तिब्बत में जीवित बुद्धों के पुनर्जन्म के लिए धार्मिक अनुष्ठान

2021-02-02 17:47:19

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अमेरिका ने तथाकथित "2020 तिब्बत नीति और समर्थन अधिनियम" पारित कर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया और यह दावा किया कि जीवित बुद्धा के पुनर्जन्म के प्रबंधन के लिए चीन सरकार द्वारा अपनाये गये धार्मिक अनुष्ठानों से "धार्मिक स्वतंत्रता" का उल्लंघन है। हालांकि, जीवित बुद्ध के पुनर्जन्म से राष्ट्रीय संप्रभुता, धार्मिक सिद्धांत और अनुयायिों की भावना से संबंधित हैं। सैकड़ों वर्षों के विकास के बाद जीवित बुद्धा की पुनर्जन्म प्रणाली के कठोर धार्मिक अनुष्ठान कायम हो चुके हैं। महान जीवित बुद्ध को “स्वर्ण कलश ड्रॉ” के माध्यम से तय करने और केंद्र सरकार की मंजूरी प्राप्त होने की सख्त आवश्यकता है। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सिद्धांत बन गया है जिसे बदला नहीं जा सकेगा।  

चीन तिब्बत शास्त्र अनुसंधान केंद्र के महानिदेशक जंग त्वेई के मुताबिक चीन के छिंग राजवंश के काल में बड़े जीवित बुद्ध को “स्वर्ण कलश ड्रा” के माध्यम से तय करने का धार्मिक अनुष्ठान कायम हुआ था। 8वें दलाई लामा समेत प्रतिष्ठित भिक्षुओं ने इसका समर्थन किया, और इसे लागू करने को भी कहा, वर्ष 1793 में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी हुआ था। इस दस्तावेज में 8वें दलाई लामा ने स्वर्ण कलश ड्रा के प्रति बहुत ठोस नीति-नियम बनाए, इसमें यह कहा गया कि स्वर्ण कलश ड्रा सम्राट द्वारा तिब्बती जनता और तिब्बती बौद्ध धर्म खास तौर पर गेलुग संप्रदाय को भेंट की गयी करुणा है।

पोताला महल ल्हासा के उत्तर-पश्चिम में माब्री पहाड़ पर स्थित है, जो छिंगहाई तिब्बत पठार पर एक प्रसिद्ध स्थल है। जनवरी 1822 में पोताला महल के ससॉग लैंगजे भवन में, धूमधाम से स्वर्ण कलश ड्रा आयोजित किया गया। ताकि 9वें दलाई लामा के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी की पुष्टि हो सके। 9वें दलाई लामा के पुनर्जन्म की पहचान करने की प्रक्रिया में धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य तरीकों से तीन आध्यात्मिक उत्तराधिकारी उम्मीदवारों की खोज की गई। तिब्बत की स्थानीय सरकार ने छिंग राजवंश के सम्राट से स्वर्ण बोतल ड्रॉ का आवेदन किया।

पोताला महल में स्वर्ण कलश ड्रा की रस्म आयोजित हुई। तिब्बती पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को सूर्योदय से भिक्षुओं ने शास्त्र पाठ शुरू किया, दो तिब्बती मंत्री, 7वें पंचेन लामा रिनपोचे पाल्डेन तेनपाई नइमा और तिब्बत के अधिकारी पोताला में आकर ससॉग लैंगजे भवन में छियेनलुंग सम्राट के चित्र के सामने बैठे। उस समय वेन गान तिब्बत स्थित मंत्री थे, उन्होंने स्वर्ण कलश ड्रा की अध्यक्षता की। रस्म आयोजित करके केंद्र सरकार को रिपोर्ट देने की आवश्यकता है। अंत में केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से 10वें दलाई लामा के रूप में उम्मीदवार को मंजूरी दी। सम्राट द्वारा स्वर्ण कलश ड्रा के परिणाम को मंजूदी देने का आदेश मध्य जुलाई में ल्हासा में पहुंचा। 8 अगस्त, पुनर्जन्म प्राप्त आध्यात्मिक उत्तराधिकारी ने पोताला महल में पूर्व में सम्राट की ओर से आभार व्यक्त करने के लिए घुटने टेक दिये। 7वें पंचेन लामा तेनपाई नइमा ने उन के लिये मुंडन किया और भिक्षु वस्त्र बदला। इस के बाद वे औपचारिक रूप से 10वें दलाई लामा बन गये।

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तिब्बत में बुद्ध पुनर्जन्म के मुख्य सिद्धांत 

