दो प्राचीन पूर्वी देशों के प्रति प्राकृतिक उपहार-चाय

2020-12-18 12:00:00

मैं एक पत्ता हूं

एक चीनी ऋषि ने कहा

मैं दक्षिण चीन का हूं

हजारों साल पहले मैं किसी से मिला

तब मुझे विषहरण का नुस्खा माना

चीनियों के कुशल हाथों ने

मुझे एक स्वादिष्ट पेय बना दिया

प्राचीन चाय-घोड़ा मार्ग

महान नौवहन युग

या फिर पर्यटकों के थैलों में

मैंने एक लंबी यात्रा की

बार बार मुरझाने और खिलने के बाद

मुझे "चाय" कहा गया

चीनियों ने मुझे एक कड़वे पत्ते से

खुशबुदार और मीठा बना दिया

लेकिन वास्तव में मुझे

दुनिया का गैर-मादक पेय बनाने वाला

भारत था

डेढ़ सौ साल पहले

रॉबर्ट फॉर्च्यून नामक एक अंग्रेज

पहली बार मुझे भारत लाया

हालांकि, 20वीं सदी में भारतीय

चाय बनाना नहीं जानते थे

मुझे जड़ी बूटी समझा गया

लेकिन चाय संस्कृति के प्रसार से,

धीरे-धीरे जड़ें जमा लीं

हिमालय के दार्जिलिंग पठार पर

दिन में बहुत धूप रहती है

भारतीयों की खेती से,

एक अनोखी खुशबू देता हूं

"ब्लैक टी शैम्पेन" के नाम से भी

जाना जाता हूं

चीन के एक पत्ते ने

कभी नहीं सोचा कि पराए देश में

इतना प्यार मिलेगा

100 से अधिक वर्षों तक जड़ें जमाकर

मुझे इन दो प्राचीन देशों का प्रेम मिला

पिछले 30 सालों में

दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 92.8 अरब डॉलर तक पहुंचते देखा

भारत में चीन का निवेश करीब 5 अरब डॉलर है

जबकि चीन में भारत का 1 अरब डॉलर है

चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है

भारत

दक्षिण एशिया में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है

चीन भारत से कच्चा माल आयात करता है

जबकि भारत चीन से

विद्युत उत्पाद आयात करता है

एक दूसरे के बीच व्यापार

एक मजबूत पूरक है

वित्तीय संकट के दौरान भी

दोनों देशों का आर्थिक संबंध बना रहा

इस समय, भारत में 1 हजार से अधिक चीनी कंपनियां हैं

जो कि 2 लाख से ज्यादा स्थानीय रोजगार पैदा हुए

हजारों भारतीय एसएमई ने

अलीबाबा ई-कॉमर्स की मदद से तेज विकास किया

हाल के वर्षों में

मालवाहक जहाजों में

बहुत-सी नई चीजें मिलीं

चीन की "मेड इन चाइना 2025" योजना

और भारत का"मेक इन इंडिया", "डिजिटल इंडिया" आदि से

अधिकाधिक उत्पादों का

दोनों देशों के बीच व्यापार होता है

वे मेरी तरह दोनों देशों की समान बुद्धि और सहयोग से

वैश्विक लोगों का पसंदीदा उत्पाद बन गए

मैं एक पूर्वी पत्ता

गर्म पानी में डलकर

चाय बन जाता हूं

हजारों वर्षों की यात्रा में

समझ आया कि यह मिठास

दो प्राचीन पूर्वी देशों

के परिश्रम एवं बुद्धि के प्रति

प्राकृतिक उपहार है

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