दोस्तों, आज आप चाहे जैसे भी वक्ता हों, practice, patience और preparation से आप एक उच्च स्तर के वक्ता बन सकते हैं.
यांग- तो चलिए दोस्तों, इन बातों का ध्यान रखते हुए अपने efforts में जुट जाइए और महान वक्ताओं की श्रेणी में खुद भी शामिल हो जाइए. चलिए, अब हम अखिल जी से सुनते हैं एक प्रेरक कहानी। कहानी का शीर्षक है गन्दा तालाब।
अखिल- दोस्तों, फ्रेडी मेंढक एक तालाब के पास से गुजर रहा था, तभी उसे किसी की दर्द भरी आवाज़ सुनाई दी. उसने रुक के देखा तो फ्रैंक नाम का एक मेंढक उदास बैठा हुआ था. "क्या हुआ, तुम इतने उदास क्यों हो?" , फ्रेडी ने पुछा, "देखते नहीं ये तालाब कितना गन्दा है… यहाँ ज़िन्दगी कितनी कठिन है," फ्रैंक ने बोलना शुरू किया, "पहले यहाँ इतने सारे कीड़े-मकौड़े हुआ करते थे… पर अब मुश्किल से ही कुछ खाने को मिल पाता है… अब तो भूखा मरने की नौबत आ गयी है."
फ्रेडी बोला , "मैं करीब के ही एक तालाब में रहता हूँ, वो साफ़ है और वहां बहुत सारे कीड़े-मकौड़े भी मौजूद हैं, आओ तुम भी वहीँ चलो."
"काश यहाँ पर ही खूब सारे कीड़े होते तो मुझे हिलना नहीं पड़ता", फ्रैंक मायूस होते हुए बोला. फ्रेडी ने समझाया, "लेकिन अगर तुम वहां चलते हो तो तुम पेट भर के कीड़े खा सकते हो!"
"काश मेरी जीभ इतनी लम्बी होती कि मैं यहीं बैठे-बैठे दूर-दूर तक के कीड़े पकड़ पाता… और मुझे यहाँ से हिलना नहीं पड़ता..", फ्रैंक हताश होते हुए बोला. फ्रेडी ने फिर से समझाया, "ये तो तुम भी जानते हो कि तुम्हारी जीभ कभी इतनी लम्बी नहीं हो सकती, इसलिए बेकार की बातें सोच कर परेशान होने से अच्छा है वो करो जो तुम्हारे हाथ में है… चलो उठो और मेरे साथ चलो.."









