13 कहावत से जुड़ी कथा-- टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना

2017-12-19 21:00:01 CRI

13 कहावत से जुड़ी कथा-- टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना

 टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना 破镜重圆

कहावत से जुड़ी एक कहानी“टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना”को चीनी भाषा में“फो चिंग छोंग युआन”(pò jìng chóng yuán) कहा जाता है। इसमें“फो चिंग”का अर्थ है टूटा हुआ शीशा या दर्पण, जबकि“छोंग”का अर्थ है एक बार फिर या पुनः और“युआन”का अर्थ है गोल। कुल मिलाकर कहा जाए, तो“फो चिंगछोंग युआन”का अर्थ निकलता है टूटा हुआ शीशा या दर्पण एक बार फिर गोल बना।

“दर्पण”चीनी पारंपरिक साहित्य में व्यापक तौर पर प्रयोग किए जाने वाली चीज़ है। लेखक आम तौर पर पूर्णिमा को दर्पण का रूपक मानते हैं।    इसके साथ ही दर्पण का प्रयोग कर किसी व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं, जो कोई खामी नहीं है। कभी-कभार कहा जाता है कि किसी का मन दर्पण जैसा है, तो मतलब है कि यह व्यक्ति बहुत मन में बहुत स्पष्ट और अंतर्दृष्टि भरी है।

चीनी कहावत“टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना”यानी चीनी भाषा में“फो चिंग छोंग युआन”बहुत लोकप्रिय है, इससे जुड़ी कहानी प्राचीन काल से आज तक प्रचलित है। कहानी में सच्चे प्रेम से बंधे दंपति के जुदा होने के बाद फिर से मिलने का उल्लेख किया गया है।

कहानी छठी शताब्दी की है। उस जमाने में चीन के उत्तरी भाग में शक्तिशाली स्वेई राज्य का शासन था, जबकि दक्षिण चीन में कुछ छोटे-छोटे राज्य अलग-अलग शासन करते थे। इन छोटे राज्यों में से छन राज्य की राजधानी च्यान खांग (jiàn kāng) यानी आज पूर्वी चीन के च्यांगसू प्रांत की राजधानी नानचिंग में थी। उत्तर चीन का सशक्त स्वेई राज्य हर वक्त दक्षिण के इन छोटे राज्यों को हड़प कर देश का एकीकरण करने की ताक में था।

श्यु तेयान (xú dé yán) छन राज्य के सम्राट छन शुपाओ (Chén Shū bǎo) का एक वरिष्ठ सेवक था। उसकी पत्नी सम्राट छन शुपाओ की छोटी बहन राजकुमारी ल छांग (lè chāng) थी। दोनों पति-पत्नी में गहरा प्रेम था।

छन राज्य का शासन बहुत भ्रष्ट और पतित था। श्यु तेयान को मालूम था कि इस राज्य का एक न एक दिन जरूर विनाश होगा। इसलिए वह हमेशा चिंता में डूबा रहता था।  

एक दिन श्यु तेयान ने बड़े चिंतित लहजे में अपनी पत्नी से कहा:“हमारे राज्य में जल्द ही भारी गड़बड़ी होगी। उस समय मैं सम्राट की रक्षा करने के काम से अलग नहीं हो सकूंगा। हमारी दोनों पति-पत्नी विवश हो कर जुदा हो जाएंगे। लेकिन जब हम जिन्दा रहेंगे, तो पुनः मिलने का मौका अवश्य आएगा। हमें एक ऐसी चीज़ अपने पास सुरक्षित रखनी चाहिए, जो पुनः मिलने के समय साक्षी होगी।”

13 कहावत से जुड़ी कथा-- टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना

 टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना 破镜重圆

राजकुमारी ले छांग अपने पति की राय पर सहमत हो गई। तो श्यु तेयान ने तांबे से बना एक गोलाकार दर्पण निकाला और उसके दो टुकड़े कर दिये। उसने एक टुकड़ा अपने पास रखा और दूसरा टुकड़ा पत्नी को दे दिया।

फिर श्यु तेयान पत्नी ले छांग से कहा:“यदि हम दोनों जुदा हो गए, तो हर साल पहले माह की 15वीं तारीख को अपना-अपना आधा टुकड़ा वाला दर्पण बाजार में बेचने के नाम पर आएं, जब तक मैं जिन्दा रहूंगी, तब तक मैं ज़रूर वहां देखने जाऊंगी। यह टूटा हुआ दर्पण हमारे पुनःमिलन का साक्षी होगा।”

