क्रिस्मस ट्री की कहानी

2020-12-25 08:47:23

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बच्चों आपने क्रिस्मस ट्री तो देखा होगा। अगर असली का क्रिस्मस ट्री नहीं देखा है, तो उसकी फोटो तो देखी ही होंगी। रंग-बिरंगे फूलों व बिजली की लड़ियों से सजा क्रिस्मस ट्री आपको काफी अच्छा लगता है न। दरअसल, इस ट्री को सजाने की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है।

चलिए, आपको क्रिस्मस ट्री के शुरू होने की कहानी बताते हैं। ठंड के महीने में एक लड़का जंगल में घूम रहा था। चूंकि सर्दी ज्यादा थी, इसलिए वह सर्दी में ठिठुर रहा था। उसने ठंड से बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा। तभी उसकी नजर एक झोंपड़ी पर पड़ी। उसे लगा कि शायद उसे वहां जगह मिल जाएगी। वह इसी उम्मीद से झोंपड़ी के पास पहुंचा। उसने दरवाजा खटखटाया। कुछ देर बाद एक लकड़हारे ने दरवाजा खोला। लड़के ने उस लकड़हारे से झोंपड़ी में ठहरने की इजाज़त मांगी। जब लकड़हारे ने ठंड में कांपते उस लड़के को देखा तो उसे लड़के पर तरस आ गया और उसने उसे अपनी झोंपड़ी में रहने की जगह दे दी। लकड़हारे की पत्नी ने लड़के का पूरा ख्याल रखा।

दरअसल, वह बच्चा एक फरिश्ता था। उसने खुश होकर लकड़हारे को कुछ उपहार देने का मन बनाया। जब सुबह हुई, तो उस लड़के ने जंगल में लगे हुए फर के पेड़ से एक तिनका निकाला और लकड़हारे को दे दिया। बालक ने लकड़हारे से कहा कि वह इसे जमीन में दबा दे। अगले साल क्रिस्मस पर इस पेड़ में फल आएंगे।

लकड़हारे ने वैसा ही किया। एक साल बाद वह पेड़ सोने के सेब और चांदी के अखरोटों से भर गया। यह था वो क्रिस्मस ट्री, जिसे आज भी हम सभी सजाते हैं।

आपको बता दें कि मॉडर्न क्रिस्मस ट्री की शुरुआत जर्मनी में हुई। उस समय एडम और ईव के नाटक में स्टेज पर फर का पेड़ लगाया जाता था। इस पर सेब लटके होते थे और स्टेज पर एक पिरामिड भी रखा जाता था। इस पिरामिड को हरे पत्ते, मोमबत्तियों से सजाया जाता था और सबसे ऊपर एक सितारा लगाया जाता था। बाद में 16वीं शताब्दी में फर का पेड़ और पिरामिड एक हो गए और इसका नाम हो गया क्रिस्मस ट्री।

यही नहीं, 18वीं शताब्दी तक क्रिस्मस ट्री बेहद पॉपुलर हो चुका था। जर्मनी के राजकुमार अल्बर्ट की पत्नी महारानी विक्टोरिया के देश इंग्लैंड में भी धीरे-धीरे यह पॉपुलर होने लगा और ब्रिटिश लोगों ने इसे मिठाईयां, केक, रीबन और रंगीन कागज लगाकर और सजा दिया। 19वीं शताब्दी तक क्रिस्मस ट्री उत्तरी अमेरिका जा पहुंचा और वहां से कुछ ही दिनों में इसने पूरी दुनिया में अपनी जगह बना ली।

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