ऐतिहासिक दृष्टि से देखें, तो पहला, सभी पुनर्जन्म वाले जीवित बुद्धों का जन्म चीन में हुआ है। दूसरा, उनके धार्मिक वंश को जीवित बुद्ध के रूप में पुनर्जन्म के लिए पात्र होने की आवश्यकता है। और तीसरा, उन्हें केंद्र सरकार की अनुमति चाहिए। स्वर्ण कलश ड्रा के माध्यम से 10वें दलाई लामा की पुष्टि के बाद उन्होंने सम्राट को एक रिपोर्ट दी, वास्तव में वह एक आभार पत्र ही था। सम्राट की स्वीकृति और उपहारों के लिए उनकी कृतज्ञता के बारे में दसवें दलाई लामा की रिपोर्ट. इसके अनुसार उन्होंने सम्राट को मंजुश्री सम्राट कहा, यानी वे सम्राट को मंजुश्री बोधिसत्व जैसा मानते थे। उन्होंने इस तरह से सम्राट का आभार जताया।

छिंग राजवंश के काल में छियेलुंग सम्राट से च्याछिंग सम्राट तक के शासनकाल में कुल मिलाकर 30 से अधिक जीवित बुद्धों की पुष्टि स्वर्ण कलश ड्रा के माध्यम से की गयी। डाओक्वांग के शासन काल में और कई महान जीवित बुद्ध स्वर्ण कलश ड्रा से पुष्ट किये गये थे। उदाहरण के लिये 10वें, 11वें, 12वें दलाई लामा और 8वें व 9वें पंचेन लामा सभी की पुष्टि स्वर्ण कलश ड्रा से की गयी , 11वें दलाई लामा, 9वें पंचेन लामा अर्दनी। सैकड़ों वर्षों के विकास से स्वर्ण कलश ड्रा प्रणाली तिब्बती बौद्ध धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान व ऐतिहासिक रीति-रिवाज़ बनी।

चीन तिब्बत शास्त्र अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक अनुसंधान विभाग के निदेशक ली देछंग के अनुसार वर्ष 1793 से चीन गणराज्य के शुरूआती समय तक, तिब्बती इतिहास में कुल 39 जीवित बुद्ध पुनर्जन्म वंशावलियां थी, जिनकी पहचान हुटुकतु से ऊपर महान जीवित बुद्ध की गयी थी। 91 नये जीवित बुद्धों में 76 की पुष्टि स्वर्ण कलश ड्रा से की गयी। अन्य 15 जीवित बुद्धों को केंद्र सरकार से विशेष अनुमति मिली, जिससे वे स्वर्ण कलश ड्रा से बच सके। कुछ महान जीवित बुद्ध केंद्र सरकार की विशेष अनुमति से स्वर्ण कलश ड्रॉ से बचे। 9वें दलाई लामा लुंग्तोक ग्यात्सो, जिनका 11 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, की पुष्टि स्वर्ण कलश ड्रॉ के बिना हुई।

वर्ष 1940 में चीनी केंद्र सरकार के प्रतिनिधि वू चोंगशिन ल्हासा पहुंचे। वू चोंगशिन द्वारा आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के निरीक्षण के बाद सरकार ने 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकार को मंजूरी दी, और उन्हें स्वर्ण कलश ड्रा से छूट दी। अप्रैल में वू चोंगशिन के नेतृत्व में 14वें दलाई लामा का उत्साह समारोह पोताला महल में हुआ। महान जीवित बुद्धों के चयन के लिये स्वर्ण कलश ड्रा की आवश्यकता है। विशेष स्थिति हो सकती है, लेकिन स्थानीय सरकार के बजाय, सिर्फ केंद्र सरकार स्वर्ण कलश ड्रा से छूट को अनुमति दे सकती है।    

सितंबर 1954 में 14वें दलाई लामा व 10वें पंचेन लामा अर्दनी ने पेइचिंग में एनपीसी व सीपीपीसीसी में भाग लिया। ल्हासा लौटकर दोनों ने अध्यक्ष माओ त्से तुंग को पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने माओ की प्रशंसा की, और माओ को थांगखा चित्र भी भेंट किया। नये दौर में 11वें पंचेन लामा अर्दनी, छठे डेट्रुक जीवित बुद्ध आदि जीवित बुद्धों की पुष्टि जोखांग मठ में बुद्ध की प्रतिमा के सामने रखे स्वर्ण कलश ड्रॉ से की गयी।

