अखिल- वैल्कम बैक दोस्तों, आप सुन रहे हैं संडे के दिन, मस्ती भरा कार्यक्रम संडे की मस्ती Only on China Radio International।
यांग- चलिए दोस्तों... आज हम आपको ले चलते हैं हमारे संडे स्पेशल की तरफ, जहां आज आपको बताएंगे दोस्ती की अनोखी मिसाल के बारे में।
अखिल- दोस्तों, अब तक आपने दोस्ती के कम ही ऐसे किस्से सुने होंगे, जब किसी मुस्लिम ने हिंदू मित्र का अंतिम संस्कार कर दोस्ती का फर्ज निभाया हो, मगर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में अब्दुल रज्जाक ने अपने दोस्त संतोष सिंह ठाकुर का पूरे हिंदू रिति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दोस्ती की मिसाल कायम की है।
ऑटो रिक्शा चलाने वाले रज्जाक का अजीज दोस्त था संतोष। उनकी इस दोस्ती में धर्म कभी बाधा नहीं बना। रज्जाक ऑटो चलाता था और संतोष मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। दोनों के परिवार सोनाघाटी क्षेत्र में रहते हैं। संतोष का स्वास्थ्य करीब 12 दिन पहले बिगड़ गया। उसे टीबी और पीलिया बताया गया। अस्पताल में भर्ती संतोष की मौत हो गई।
संतोष और रज्जाक दोनों ही पेशे से मजदूर हैं, इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन रज्जाक और संतोष की पत्नी छायाबाई नहीं चाहती थी कि संतोष को लावारिस की तरह दफनाया जाए। उन्होंने यह बात जिला अस्पताल में पदस्थ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. रूपेश पद्माकर को बताई। डॉ. रूपेश पद्माकर ने सामाजिक संगठन 'जनआस्था' के संजय शुक्ला से संपर्क किया। जनआस्था की टीम के महेश साहू और उनके दोस्तों ने अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्था करा दी।









