तिब्बत में सक्रिय हैं एक लाख कलाकार

2021-02-22 09:05:35

 

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तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों पर हमेशा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी प्रमुख शहरों, काउंटी और जिलों में सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों सहित साहित्यिक और कलात्मक समूह हैं। सरकार के आदेश के अनुसार सांस्कृतिक और कलात्मक प्रदर्शनों को मुख्य रूप से जमीनी स्तर और आम लोगों की सेवा के लिए चलाना चाहिए। हालांकि, सभी सांस्कृतिक गतिविधियां बाजार उन्मुख संचालित होती हैं, और बेशक है कि उन्हें भी सरकारों की तरफ से कुछ वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

उदाहरण के लिए, हाल ही में तिब्बत के चांगडू शहर की मैंगकांग काउंटी में 6वें चाय हॉर्स प्राचीन मार्ग पर्यटन संस्कृति और कला महोत्सव का आयोजन किया गया है। 3800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस काउंटी में सभी लोग खुशी के समुद्र में गिर गए हैं। मानो सांस्कृतिक उत्सव के स्थल पर सभी लोग नाचते-गाते नजर आते हैं। यह कला उत्सव हर तीन साल में आयोजित किया जाता है। उद्घाटन समारोह में "प्राचीन चाय हॉर्स राइस्म", "प्राचीन मार्ग का प्यार" और "सामंजस्यपूर्ण होमलैंड" जैसे कार्यक्रम किए गये। "प्राचीन मार्ग का प्यार" प्राचीन काल में मुख्य भूमि से तिब्बत तक पारंपरिक घोड़ा कारवां व्यापार को दर्शाता है। घोड़े की रिंगटोन में दर्शकों को घोड़ा कारवां व्यापार के युग में वापस लिया गया है। एक अन्य कार्यक्रम "नमक क्षेत्र में लड़कियां" भी एक पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन है, जिसमें तिब्बत के नमक कुओं के यहां नमक बनाने वाली लड़कियों का दृश्य दिखाया गया है।

मैंगकांग काउंटी के पर्यटन संस्कृति और कला उत्सव का उद्देश्य, जातीय विशेषताओं को दिखाते हुए लोगों को संस्कृति और कला का आनंद दिलाना है। और इसे "आम लोगों का त्योहार" बनाया जाएगा। साथ ही, मैंगकांग काउंटी और बाहरी दुनिया के बीच संचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा और पर्यटन के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। मैंगकांग काउंटी के पर्यटन संस्कृति और कला उत्सव के निदेशक चुम्मी ने संवाददाताओं से कहा कि हमने मैंगकांग की लोक कला पर दीर्घकालीन शोध किया है। कार्यक्रम की प्रोग्रामिंग करते हुए हमने पूरी तरह से मैंगकांग गायन और नृत्य का मूल स्वरूप प्रस्तुत करने की कोशिश की और लोक कला के प्रति अपनी समझ और सम्मान व्यक्त किया।  

सांस्कृतिक प्रदर्शन के अलावा तिब्बत में स्थानीय साहित्य के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। आज तिब्बती भाषा का साहित्य आम आदमियों के जीवन से जुड़ा हुआ है। भिन्न भिन्न युगों में तिब्बत के उत्कृष्ट रचनाएँ और लेखक उभरे हुए हैं, जिन्हों ने देश के साहित्य को समृद्ध बनाने के लिए योगदान पेश कर दिया है। सन 1980 के दशक में स्थानीय लेखकों द्वारा तिब्बती भाषा से लिखित उपन्यास देश भर में ध्यानाकर्षक बने। तिब्बती लेखक द्वारा लिखित उपन्यास को भी देश में प्रथम अल्पसंख्यक जातीय साहित्य पुरस्कार सौंपा गया।

तिब्बती साहित्य के विकास को बढ़ाने के लिए हाल ही में राजधानी पेइचिंग में एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। चीनी लेखक संघ, चीन लेखक प्रकाशन संघ तथा तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के लेखक संघ के कुछ सदस्यों ने संगोष्ठी में भाग लिया। उन्होंने रुपांतर से तिब्बती साहित्य के विकास पर विचार विमर्श किया और यह माना है कि आज साहित्य तिब्बत और भीतरी इलाकों के लोगों के बीच संपर्क रखने का पुल भी बना है। देश के आधुनिक साहित्य में तिब्बती साहित्य की भाषा, गुणवत्ता और शुद्ध शैली की साफ धाराएँ साबित हुई हैं।  

तिब्बत विश्वविद्यालय के साहित्य स्कूल की प्रोफेसर फूबू छांगगी ने कहा कि शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद के साठ सालों में तिब्बत में भारी परिवर्तन हुआ है जो साहित्य सृजन के लिए समृद्ध सामग्रियां प्रदान करता है। इस के साथ तिब्बत में बहुसांस्कृतिक एकीकरण के बहुत जटिल सामाजिक वातावरण तैयार हो गये हैं, जिससे लेखकों को साहित्य सृजन के लिए समृद्ध आयाम मिल गया है। 

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