
पोटाला महल
इटली के स्थानीय समय के अनुसार 28 फरवरी को इटली के लेखक मार्को कोस्टा द्वारा लिखी गई《तिब्बत: अतीत और भविष्य का चौराहा》शीर्षक किताब का विमोचन समारोह मध्य शहर पेरुगिया में आयोजित हुआ। किताब में मुख्य तौर पर तिब्बती विकास के संदर्भ में इतिहास, धर्म, संस्कृति और अर्थतंत्र जैसे क्षेत्रों का वर्णन किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तिब्बत के बारे में व्याप्त गलतफ़हमियों को दूर कर स्पष्ट व्याख्या की गई।
लेखक मार्को कोस्टा का जन्म 20वीं सदी के 70वें दशक में हुआ। अपनी किताब में उन्होंने सरल भाषा से इटालवी पाठकों को वास्तविक और प्राचीन तिब्बत बताया। इस किताब के प्रकाशन की चर्चा करते हुए लेखक मार्को ने कहा:
"रेडियो, टीवी, अखबार और सूचना के अन्य दूसरे साधनों पर तिब्बत संबंधित विषयों पर अकसर चर्चा की जाती है। लेकिन खेद की बात यह है कि इन साधनों पर तिब्बत के साथ सही व्यवहार नहीं किया गया। आमतौर पर तिब्बत मीडिया द्वारा चीन के राजनीतिक प्रचार पर हमला करने का साधन बन गया है, न कि वास्तविक इतिहास की जानकारी लेना का।"
किताब के विमोचन रस्म में उपस्थित इटालवी पत्रकार माट्टेओ ब्रेसन ने कहा कि पत्रकार के नाते वे किताब में प्रस्तुत आंकड़ों और ऐतिहासिक विषयों पर अधिक ध्यान देते हैं। साथ ही उन्हें एक दूसरी दृष्टि से तिब्बत मुद्दे पर पश्चिमी समुदाय की निहित राजनीतिक तत्वों का मालूम हुआ। उनका कहना है:
"इस किताब में प्रस्तुत सामग्रियां और सूचनाएं सही हैं, जिससे हमें तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की आधूनिकीकरण प्रक्रिया में चीन द्वारा निभाये गये रोल और भूमिका का पता चलता है। याद रहे कि पहले तिब्बत एक बंद हुए भूदास व्यवस्था लागू करने वाला स्थान था, जहां आर्थिक लाभ नहीं उठाया जा सकता था। इस प्रकार वाले विषय लोग आमतौर पर भूल जाते हैं। लेकिन किताब में इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है। जिनमें तिब्बत के इतिहास के अलावा इस क्षेत्र में चीन का अहम आर्थिक कदम भी शामिल हैं। तिब्बत के पास रणनीतिक गैस पाइपलाइन है, जहां प्राकृतिक संसाधन प्रचुर है। पश्चिमी देशों द्वारा तिब्बत को लेकर कभी कभार तनावपूर्ण स्थिति बनाने के उद्देश्य से तिब्बत का महत्व जाहिर हुआ।"