28 जनवरी 1989 को 10वें पंचेन लामा को अत्यधिक काम के कारण दिल का दौरा पड़ा। पंचेन रिनपोछे का देहांत शिकाज़े में उनके नये महल देचन केलसांग पोट्रंग में हुआ। उस समय वे 51 वर्ष के थे। देहांत से चार दिन पहले उन्होंने शिष्यों से यह कहा, शाक्यमुनि की मूर्ति के सामने स्वर्ण कलश ड्रा के जरिए पुनर्जन्म अवतारित लड़के का चयन सबसे अच्छा तरीका है। केंद्र सरकार के अनुमोदन के बाद, उस वर्ष 19 अगस्त को अवतारित लड़का खोजने का एक विशेष दल गठित हुआ, इतिहास में तिब्बती बौद्ध धर्म की पारंपरिक प्रथा और ऐतिहासिक अनुकूलन के सिद्धांत का पालन कर उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक विशेष दल गठित हुआ। छिंगहाई-तिब्बत पठार की 46 काउंटियों में कुल 28 असाधारण बच्चों की खोज की गई। तुलनात्मक विश्लेषण से तीन उम्मीदवारों की पहचान हुई।

29 नवंबर, 1995 को धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक नियमों के आधार पर स्वर्ण कलश ड्रॉ से अवतारित बालक चयन की रस्म जोखांग मंदिर में शाक्यमुनि की प्रतिमा के सम्मुख आयोजित हुई। स्टेट काउंसलर लुओ गान, तिब्बत प्रदेश सरकार के अध्यक्ष ज्यांगत्सुन लोबू, चीनी राजकीय धार्मिक मामलों के ब्यूरो के निदेशक ये श्याओ वेन ने स्वर्ण कलश से अवतारित बालक चयन की रस्म की सह-अध्यक्षता की। सर्वप्रथम राज्य परिषद के प्रतिनिधि, विशेष आयुक्त, जीवित बुद्ध और उम्मीदवारों के रिश्तेदारों द्वारा नाम पट्टिका की जाँच की गयी। इसके बाद, राज्य परिषद के विशेष आयुक्त ने नाम पट्टिका को सील बंद किया। फिर पट्टिका को तशिलहंपो मठ के वरिष्ठ भिक्षु त्सेरिंग ने स्वर्ण कलश में डाला। रस्म में गनदेन ट्रिप्पोमी रिनपोछे ने ड्राइंग करने की पवित्र जिम्मेदारी निभाई। स्वर्ण कलश के ड्रा के नाम पट्टिका की राज्य परिषद के प्रतिनिधि और विशेष आयुक्त द्वारा जांच की गयी। ल्हारी काउंटी के गाइनकेन नोरबू को पुनर्जन्म वाला आध्यात्मिक उत्तराधिकारी चुना गया। ड्रा का परिणाम अंततः राज्य परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया और उन्हें 11 वें पंचेन लामा अर्दनी छ्योगयी ग्याबो के रूप में पुष्ट किया गया।   

8 दिसंबर, 1995 को 11 वें पंचेन अर्दनी के गद्दी पर बैठने का समारोह तशिलहंपो मठ में आयोजित हुआ, स्टेट काउंसलर ली थ्ये ईंग, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ने बुकलेट की घोषणा की, और 11 वें पंचेन अर्दनी को स्वर्ण पुस्तक और स्वर्ण सील से सम्मानित किया। वर्ष 2007 में जारी "तिब्बती बौद्ध धर्म में जीवित बुद्धों के पुनर्जन्म के लिए प्रशासनिक उपाय" में जीवित बुद्ध के पुनर्जन्म से संबंधित सिद्धांतों को स्पष्ट किया गया है, और जीवित बुद्ध के पुनर्जन्म के लिए आवश्यकताएं तथा अनुमोदन के लिए प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। इससे तिब्बत, सछ्वान, युन्नान, गानसू और छिंगहाई आदि प्रांतों में जीवित बुद्धों के सुव्यवस्थित तौर पर पुनर्जन्म को सुनिश्चित किया गया है।  

तिब्बती बौद्ध धर्म में जीवित बुद्धों के पुनर्जन्म के प्रबंधन के ऐतिहासिक विकास की दृष्टि से यह पता लगा हैं कि इसके धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक अनुकूलन का सम्मान करना एक मूल सिद्धांत है जिसका पालन किया जाना चाहिए। चाहे वह स्वर्ण बोतल ड्रॉ की प्रणाली हो, केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत उत्तराधिकार प्रणाली हो, या देश के भीतर पुनर्जन्म अवतारित लड़के की खोज करने के सिद्धांत हो, ये सब तिब्बती बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक अनुकूलन और महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं जिनका पालन करना चाहिए। जो तिब्बती बौद्ध धर्म के सामान्य आदेश को बनाए रखने, धार्मिक और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एक आवश्यक शर्त है।

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