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    संडे की मस्ती 2014-12-28
    2014-12-28 19:04:02 cri

    अखिल- वैल्कम बैक दोस्तों, आप सुन रहे हैं संडे के दिन मस्ती भरा कार्यक्रम संडे की मस्ती only on China Radio International।

    दोस्तों, आजकल कई लोग मांसाहार को छोड़कर शाकाहार अपना रहे हैं। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि शाकाहार की सोच सिर्फ मनुष्यों में है तो आप बिल्कुल गलत हैं। एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि कुछ कीटभक्षी पौधे भी शाकाहार को अपना रहे हैं।

    यूट्रीकुलारिया प्रजाति के ब्लाडरवर्ट्स पौधे कीटभक्षी पौधों की प्रजाति है, जो छोटे-छोटे कीटों का आहार करते हैं। हालांकि नए अध्ययन से पता चला है कि अब ये पौधे संतुलित पोषण के लिए शैवाल और पारगों का सेवन करने लगे हैं। ये पौधे चूसक अंगों के द्वारा बिजली की तेजी से अपने शिकार को पकड़ लेते हैं और उन्हें निकल भागने से रोकने के लिए दरवाजे बंद कर देते हैं। एक बार फंस जाने के बाद कीट दम घुट जाने से मर जाते हैं, जिसके बाद पौधे उन्हें एंजाइम के रूप में विघटित कर पचा जाते हैं। शाकाहार अपनाने से पहले इन पौधों के आहार ग्रहण करने की यही प्रक्रिया रहती थी।

    ऑस्ट्रिया के वियना विश्वविद्यालय की शोधकर्ता मारियाने कोलर पेरूटका और वोलफ्रेम एडलेसनिग के अनुसार, 'ब्लाडरवर्ट प्रजाति के पौधे शैवाल और पराग जैसे आहार की ओर झुक रहे हैं।' शोधपत्रिका 'ऐनल्स ऑफ बॉटनी' के ताजा अंक में प्रकाशित इस शोध-पत्र के अनुसार, ऐसे इलाकों में जहां शैवाल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और कीटों की कमी होती है वहां शाकाहारी पौधे कीटभक्षी पौधों की अपेक्षा आकार में बड़े पाए गए।

    मीनू- अखिल जी, यह तो मैंने आज ही जाना है कि अब मांसाहारी पौधे भी शाकाहारी हो रहे हैं। वाकई कमाल की बात बताई आपने।

    अखिल- मीनू जी, इससे भी कमाल की बात बताता हूं कि कजाकस्तान का एक गांव दिन में सोता है।

    मीनू- क्या...? वो कैसे...?

    अखिल- दोस्तों, कजाकस्तान के गांव कालाची के लोग पिछले चार साल से दिन में सोने की बीमारी से परेशान हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। पिछले चार साल से दिन में नींद के शिकार हो रहे कालाची के लोग अब भूलने और दिन में एकदम ही उनींदा-सा व्यवहार करने लगे हैं।

    डॉक्टर्स भी अभी तक इसके पीछे के कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि गांव के जो लोग इस 'स्लीपिंग ऐपिडेमिक' बीमारी से पीड़ित हैं, उनके दिमाग में एक तरह का फ्लूड पाया गया है, लेकिन उसके दिमाग में बनने की वजह का पता नहीं चल पा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों का मानना है कि रूस और कजाकस्तान के पास यूरेनियम की खदानों की वजह से गांव के लोगों को इस तरह की परेशानी हो रही है।

    स्थानीय निवासियों के कहे मुताबिक पिछले चार साल में हालात यह हो गए हैं कि गांव की करीब 14 पर्सेंट पॉपुलेशन यानी लगभग 600 लोग दिन में सोने की बीमारी से पीड़ित हैं। हाल के दिनों में 60 लोगों को इस 'स्लीपिंग ऐपिडेमिक' के कारण अस्पताल ले जाया गया। ये लोग दिन में चलने और यहां तक की सही से खड़े तक नहीं हो पाते। डॉक्टर्स का मानना है कि यह मैनिनजाइटिस के लक्षण भी हो सकते हैं। उनका कहना है कि लोगों के दिमाग में एक तरह का फ्लूड इकट्ठा हो गया है। हालांकि अभी तक इसके सही कारणों का पता नहीं चल पाया है।

    वहीं, साइंटिस्ट्स की मानें तो यह यूरेनियम का भी इफेक्ट नहीं है क्योंकि उन खदानों में काम करने वालों में इस तरह के कोई लक्षण देखने को नहीं मिले हैं, तो आखिर आसपास के गांवों में ऐसा कैसे हो सकता है।

    मीनू- अरे वाह, अखिल जी, यह तो वाकई हैरान कर देने वाली बात बताई। मुझे भी समझ नहीं आ रहा है कि यह कैसे पोसिबल है। खैर... मैं बताने जा रही हूं कि 65 लाख डॉलर में बिकी एक तस्वीर, जो बन गया है एक वर्ल्ड रेकॉर्ड।

    दोस्तों, आस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर पीटर लिक ने इस हफ्ते एक वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया है। उन्होंने अपनी एक तस्वीर 'फैंटम' को 65 लाख डॉलर में बेचा है। चीनी अखबार के मुताबिक लिक की वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा गया है कि अब तक की सबसे महंगी तस्वीर बेचकर लिक ने इतिहास बनाया है।

    फैंटम एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर है, जिसमें प्रकाश की एक किरण को एरिजोना के प्राकृतिक दृश्य से गुजरते हुए दिखाया गया है। इस तस्वीर को खरीदने वाले की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। अखबार की वेबसाइट के मुताबिक, 2014 में पीटर ने इतिहास में सबसे महंगी बिकी तस्वीरों के सभी विश्व रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2010 में पीटर ने 10 लाख डॉलर में एक तस्वीर बेची थी।

