अखिल- वैल्कम बैक दोस्तों, आप सुन रहे हैं संडे के दिन, मस्ती भरा कार्यक्रम संडे की मस्ती Only on China Radio International ।
यांग- चलिए दोस्तों... आज हम आपको ले चलते हैं हमारे संडे स्पेशल की तरफ।
अखिल- दोस्तों, हमने आपको अपने कार्यक्रम में बताया था कि चीन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए गुईझोउ प्रांत में दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन बना रहा है, जिसे अपने सुपरकंप्यूटर स्काईआई-1 से जोड़ेगा। इस दूरबीन के डिश का आकार 30 फुटबॉल मैदान जैसा है और गुईझोउ के पहाड़ पर इसे लगाया जा रहा है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के राजस्थान के उदयपुर में फतेहसागर झील के बीच लगी इसरो की दूरबीन सूरज पर नज़र रखेगी. ये भारत की सबसे बड़ी सोलर दूरबीन है. बारह टन वज़न की करीब 18 करोड़ रुपये लागत वाली इस दूरबीन को जून में लगाया गया और हाल ही में इसका उद्घाटन हुआ है.
सोलर दूरबीन ऐसी जगह लगी होनी चाहिए जहाँ हवा के तापमान के मुकाबले सतह का तापमान कम हो. इस वजह से झीलों और तालाबों के बीच की जगह अच्छी समझी जाती है. मास्ट (मल्टी एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप) नाम की ये दूरबीन रात को भी सूरज की सतह का अध्ययन करने में सक्षम है.
यह विश्व के छह वैश्विक कंपन तंत्र समूहों (ग्लोबल ओसिलेशन नेटवर्क साइट्स) में से एक है जहाँ से सूर्य की गति पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जाती है. यहाँ से संगृहीत डाटा संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित राष्ट्रीय सौर वेधशाला में एकत्र किया जाता है.
सूरज की अधिक दमक यानी फ़्लेयर से सेटेलाइट कम्यूनिकेशन और पॉवर ग्रिड पर असर पड़ता है. इस दूरबीन की मदद से इस तरह के ख़तरों के बारे में पहले से पता चल सकेगा.
बेल्जियम में बनी 'मास्ट' दूरबीन से जुड़े सभी 'इमेजर, पोलारीमीटर और एडेप्टिव ऑप्टिक्स' वगैरह बैक एंड यंत्रों को उदयपुर की वेधशाला में ही तैयार किया गया है. यह दूरबीन वायुमंडल की धुंध की वजह से सूरज की तस्वीरों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करेगा. इससे स्थिर और साफ़ तस्वीरें ली जा सकती हैं."
यांग- दोस्तों, यह था हमारा संडे स्पेशल। चलिए... दोस्तों, अभी हम चलते हैं अजीबोगरीब और चटपटी बातों की तरफ।









