18 फरवरी 2021

2021-02-18 09:00:16

अनिलः सबसे पहले आपको बताते हैं यह जानकारी....

फरवरी का महीना आते ही दुनियाभर में वैलेंटाइन डे के साथ प्यार को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। प्रेम को लेकर कई लोग का तो ये भी मानना है कि विज्ञान में इसके लिए कोई जगह नहीं हैं या यूं कहें तो प्रेम विज्ञान के लिए बना ही नहीं है। लेकिन इन सब के बावजूद भी वैज्ञानिकों ने अपने शोध में प्रेम विषय को अनछुआ नहीं रखा है। तो आइए जानते हैं विज्ञान प्यार को पहली नजर में किस नजरिए से देखता है।

इस विश्लेषण में उन्होंने समय के साथ होने वाले बदलाव को भी शामिल किया है। वैज्ञानिकों की मानें तो प्रेम की शुरुआत में प्रेरित करने के लिए तीन रसायनों की भूमिका अहम होती है। नोराड्रेनालाइन, डोपामाइन और फेनाइलइथाइलामाइन ये तीन ऐसे रसायन हैं, जो हमारे दिमाग में प्रेम के प्रति भावों को सक्रिय करने में मदद करते हैं।

नोराड्रेनालाइन रसायन का काम शुरुआत करने यानी शुरुआती भावों को उकसाने में भूमिका निभाते हैं। इसके वजह से एड्रेनालाइन बनने लगता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इस दौरान हथेली पर पसीना आने जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं। इसके बाद दूसरा रसायन डोपामाइन के पैदा होने से व्यक्ति अच्छा महसूस करने लगता है।

तीसरे रसायन फेनाइलइथाइलामाइन के रिलीज होने पर व्यक्ति को अजीब सा महसूस होने लगता है। वैज्ञानिको ने प्रेम में होने की स्थिति को तीन चरणों में बांटा है। पहला है आसक्ति, जिसे अंग्रेजी में लस्ट कहते हैं, जो पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में ओस्ट्रोजन के स्तरों से संचालित होते हैं। दूसरा है आकर्षण यह बिलकुल उसी तरह के भाव पैदा करती है, जब किसी नशा करने वाला व्यक्ति तो शराब या ड्रग्स की तलब लगती है।

अंतिम चरण में इंसान को लगाव हो जाता है। जब व्यक्ति प्रेम करने वाले से नजदीकी से जुड़ता है और उसके साथ मिलकर लंबी योजनाएं बनाने लगता है, तो उस समय यह अंतिम चरण काम करने लगता है। आसक्ति के स्थिति में शरीर टेस्टोस्टेरोन या ओस्ट्रेजन का बढ़ना पृथ्वी के दूसरे स्तनपायी जीवों की तरह ही होता है।

किसी इंसान के अंदर जब बहुत अधिक खुशी के भाव पैदा होते हैं, तो दिमाग में कई कैमिकल्स पैदा होते हैं। इन कैमिकल्स में खुशियों का अहसास कराने वाला डोपामाइन, लड़ो या बच निकलो वाला भाव पैदा करने वाला एड्रेनालाइन और चौकन्ना होने का भाव पैदा करने वाला रोरेपाइनफ्रराइन इंसान में लत की तरह का प्रेम का भाव पैदा करते हैं। एड्रेनालाइन की वजह से हथेलियों में पसीना, दिल की धड़कन बढ़ना और शर्म से गाल लाल होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

नीलमः अब एक और जानकारी से रूबरू करवाते हैं। अमेरिका के रहने वाले 38 वर्षीय ब्रैड के सीने में दर्द की शिकायत थी। ऐसे में वो इलाज के लिए अस्पताल गए। अस्पताल में हुए एक्सरे से ये पता चला कि उनके सीने में एयरपॉड अटक गया है। डॉक्टर्स ने एक्सरे में पाया कि उनके फूड पाइप में एयरपॉड दिख रहा है। हालांकि, एंडोस्कोपी के जरिए इस एयरपॉड को निकाल लिया गया है। एयरपॉड की लोकेशन ऐसी थी कि शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा और फंसा नहीं।

ब्रैड के मुताबिक, जब वो सुबह उठे तो सीने में सिर्फ हल्का सा दर्द था। ऐसे में उन्होंने पानी से गरारा किया। लेकिन पानी से गरारा करने में उन्हें किसी भी तरह की कोई तकलीफ नहीं हुई। ब्रैड को कुछ शंका हुआ और उन्होंने एयरपॉड ढूंढना शुरू कर दिया। काफी खोजबीन करने के बाद जब उन्हें एयरपॉड नहीं मिला, तो घरवालों ने कहा कि तुम्हारे सीने में दर्द है, हो सकता है तुमने इसे निगल लिया हो।

