16 सैन्य कथा--चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला

2018-01-09 21:31:01 CRI

 

16 सैन्य कथा--चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला

चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला 围魏救赵 

सैन्य कहानी“चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला”को चीनी भाषा में“वेइ वेई च्यु चाओ”(wéi wèi jiù zhào) कहा जाता है। इसमें पहले और दूसरे शब्द का उच्चारण मिलता जुलता है। पहला शब्द“वेइ”एक क्रिया शब्द है, जिसका अर्थ है घेरा करना, कहानी में इसका अर्थ हमला करना है। दूसरा शब्द“वेई”और चौथा शब्द“चाओ”दोनों राज्य का नाम है, जबकि तीसरा शब्द“च्यु”का अर्थ है बचाना।

ईसा पूर्व चौथी शताब्दी यानी युद्धरत राज्य काल में चीन की भूमि पर आपस में संघर्ष करने वाले कई राज्य अस्तित्व में आए। सुन पीन (sūn bìn) नाम का व्यक्ति एक सुप्रसिद्ध सैन्य विशेषज्ञ था। उसने अपने सहपाठी फांग च्वान (páng juān) के साथ एक ही गुरु से युद्ध कला सीखी। युद्ध कला पर अधिकार करने के बाद दोनों वेइ राज्य की सेवा में काम करने लगे। लेकिन फांग च्वान सुन पीन की प्रतिभा से बहुत ईर्ष्या करता था और बार-बार उसे मुसीबतों में डालने की साजिश रची, जिसके कारण सुन पीन घुटनों से अपाहिज हो गया। बाद में छी राज्य के सेनापति थिआन ची (tián jì) की मदद से सुन पीन वेइ राज्य से भागकर छी राज्य में जा बसा।

सुन पीन और फांग च्वान सहपाठी थे, लेकिन दोनों प्रतिद्वंद्वी भी थे। उनके बीच जो मशहूर युद्ध हुआ, वह चाओ राज्य को बचाने के लिए वेइ राज्य पर हमला करने के नाम से बहुत विख्यात है।

16 सैन्य कथा--चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला

सैन्य रणनीतिकार सुन पीन

ईसा पूर्व चौथी शताब्दी के समय चीन युद्धरत राज्य काल से गुजर रहा था। विभिन्न राज्यों में से वेइ राज्य ने सबसे पहले राजनीतिक और सामरिक सुधार चलाया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी शक्ति लगातार बढ़ती गई और उसने आसपास के छोटे-छोटे राज्यों का अपनी सीमा में विलय करने का अभियान चलाया। उस समय वेइ राज्य के समान शक्ति रखने वाले राज्यों में उसके पूर्व का छी राज्य और पश्चिम का छिन राज्य था। उसके पड़ोसी चाओ राज्य और व्ये राज्य  कमजोर राज्य थे।

ईसा पूर्व वर्ष 368 में छी राज्य के समर्थन में चाओ राज्य ने वेइ राज्य के मातहत व्ये राज्य पर हमला बोला, इस मौके का फायदा उठाकर वेइ राज्य की सेना ने फांग च्वान के कमान में चाओ राज्य की राजधानी हान तान को घेर लिया। अपने को बचाने के लिए चाओ राज्य ने छी राज्य से सहायता मांगी।

छी राज्य के मंत्री चोउ जी (zōu jì) ने चाओ राज्य को बचाने के विरोध में यह तर्क दिया कि इससे छी राज्य की शक्ति कमज़ोर हो सकती है। लेकिन दूसरे मंत्री तुआन कानलुन (duàn guanlún,) का मत था कि यदि वेइ राज्य ने चाओ राज्य पर विजय पायी, तो उसकी शक्ति और मजबूत होगी और वह अवश्य छी राज्य के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा। इसलिए चाओ राज्य को बचाने के लिए सेना भेजनी चाहिए।

छी राज्य के राजा ने तुआन कानलुन का सुझाव स्वीकार किया और छी राज्य के सेनापति थिआन ची के साथ सुन पीन को सैन्य सलाहकार के पद पर नियुक्त कर अस्सी हजार सैनिक   चाओ राज्य को बचाने भेजे।

सुन पीन की प्रतिभा अत्यन्त मशहूर थी। उसके बारे में घुड़दौड़ की कहानी अब भी चीन में लोकप्रिय है। जो इस प्रकार है:

छी राज्य के कुलीन वर्ग में घुड़दौड़ पर बाजी लगाने की प्रथा खूब प्रचलित थी। सेनापति थिआन ची और राजकुमारों के बीच कई बार घुड़दौड़ हुई और हार-जीत पर भारी धन की बाजी लगायी गई, लेकिन थिआन ची ज्यादा बाजी हार जाता था। यह देखकर सुन पीन ने घुड़दौड़ मैच में जाकर मैच की स्थिति का जायजा लिया और पता चला कि वास्तव में थिआन ची और राजा के घोड़ों में दौड़ की गति में खास अन्तर नहीं है। नियम के अनुसार दोनों पक्षों के घोड़े दौड़ की गति के मुताबिक तीन वर्गों में विभाजित होते हैं और समान वर्ग के घोड़े एक ही मैच में दौड़ते है। यह जानने के बाद सुन पीन ने थिआन ची को प्रोत्साहन देते हुए कहा:“अगले मैच में आप बड़ी से बड़ी बाजी लगाए, मैं आपको जीत दिलवाऊंगा।”

