लिली- भाई सुरेश जी, पत्र लिखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। वाकई आपके कमेंट्स के बिना हमारा यह कार्यक्रम अधूरा रहता है। अगला पत्र भेजा हैं झारखंड से एस.बी. शर्मा जी ने। शर्मा जी लिखते हैं... सन्डे की मस्ती में फिर एक बार लिली और अखिल जी ने श्रोताओ को रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियों से रूबरू कराया और हंसी-मजाक तथा खुशियों का माहौल कायम किया। स्पेन के एक व्यक्ति का नकली दांत हाइवे जाम का कारण बन गया। रोड से जाम हटाने के लिए पुलिस को मदद लेनी पड़ी। वाकई रोचक किस्सा लगा। मैसूर में एक बकरी ने आदमी के शक्ल के दो बच्चो को जन्म दिया है जिसके दो हाथ और आदमी सर जैसा ही सर है। यह सचमुच कौतुहल का विषय है। ऐसे असमान्य बच्चे जी नहीं पाते है। बाप द्वारा अपनी बच्ची की फेसबुक की लट छुड़वाने के एवज में ऑफर दिया जाना अजीब से लगा। बन्दर और स्वामी जी का किस्सा हमें यह सीख देते हैं कि कभी भी विपत्ति से नहीं डरना चाहिए, उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। आज सबसे ज्यादा धमाल तो पति नामक बीमारी का इलाज करने वाली हास्य कविता ने मचाया, जो मेरे पूरे परिवार का हंस हंस कर पेट फूल गया। ऊपर से स्नान करने का नायब तरीका तो हमें लोट पोट होने पर मजबूर कर दिया। शुक्रिया ऐसी शानदार पेशकश के लिए।
अखिल- आपका बहुत-बहुत शुक्रिया एस.बी. शर्मा जी। हमारे कार्यक्रम की सराहना करने के लिए हम आपके बहुत आभारी हैं। हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आपको हमारा यह कार्यक्रम पसंद आता है। उम्मीद करते हैं कि आप इसी तरह हमारे इस कार्यक्रम पर अपना प्यार बरसाते रहेंगे। दोस्तों, हमें अगला पत्र मिला हैं हमारे चहेते भाई सादिक आजमी जी का। आजमगढ से भाई सादिक जी लिखते हैं... नमस्कार! नए वर्ष का आरम्भ हो चुका है और साल का आरम्भ उसी जोश भरे अदाज़ मे देखने को मिला, जब कार्यक्रम "सण्डे की मस्ती" लेकर अखिल जी अपनी सहयोगी लिलि जी को लेकर उपस्थित हुए। हम भी क्लब भवन मे साथिॆयों के साथ पूरे जोश के साथ बैठे हुए थे और भरपूर तरीके से पूरे कार्यक्रम का आनंद लिया। कार्यक्रम का आरम्भ उसी उत्साहित तरीके यानी श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं से हुआ, जो हमारे दिल को जीत लेता है।
पहली रिपोर्ट से पता चला कि किस प्रकार लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए एक आदमी के दांत सड़क पर ढूंढने में उसकी सहायता की। कीमत उस नकली दांत की नहीं थी, कीमत थी उस भावना की, जिसका परिचय लोगों ने दिया, जो नि:संदेह प्रेरणादायी है। मैसूर की बकरी के बच्चे की घटना ने तो हमें अचम्भे मे डाल दिया। इस अद्धभुत बच्चे के बारे में यही कहेंगे कि कुदरत के करिश्मा का अंत नहीं है और फेसबुक की लत छुड़वाने की खातिर 200 डालर की रकम बाप ने बेटी को देकर यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया का प्रभाव कितना गम्भीर होता जा रहा है, जो नि:संदेह बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित करता है।