इसके बाद ब्रैड सीने में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां एक्सरे से ये पता चला कि उनके फूड पाइप में एयरपॉड फंसा है। ब्रैड अपने को लकी मानते हैं क्योंकि एयरपॉड की लोकेशन ऐसी थी कि शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा और फंसा नहीं। वरना सांस लेना मुश्किल हो सकता था।

सही समय से अस्पताल पहुंच जाने के साथ ही दर्द के वजह का पता हो जाने पर डॉक्टर्स ने सर्जरी कर एंडोस्कोपी के जरिए इस एयरपॉड को निकाल लिया। सर्जरी हो जाने के बाद ब्रैड को काफी आराम मिल गया।

बता दें कि ब्रैड को डॉक्टर्स ने ये चेतावनी दी थी कि एयरपॉड अपनी जगह से खिसकर पेट या फेफड़े में भी जा सकता है, जो काफी खतरनाक हो सकता है। लेकिन अच्छी बात ये रही कि सर्जरी सफल रही। सर्जरी हो जाने के बाद ब्रैड आसानी से खाना खाए और ऑफिस भी गए।

अनिलः अब समय हो गया है अगली जानकारी का। दोस्तों प्यार  की डोर में बंधे पार्टनर्स के बीच थोड़े बहुत झगड़े तो होते रहते हैं, लेकिन इसके बाद भी एक-दूसरे के बिना रहना मुश्किल होता है। हालांकि, धीरे-धीरे ये झगड़े बड़ा मुद्दा बन जाता है, जो बाद में रिश्ता टूटने की वजह बनती है। ऐसे में कई लोग इससे बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, तो वहीं कई लोग अपने पार्टनर को सबक सिखाने की भी इच्छा रखते हैं। कुछ ऐसा ही मामला चीन से सामने आया है।

बता दें कि चीन की एक महिला ने अपने पूर्व प्रेमी के प्रति अपना आक्रोश निकालने के लिए एक अनोखे तरीके का इस्तेमाल किया। खबरों के मुताबिक, इस काम के लिए महिला ने खाना पहुंचाने वाले डिलीवरी ब्वॉय की मदद ली। डिलीवरी ब्वॉय को ऑर्डर के तौर पर इस महिला से अजीबोगरीब रिक्वेस्ट मिली। ऑर्डर तो एक कप चाय पहुंचाने का ही था, लेकिन ऑर्डर को लेकर जो टिप्पणी की गई थी वो बिल्कुल सहज नहीं थी।

पूर्व प्रेमी से नाराज महिला ने ऑर्डर में उसे दूध की चाय ले जाकर देने के बजाए उसके चेहरे पर फेंकने के लिए कहा था। महिला ग्राहक ने लिखा, "चाय अच्छी होने की जरूरत नहीं है, बस उसके चेहरे पर वो सही तरीके से फेंकी जाए। अब आप ये जरूर सोच रहे होंगे कि डिलीवरी ब्वॉय ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकता है, क्योंकि इसके परिणाम काफी बुरे होंगे। लेकिन परिणामों की चिंता किए बिना डिलीवरी ब्वॉय ने ग्राहक के रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए इतना निस्वार्थ था कि उसने वही किया जो उससे कहा गया था।

डिलीवरी ब्वॉय ने जब ऑर्डर के मुताबिक, आदमी के चेहरे पर चाय फेंक दिया, तो उसने तुरंत अपने पूर्व प्रेमी द्वारा दिए गए निर्देशों को दिखाने के लिए उसे रसीद दे दी। डिलीवरी ब्वॉय ने माफी मांगते हुए कहा कि "क्षमा करें, मैंने अभी ग्राहक के आदेश के आधार पर काम किया है।"

खबरों के मुताबिक, इस घटना पर फूड कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान दिया कि कंपनी मामले की जांच करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर डिलीवरी ब्वॉय को ऐसा लग रहा था कि यह अनुचित निर्देश नहीं है, तो ऐसे आदेश को अस्वीकार कर सकता था।

नीलमः अब एक और जानकारी..

