की उपज हो रही है।

43 एकड़ में फैले महेंद्र सिंह धोनी के फॉर्महाउस की सबसे खास बात ये है कि वो बिना किसी केमिकल के इस्तेमाल किए पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करते हैं। इस वजह से इनके फॉर्महाउस की फल और सब्जियां काफी स्वादिष्ट होते हैं और इनकी बाजार में अच्छी डिमांड भी है। महेंद्र सिंह धोनी ने एक एकड़ में शिमला मिर्च की खेती भी की है।

फल और सब्जियों के अलावा महेंद्र सिंह धोनी अब रांची के बाजार में कड़कनाथ मुर्गे को भी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बड़े स्तर पर कड़कनाक मुर्गे को पालने और बेचने की योजना तैयार की है। बता दें कि इस मुर्गे का मांस अन्य मांसों से काफी अलग होता है। कड़कनाथ चिकेन का बाजार में दाम 600 रुपये से 1,000 रुपये किलो होता है।

दिलचस्प बात ये है कि बेहतरीन क्रिकेटर होने के साथ धोनी अब झारखंड के टॉप पशुपालक भी घोषित किये जा चुके हैं। इसके साथ ही उनकी ऑर्गेनिक खेती को देखते हुए इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में उन्हें बेस्ट कृषक के रूप में भी पुरस्कार दिया जा सकता है।

नीलमः अब आपको एक और रोचक खबर से रूबरू कराते हैं।

मॉनिटर लिजर्ड नाम सुनते ही हॉलीवुड की गोडजिला वर्सेस कोंग फिल्म याद आ जाती है? फिल्म में बड़े-बड़े मोन्सटर जैसे दिखने वाले दानवों के प्रकोप को देख बच्चा भी डर जाए। मॉनिटर लिजर्ड भारत में भी पाए जाते हैं। भारत में इन्हें गोह कहा जाता है। गोह, छिपकलियों के निकट श्रेणी में आते हैं। इनका आकार छोटा भी होता है और बड़ा भी। कई गोह का आकार तो 10 फीट तक लंबा होता है। गोह को सामान्यतः बड़ी छिपकली या विशालकाय छिपकली कहा जाता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक विशालकाय छिपकली का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो काफी हैरतअंगेज है। इसे देखकर आप भी स्तब्ध हो जाएंगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि यह विशालकाय छिपकली (मॉनिटर लिजर्ड) एक शॉप के अंदर घुसी हुई है। वहां वह दराज के ऊपर चढ़ते हुए समानों को नीचे गिरा रही है।

यह घटना थाईलैंड की है। यह विशालकाय छिपकली सेवन इलेवन नामक स्टोर में घुस गई और इधर-उधर घूमने लगी। वीडियो में आप देख सकते हैं कि यह विशालकाय छिपकली दराज पर कैसे चढ़ रही है। इस दौरान दुकान का जितना भी समान दराज पर रखा था। वह इधर-उधर नीचे बिखरने लगा। दराज के ऊपर चढ़ने के बाद विशालकाय छिपकली वहां बैठ कर आराम करने लगी। इस विशालकाय मॉनिटर लिजर्ड को इस कदर देख कोई भी डर जाएगा। 59 सेकेंड का यह वीडियो इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

अनिलः यह दशक ब्रह्मांड की खोजबीन के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। विश्व की तमाम स्पेस एजेंसियां रोमांच भरे मिशन्स अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में हैं। इनका लक्ष्य स्पेस एक्सपलोरेशन को व्यवसायिक रूप देना, स्पेस माइनिंग और तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण है, मंगल ग्रह पर इंसानों को उतारकर उसे पृथ्वी की शक्ल देना है।

मंगल सदा से हमारी उत्सुकता का विषय रहा है। 2012 में जो रोवर नासा ने मंगल की सतह पर उतारा था उसका नाम भी क्यूरोसिटी यानी उत्सुकता ही था। वहीं बीते फरवरी में नासा ने पर्सिवियरेंस रोवर को मार्स की सतह पर उतारा था। इसके साथ एक ड्रोन हेलीकोप्टर भी है। नासा का यह मिशन मंगल ग्रह पर अतीत में जीवन होने की संभावनाओं को तलाशेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले मंगल ग्रह पर पानी था। इस कारण हो सकता है कि वहां पर सूक्ष्म स्तर पर जीवन की संभावना भी रही होगी। 

