एक बार छांग-अ को यह दिव्य दवा हाथ लग गई, और उसको मालूम नहीं था कि यह क्या चीज़ है, पर दवा की खुशबू इतनी मनमोहक थी कि पीने से वह अपने आपको रोक नहीं पाई। उसका शरीर अचानक हल्का होने लगा और धीरे-धीरे वह आकाश की ओर उड़ने लगी। उड़ती-उड़ती अंत में वह चांद पर जा पहुंची और वहां के शीत महल में रहने लगी। जब उसके पति होऊई को पता चला कि उसकी पत्नी ने दवा पी ली है और अब उससे दूर चली गई है, तो वह बहुत दुखी हो गया। इस तरह दोनों हमेशा के लिए जुदा हो गए।
अब होऊई अकेला हो गया। उसने लोगों की सेवा का काम जारी रखा। उसने अनेक युवाओं को अपना शिष्य बना कर उन्हें तीरंदाजी का कौशल सीखाया। शिष्यों में से फङमन नाम का एक व्यक्ति था। वह बहुत होशियार था। कम समय में ही उसने तीरंदाजी का बेहतरीन कौशल सीख लिया। लेकिन इस शिष्य के मन में एक दुष्ट विचार आ गया कि जब तक होऊई जीवित रहेगा, तब तक वह खुद तीरंदाजी के अव्वल नम्बर पर नहीं आ सकेगा। एक दिन जब शराब पी कर होऊई गहरी नींद में सो रहा था, तो फङमन ने उसकी तीर मार कर हत्या कर दी।