हरियाणा के हिसार में रहने वाले दो युवा किसानों ने अपने घर की छत पर केसर की खेती कर लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है। क्योंकि अभी तक हमारे देश में केसर की खेती जम्मू-कश्मीर में ही की जाती थी। लेकिन इन किसानों ने एक अनोखी विधि से केसर उगा कर लगभग 6 से 9 लाख रुपये का मुनाफा कमाकर सभी को हैरत में डाल दिया है।

लॉकडाउन के दौरान इन किसानों ने ऐयरोफोनिक पद्धति का इस्तेमाल कर ये करिश्मा दिखाया है। बता दें कि अभी तक इस पद्धति का उपयोग ईरान, स्पेन, चीन में केसर की फसल तैयार करने के लिए की जाती थी। वहीं हमारे देश भारत में सबसे अधिक केसर की खेती जम्मू में की जाती है और इसका सप्लाई देश ही नहीं विदेश में भी होती है। लेकिन इन किसानों के द्वारा किए गए अनोखे काम ने ये साबित कर दिया है कि मेहनत, निष्ठा, लगन से कोई भी कार्य करें, तो बड़े से बड़ा काम आसान हो जाता है।

नवीन और प्रवीण नामक ये दोनों सगे किसान भाई केसर की खेती के लिए सभी जानकारी गूगल और यूट्यूब के माध्यम से ली। इसके बाद ये दोनों केसर के बीज 250 प्रति किलो के हिसाब से ये दोनों जम्मू से लाए। लॉकडाउन में ट्रायल के तौर पर अपने आजाद नगर स्थित घर में 15 गुणा 15 साइज के कमरे की छत पर केसर की खेती की शुरुआत की और इस प्रोजेक्ट को अगस्त से नवंबर 2020 तक पूरा कर लिया।

ट्रायल के दौरान नवीन और प्रवीण ने 100 किलो से भी अधिक केसर की खेती की, जिसमें से करीब डेढ़ किलो केसर की पैदावार हुई। पहली बार केसर की खेती से इन किसानों को 6 से 9 लाख रुपये का फायदा हुआ। इन दोनों भाइयों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट लगाकर हरियाणा का किसान अपनी आय दोगुनी कर सकता है।

नए प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए 7 से 10 लाख रुपये की लागत आएगी, जिसमें कई तरह की मशीनें लगाई जाती हैं। ये प्रोजेक्ट किसान अपने घर में लगाकर एक साल में 10 से 20 लाख रुपये का मुनाफा कमा सकता है।

नवीन और प्रवीण की हरियाणा सरकार से मांग है कि केसर की खेती के लिए किसानों को सब्सिडी दी जाए, जिससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो। इतना ही नहीं यदि किसी किसान को अगर इस व्यवसाय से संबंधित कोई जानकारी चाहिए, तो ये दोनों भाई मदद करेंगे।

अनिलः जानकारी देने का सिलसिला यही संपन्न होता है। अब बारी श्रोताओं के पत्रों की। पहला पत्र हमें आया है, ,  खंडवा, मध्य प्रदेश से  दुर्गेश नागनपुरे का। शुरुआत शायरी से की है।

दोस्ती शायरी  :- 

तेरे हर एक दर्द का एहसास है मुझे,तेरी मेरी दोस्ती पर बहुत नाज़ है मुझे,क़यामत तक न बिछड़ेंगे हम दो दोस्त,कल से भी ज्यादा भरोसा आज है मुझे।

आगे लिखते हैं, प्रिय अनिल जी और बहन नीलम जी हमें दिनांक  11 फरवरी दिन गुरुवार का  प्रोग्राम बेहद पसंद आया ।

इसमें आपने बताया कि सऊदी अरब, कतर और कुवैत आदि देशों में वहां की जनता को इन्कम टैक्स नही देना पड़ता, यह जानकारी हमारे लिए नई थी, इसे सुनकर सच में बहुत अच्छा लगा ।

वही कार्यक्रम में कनाडा की एक  एंटीक दुकान के मालिक मिस्टर आर्चबाॅल्ड के बारे में बताया। जानकारी रोचक थी।

साथ ही आपने रूस की एक 24 वर्षीय रेन गार्डन नामक महिला की लवस्टोरी के बारे में भी आपके जरिए पता लगा,  वहीं हाथियों  मे पाए जाने वाले जीन्स के बारे में विस्तार से बताया। शानदार लगा। धन्यवाद।

दुर्गेश जी, हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

नीलमः अब पेश है अगला खत, जिसे भेजा है खुर्जा यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं,

भाई अनिल पाण्डेय जी बहन नीलम जी, सप्रेम नमस्ते।

कार्यक्रम टी टाइम सुनकर दिल खुशी से झूम जाता है। इस कार्यक्रम की जितनी भी प्रंशसा की जाए उतनी ही कम है। प्रोग्राम में आपने बताया कि भारत के लोगों को इनकम टैक्स देना पड़ता है, वही दुनिया के कई देश  सऊदी अरब, कतर व कुवैत के लोगों को इनकम टैक्स नही देना पड़ता है। आपने यह जानकारी सुनवायी बहुत ही पसंद आयी।