माना जाता है कि करोड़ों साल पहले नौएचियन समय काल में यहां पर जीवन था। पृथ्वी की तरह यहां पर बड़े पैमाने पर समुद्र और नदियां बहा करती थी। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि हो ना हो वहां पर जरूर सूक्ष्म जीवों के लिए एक हेबिटेबल वातावरण था। पर मंगल ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड समय के साथ धीरे-धीरे कमजोर होती गई। इस कारण अंतरिक्ष की जानलेवा किरणें सीधे उसके वातावरण को विच्छेद करने लगीं, जिसके चलते मंगल का वातावरण कमजोर हो गया। कमजोर वातावरण के चलते धीरे-धीरे वहां पर कार्बन डाइऑक्साइड का प्रभाव बढ़ने लगा। इस वजह से मंगल ग्रह गर्म हो गया। यहां पर जितना पानी था वह या तो अंतरिक्ष में उड़ गया यह ग्रह के दोनों ध्रुवों पर बर्फ बन कर जम गया।

नीलमः इसी के साथ प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यही संपन्न होता है। अब बारी है श्रोताओं के पत्रों की...

पहला पत्र हमें भेजा है, केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं आदरणीय अनिलजी एवं नीलमजी, नमस्कार। हर बार की तरह दिनांक 8 अप्रैल को पेश साप्ताहिक 'टी टाइम' का ताज़ा अंक भी पूरी तल्लीनता से सुना। जिसमें दी गयी तमाम सूचना और जानकारी उपयोगी लगी। ग़म है तो बस, इस बात का कि कार्यक्रम सुन उस पर प्रतिक्रिया भेजने वाले श्रोताओं की संख्या काफी घट गई है।

अंतरिक्ष का 95 फीसद हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से मिल कर बना होने और इसी के ब्रह्मांड का आधार होने सम्बन्धी जानकारी अत्यंत ज्ञानवर्ध्दक लगी। चौंकाने वाली बात तो यह लगी कि शेष पांच प्रतिशत हिस्से में ग्रह, नक्षत्र, तारे आदि तमाम भौतिक पदार्थ समाये है। इससे ब्रह्मांड की विशालता का भी पता चलता है।

दिल्ली की एक सीनियर बैंक अधिकारी के मुंह के जटिल ऑपरेशन के साथ यह भी बतलाया गया कि यह बीमारी उन्हें जन्मजात थी। जो बात समझ में नहीं आयी, वह यह है कि यदि बीमारी जन्मजात थी, तो उन्हें बैंक की नौकरी कैसे मिली। क्या इसमें विरोधाभास का आभास नहीं होता ?  हाँ, अमेरिका में 400 साल पुराने एक द्वीप पर इसी 1 जून को खुलने वाले पहले होटल पर दी गयी जानकारी अवश्य रुचिकर लगी। 

जानकारियों के क्रम में न्यू मैक्सिको में एक ऑफ ड्यूटी फायर फाइटर द्वारा एक कार से मधुमक्खियों के झुंड को कार से निकालने की कोशिश में जो कुछ घटित हुआ, वह चौंकाने वाला है, परन्तु यहां भी विरोधाभास बना हुआ है। समझ में नहीं आता कि कोई शख्स पार्किंग में अपनी कार खड़ी कर किराने की दुकान पर कुछ सामान खरीदने गया और लौटने पर पाया कि मधुमक्खियों ने उसकी कार की खिड़की पर अपना छत्ता बना लिया था। मेरी राय में मधुमक्खियां कहीं भी बड़ी तादाद में मंडरा तो सकती हैं, परन्तु इतनी ज़ल्द छत्ता बनाना मुमकिन नहीं है। क्योंकि छत्ता बनने की प्रक्रिया काफी लम्बी और श्रमसाध्य होती है।  आपने मुझ द्वारा प्रेषित जोक्स को कार्यक्रम का हिस्सा बनने योग्य समझा, इस एवं आज की प्रस्तुति के लिये हार्दिक धन्यवाद।

सुरेश जी प्रोग्राम के बारे में टिप्पणी भेजने और लगातार पत्र व्यवहार करने के लिए आपका शुक्रिया।