अगले मैच के दौरान सुन पीन ने थिआन ची को सलाह दी:“आप अपने तीसरे वर्ग के घोड़े को राजा के पहले वर्ग के घोड़े से प्रतिस्पर्धा में लगाए, फिर अपने पहले वर्ग के घोड़े को राजा के दूसरे और अपने दूसरे वर्ग के घोड़े को राजा के तीसरे वर्ग के घोड़े से दौड़ करवाएं।”

घुड़दौड़ खत्म होने पर थिआन ची ने 2-1 से दौड़ जीत ली। इसके बाद सुन पीन का नाम और ज्यादा प्रसिद्ध हो गया।

एक बार छी राज्य के राजा ने सुन पीन के साथ युद्ध कला पर चर्चा की और पूछा:“दो सेनाओं में जब युद्ध हो रहा है और दोनों का मोर्चा बहुत मजबूत हो, इसके कारण किसी को भी दूसरे पर जल्दबाजी में धावा बोलने की हिम्मत नहीं है, ऐसी स्थिति में क्या तरीका अपनाना चाहिए? ”

सुन पीन ने कहा:“एक बहादुर और अनुभवी सेनापति को थोड़ी कम सैन्य शक्ति लेकर दुश्मन को ललकारने भेजा जाया और उसे जीत के बजाय हार जाने का स्वांग रचने को कहें, ताकि दुश्मन को गुमराह किया जा सके, जबकि अपनी मुख्य सेना को चोरी छिपे दुश्मन की सेना के बगल से गुजरने को कहें और बगल की दिशा में अचानक हमला बोले, तो दुश्मन की सेना में जरूर घबराहट और गड़बड़ी मचेगी और उस पर विजय पायी जा सकती है।”

16 सैन्य कथा--चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला

चाओ को बचाने के लिए वेई पर हमला 围魏救赵 

थिआन ची और सुन पीन छी राज्य की सेना लेकर चाओ राज्य को बचाने के लिए रवाना हुए। सुन पीन ने दोनों पक्षों की सैन्य वास्तविकता का विश्लेषण कर यह फैसला लिया कि वेइ राज्य की सेना बहुत तगड़ी है। उससे सीधे तौर पर युद्ध लड़ने से छी राज्य की सेना को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए वेइ राज्य की कमजोरी पर चोट पहुंचानी होगी। इस समय वेइ राज्य की मुख्य सैन्य शक्ति चाओ राज्य की राजधानी हान तान पर आक्रमण करने भेजी गई है, वेइ राज्य की अपनी राजधानी ता ल्यांग (dà liáng) की प्रतिरक्षा शक्ति उसकी सशक्त नहीं है। उसकी इस कमजोरी का लाभ उठाकर ता ल्यांग पर चढ़ाई करें, तो अपनी राजधानी बचाने के लिए चाओ राज्य में भेजी गई वेइ राज्य की सेना को मजबूर होकर वापस आना पड़ेगा, इस तरह चाओ राज्य की राजधानी हान तान पर लगी घेराबंदी हट जाएगी।

दुश्मन सेना को भ्रम में डालने के लिए सुन पीन ने छी राज्य की एक छोटी सैन्य शक्ति को वेइ राज्य के सामरिक शहर फिंग लिंग पर हमला बोलने भेजा। नतीजा यह निकला कि छी राज्य की यह छोटी सेना बुरी तरह हार गई। इससे वेइ राज्य के सेनापति फांग च्वान को गलत-फहमी हुई कि छी राज्य की सेना बहुत कमजोर है, तो उसने निश्चिंत होकर चाओ राज्य पर हमला तेज़ कर दिया।

तभी छी राज्य की सेना ने वेइ राज्य की राजधानी ता ल्यांग पर हमला बोला। यह खबर वेइ राज्य के सेनापति फांग च्वान तक पहुंची, तो वह बहुत चिंतित हुआ। उसने तुरंत चाओ राज्य पर हमला रोक कर वापस अपनी राजधानी बचाने का निर्णय किया।

वेइ राज्य की राजधानी लौटने के लम्बे सफ़र से फांग च्वान की सेना बहुत थक गयी। रास्ते में वह फ़िर सुन पीन द्वारा रचे गए चक्र व्यूह में फंस गयी, जिससे वेइ राज्य की सेना को भारी मुंह खानी पड़ी।

सुन पीन की चाओ राज्य को बचाने के लिए वेइ राज्य पर हमला की युद्ध कला चीन के प्राचीन युद्ध इतिहास में एक आदर्श मिसाल थी, आज भी चीनी सैन्य विशेषज्ञ उसकी प्रशंसा करते हैं।


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