कनाडा में एक एंटीक दुकान के मालिक ने सात लाख रुपये घर खरीदा और उस घर में दो करोड़ रुपये का खजाना मिल गया। यह बहुत ही खुशी की बात है। काश हमारी भी किस्मत ऐसी हो और हमको भी ऐसा खजाना मिल जाये। 

रूस की रहने वाली नर्सरी टीचर रेन ने ब्रीफ केस से ही शादी कर ली। यह लव स्टोरी सुनकर ऐसा महसूस हो रहा है कि किसी और से प्यार करके बहुत बड़ा धोखा खाया है। हम तो ईश्वर से यह प्रार्थना करते है कि रेन को ब्रीफ केस से शादी करके सारी खुशियां प्राप्त हो।

एक शोध के अनुसार हाथियों में ऐसे जीन्स पाये जाते हैं जो कैंसर होने से रोकने में सहायक होते हैं। यह जानकारी भी सुनी और पसंद आयी।।कार्यक्रम में गीत सुनकर बहुत ही आनंद आया।

कार्यक्रम में श्रोता बंधुओं के पत्र सराहनीय लगे। जोक्स सुनकर बहुत ही ज्यादा हंसी आयी।

बेहतरीन कार्यक्रम सुनवाने के लिये आप का दिल से शुक्रिया।

शुभकामनायों सहित...

अरोड़ा जी, प्रोग्राम के बारे में टिप्पणी भेजने के लिए धन्यवाद।

अनिलः अब पेश प्रोग्राम का आखिरी ख़त, जिसे भेजा है केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं

नमस्कार, पिछले "टी टाइम" की शुरुआत नागरिकों से आयकर न लेने वाले देशों की जानकारी से किया जाना अच्छा लगा। सम्भव है कि आगे चल कर हमारे देश भारत में भी आयकर रहित व्यवस्था लागू की जाये।

बहरहाल, सऊदी अरब, कतर, ओमान तथा कुवैत आदि देशों के नागरिकों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता, यह जानकारी काफी महत्वपूर्ण लगी। 

कनाडा में एक एंटीक दुकान के मालिक मिस्टर आर्चबॉल्ड द्वारा ख़रीदे गये मकान से मिले ख़ज़ाने के बारे में सुन कर तो यही कहा जा सकता है कि -ऊपर वाला जब भी देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। 

वहीं रूस की 24 वर्षीया नर्सरी अध्यापिका रेन गॅार्डन द्वारा ब्रीफेक्स से ब्याह रचाने अथवा निर्जीव वस्तुओं में भी आत्मा का वास होने सम्बन्धी उनकी अनुभूति अनूठी लगी। ख़ैर, यह तो अपने-अपने विश्वास की बात है।

जानकारियों के क्रम में हाथियों पाये जाने वाले कैंसररोधी जीन्स पर हुये शोध के निष्कर्षों की चर्चा भी ज्ञानवर्धक लगी। धन्यवाद आज के अंक में दी गयी तमाम महत्वपूर्ण जानकारी एवं समाहित सामग्री के लिये। 

सुरेश जी, पत्र भेजने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इसी के साथ श्रोताओं की टिप्पणी समाप्त होती है। धन्यवाद..

जोक्स की बारी है

पहला जोक..

डॉक्टर - आपने आने में देर कर दी... . पप्पू (हैरान और उदासी भरे शब्दों में) - क्या हुआ डॉक्टर साहब, कितना वक्त बचा है मेरे पास...? . डॉक्टर - मर नहीं रहे हो, छह बजे का अपॉइंटमेंट था और तुम सात बजे आए हो...!!!

दूसरा जोक

पप्पू परेशान सा बैठा हुआ था... तभी गप्पू ने पूछा - क्या हुआ भाई...? . पप्पू - यार पता नहीं वो कौन से लोग हैं, जिनके सपनों में राजकुमारी या हसीनाएं आती हैं.... मेरे सपनों में तो मैं कभी मर जाता हूं, कभी गहरी खाई में गिर जाता हूं, कभी मुझे भूत उठा के ले जाते हैं...!!!

तीसरा जोक

डॉक्टर- आपके अंदर आयरन की कमी है! . . . पप्पू - तो क्या करूं, कीलें खाऊं या सरिया...!!!

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