अनिलः दोस्तो, अब पेश है खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे का खत। लिखते हैं, सबसे पहले आप सभी को हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें। आप सभी को भी नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं। लिखते हैं कि हमें पिछला टी-टाइम कार्यक्रम बेहद लाजवाब लगा । कार्यक्रम में सबसे पहले अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी से अवगत कराया गया ।

साथ ही दिल्ली की एक महिला के अनोखे ऑपरेशन के बारे में जानकर बेहद अच्छा लगा । ईश्वर उस महिला को लंबी उम्र दे। साथ ही आपने मधुमक्खियों को लेकर जो जानकारी दी, वह सच में काफी हैरान करने वाली थी। इसके साथ ही कार्यक्रम में पेश हिन्दी गीत, मजेदार चुटकुले और श्रोताओं की टिप्पणियां बहुत कर्णप्रिय लगीं। धन्यवाद।

दुर्गेश जी धन्यवाद।

नीलमः अब प्रस्तुत है एक और पत्र। जिसे भेजा है खुर्जा यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं भाई अनिल पाण्डेय जी बहन नीलम जी, सप्रेम नमस्ते।

कार्यक्रम टी टाइम आपकी सुंदर प्रस्तुति में सुनकर दिल खुशी से झूम उठा। कार्यक्रम की जितनी भी प्रंशसा की जाए उतनी ही कम है।

कार्यक्रम में आकाश गंगा के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रंशसा योग्य लगी।

वहीं अगली जानकारी दिल्ली से बतायी गयी, जिसमें 30 वर्षीय महिला आस्था मोगिया पंजाब नेशनल बैंक में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं जिनका मुंह 30 साल से बंद था। सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दिया और अब वह महिला बिलकुल ठीक है। हम इस कठिन ऑपरेशन को अंजाम देने वाले डॉक्टरों का दिल से शुक्रिया प्रकट करते हैं। इस ऑपरेशन को करने में कितना खर्चा आया यह भी बताते तो और भी अच्छा होता।

कार्यक्रम में अमेरिका में 400 साल पुराने एक द्धीप पर एक होटल तैयार किया गया जो कि 1 जून 2021 से खोल दिया जायेगा वाली जानकारी सुनी और पसंद आयी। वहीं मधुमक्खियों के हमले वाली जानकारी भी सुनी।कार्यक्रम में गीत दीदी तेरा देवर दीवाना सुनकर बहुत ही आनंद आया।

कार्यक्रम में श्रोता बंधुओं के पत्र प्रंशसा योग्य लगे।

बेहतरीन कार्यक्रम टी टाइम सुंदर प्रस्तुति में सुनवाने के लिये भाई अनिल पाण्डेय जी व बहन नीलम जी आप बधाई के पात्र है।

अरोड़ा जी प्रोग्राम के बारे में विस्तार से लिखने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

अनिलः इसी के साथ श्रोताओं की टिप्पणी यही संपन्न होती है। अब बारी है शानदार जोक्स की। जो कि हमें केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल ने भेजे हैं।

पहला जोक

एक सौ साल के बुजुर्ग दारू पी रहे थे।

किसी पत्रकार ने प्रश्न किया:- बाबा जी,  क्यों पीते हो? इससे लीवर खराब हो जाता है! आदमी जल्दी मर जाता है ।

बुज़ुर्ग बोला: क्या करूं बेटा आदत पड़ गई है । शराब पिये बिना चैन नहीं आता ।

पत्रकार: आपको कोई टोकता नहीं ?

बाबा: बेटा क्या बताऊँ, जो लोग टोका-टाकी करते थे वे सब ऊपर चले गए । आज बहुत दिनों बाद तुमने टोका है।

दूसरा जोक

बीवी- सुनो जी, जब हमारी नयी-नयी शादी हुई थी, तो जब मैं खाना बनाकर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे, मुझे ज्यादा खिलाते थे।

संता-तो

बीवी- तो अब ऐसा क्यों नहीं करते।

संता- क्योंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गयी हो।

तीसरा और अंतिम जोक..

एक पति ने खुद ही आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया।

किचन में गया और चार पीस ब्रेड सेंकी और हरी चटनी लगाकर खा लिया।

अब बेचारा एक घंटे से चुपचाप बैठा है।

पत्नी बार-बार पूछ रही है कि मेहँदी भिगोई थी कहां गई। बेचारा गुमसुम है।

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