इसके बाद ज्यादा समय नहीं बीता। उत्तर चीन को एकीकृत कर स्वेई राज्य के सम्राट स्वेई वनती (suí wén dì) यानी यांग च्यान (yáng jiàn) ने सेना भेज कर छन राज्य की राजधानी च्यान खांग पर हमला बोला। कमजोर छन राज्य जल्द ही नष्ट कर दिया गया और उसका सम्राट भी मारा गया। इस हालत में श्यु तेयान फरार हो गया। छन राज्य पर विजय पाने में योगदान करने वाले लोगों को इनाम देने के लिए स्वेई वनती ने युद्ध के दौरान पकड़ी गई छन राज्य की राजकुमारी ले छांग को उप-पत्नी के रूप में अपने मंत्री यांग सु (yáng sù) के हवाले कर दिया।

फरार हुए श्यु तेयान को बाद में पता चला कि उसकी पत्नी ले छांग स्वेई राजवंश की राजधानी ता शिंग (dà xīng) यानी आज उत्तर पश्चिमी चीन के शानशी प्रांत की राजधानी शीआन में है, तो वह ता शिंग आ पहुंचा। हर देर रात वह दर्पण का वह आधा भाग निकाल कर अपनी पत्नी के साथ बीते सुनहरे दिन की याद करता रहता।

उसकी पत्नी पूर्व छन राज्य की कुमारी ले छांग स्वेई राजवंश के मंत्री यांग सु के भवन में छोटी पत्नी के रूप में अत्यन्त सुखी जीवन तो बिताती थी, किन्तु उसके मन में पति की याद हमेशा आया करती थी। वह भी अकसर दर्पण का अपना पास वाला आधा भाग निकाल कर बीते समय को याद करती थी।

साल के पहले माह की 15वीं तारीख का दिन आखिरकार आ गया। श्यु तेयान ता शिंग शहर के रौनक वाले बाजार में जा पहुंचा। उसने देखा कि वहां एक वृद्ध व्यक्ति ऊंचे दाम पर आधा टुकड़ा वाला एक दर्पण बेचने बैठा था,   ऊंचे दाम की वजह से कोई भी आधे दर्पण को खरीदने को तैयार नहीं था। सो वह वृद्ध व्यक्ति बाजार में एक जगह से दूसरी जगह जा रहा था। श्यु तेयान आगे बढ़ कर वृद्ध से आधा दर्पण खरीदने के बहाने पर उसके पास गया, गौर से देखने पर उसे मालूम हुआ कि यह आधा दर्पण अपनी पत्नी का ही था। असल में वह वृद्ध यांग सु भवन का सेवक था। राजकुमारी ले छांग ने अपने पति की तलाश के लिए वह आधा दर्पण उसे बाजार बेचने ले जाने को भेजा था।

पत्नी का आधा दर्पण देख कर श्यु तेयान ने एक कविता लिख कर वृद्ध सेवक को वापस राजकुमारी ले छांग को देने के लिए कहा। कविता का भावार्थ इस प्रकार था:

 दर्पण का आधा हिस्सा तेरे साथ गया

वह जब लौटा, पर तुम नहीं पहुंची

नहीं प्रतिबिंबित तेरी छवि दर्पण में

महज रही उसमें रात की चांदनी

अपने पति के पास सुरक्षित आधे भाग का दर्पण और उसकी कविता देख कर राजकुमारी ले छांग बड़े दुख और अवसाद में पड़ गयी। वह रोज आंसू बहाती  और खाने-पीने में उसका बिल्कुल भी मन नहीं लगता।  

यांग सु को जब उसकी असली स्थिति का पता चला, तो वह उसके सच्चे प्रेम से बेहद प्रभावित हुआ, तो उसने श्यु तेयान को अपने मंत्री भवन में बुलाकर राजकुमारी ले छांग को उसे सौंप दिया और दोनों को उनके गृह-स्थल वापस जाने दिया। इसके साथ ही यांग सु ने उन दोनों को बहुत सारी धन-दौलत भी भेंट की। इस तरह श्यु तेयान और ले छांग का पुनः मिलन हुआ। उनकी यह मनमोहक प्रेम कहानी बाद में चीन में टूटा दर्पण के पुनःमिलन के नाम से मशहूर हो गई।

साहित्य रचनाओं में“टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना”यानी“फो चिंग छोंग युआन”नाम के कहावत का प्रयोग आम तौर पर संबंध विच्छेद या विछोह के बाद पति-पत्नि का पुनःमिलन किया जाता है। इसके उल्टे, कभी कभार“टूटा हुआ दर्पण पुनः जुड़ना मुश्किल है”यानी चीनी भाषा में“फो चिंग नान युआन”(pò jìng nán yuán) का प्रयोग किया जाता है, इसमें“नान”का अर्थ है मुश्किल और कठिन है। इस कहावत का मतलब है कि वस्तुगत कारण से पति-पत्नी को अलग होना पड़ता है।

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