    दुनिया में सबसे महंगी तस्वीरें बेचने वालों की शीर्ष 20 की लिस्ट में पीटर की चार तस्वीरें शामिल हैं। लिक ने युवावस्था में ही अपने मूल निवास ऑस्ट्रेलिया में प्रकृति के आश्चर्यों को तस्वीरों में कैद करना शुरू कर दिया था। 1984 में जब वह अमेरिका गए तो वहां पर उन्होंने मनोरम छायाकृतियों के प्रति अपने जुनून को और निखारा।

    अखिल- वाह.. मीनू जी, आपने तो वाकई गजब की बात बतलाई है। चलिए.. मैं एक खबर बताने जा रहा, जिसे सुनने के बाद सभी कहेंगे कि वाह रे बंदर, तु तो डॉक्टर निकला रे.....

    दोस्तों, कानपुर की एक घटना ने सोचने को मजबूर कर दिया कि क्या जानवर भी अकलमंद हो सकते हैं। कानपुर सेंट्रल के रेलवे स्टेशन पर एक बंदर ने अपने साथी बंदर की जान बचाने के लिए वो कर दिखाया जिसने सबको हैरत में डाल दिया।

    रेलवे स्टेशन पर एक बंदर हाई टेंशन तार से चिपक गया जिससे उसे जोर से झटका लगा और वो जमीन पर जा गिरा। बंदर के नीचे गिरते ही लोगों को लगा कि वो मर चुका है। लेकिन उसका एक साथी बंदर उसे ठीक करने में जुट गया।

    वो बंदर को होश में लाने की कोशिश करने लगा। दूर खड़े लोग ये सबकुछ अपनी आंखों से देख रहे थे और अपने मोबाइल से वीडियो बना रहे थे। उसका साथी बंदर उसे उठाकर किनारे पर ले जाता है और लगातार उसे काटने लगता है ताकि वो होश में आ सके। ये बंदर अपने साथी को बार बार पानी में गिराता है और उसे होश में लाने की कोशिश करता है। बंदर ने अपने साथी को कई बार काटा भी, कभी उसके मुंह पर, कभी उसके शरीर पर। इसे डॉक्टरी भाषा में शॉक ट्रीटमेंट कहते हैं। बंदर की ये कोशिश लगातार 1 घंटे तक चलती रही।

    जब तक ये बंदर अपने बेहोश साथी को होश में लाने की कोशिश कर रहा था, कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। लोगों को यही लगा था कि करंट लगने से बंदर की मौत हो चुकी है। लेकिन फिर जैसे चमत्कार हुआ। करंट लगने से जो बंदर बेसुध हो गया था, उसे होश आ गया। उसकी धड़कनों ने रफ्तार पकड़ ली। देखने वालों ने दांतों तले उंगली दबा ली।

    जो काम डॉक्टर करते हैं, उसे एक बंदर ने कर दिखाया। बंदर ने ठीक वही इलाज किया जिसे डॉक्टर जरूरी मानते हैं। कुदरत के सिखाए बंदर के इस ज्ञान को देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया।

    मीनू- हम्म्म.... सचमुच में उस बंदर ने अपने साथी की जान बचा ली! वाकई कमाल की बात है। उस बंदर के पास बुद्धि थी। वैसे भी अलग-अलग अनुसंधानों ने भी ये सिद्ध किया कि जीव-जंतुओं में भी बुद्धि होती है। वे प्यार, संवेदना, समझ, अपनापन सब कुछ समझते हैं।

    अखिल- आपने सही कहा मीनू जी। मैं आपकी बात से सहमत हूं। चलिए मैं बताता हूं अजमेर की अनोखी शादी के बारे में, जहां गिफ्ट में मिले पौधे।

    दोस्तों, शादियों में महंगे तोहफे तो सभी देते हैं, लेकिन राजस्थान के अजमेर में एक ऐसी शादी हुई जो लोगों के सामने मिसाल पेश करती है। ये शादी इकोफ्रेंडली हुई, जिसमें दूल्हे ने दुल्हन को पौधा लगा गमला गिफ्ट किया। यहां तक कि कागज बचाने के लिए कार्ड भी नहीं छपवाया गया। बारातियों को भी उपहार में गमले दिए गए।

    ये शादी ऐसी थी, जिसके आगे बड़ी से बड़ी शाही शादियां भी शायद फीकी ही रहे। यह पहली इकोफ्रेंडली शादी रही, जिसने सभी को पर्यावरण और प्रकृति से प्यार का संदेश दिया। जयपुर हाईकोर्ट में वकील अजीत भटनागर ने अपनी बेटी सलोनी शादी इस तरह की कि वो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

    इस शादी में हर तरफ प्रकृति का मनोरम दृश्य दिखाया गया। चारों ओर हरियाली की ही चादर बिछाई गई। बारातियों को गिफ्ट के तौर पर कोई महंगी चीजें नहीं दी, बल्कि उन्हें दिए गए पौधों के गमले और उन्हें संदेश दिया गया अधिक से अधिक पौधे लगाए। दूल्हा वरमाला के लिए मंच पर आया तो उसे दुल्हन ने अपने हाथों से गमले में लगा पौधा भेंट किया। दोनों ने इस पौधे को बच्चे की तरह पाल पोसकर बड़ा करने का संकल्प लिया। इसके बाद वरमाला हुई।

    मीनू- हां हां हां... वाकई अनोखी शादी थी। पर अखिल जी, उनकी यह शादी जरूर दूसरों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनेगी। हर किसी को पर्यावरण और प्रकृति से प्यार का संदेश फैलाना चाहिए। चलिए दोस्तों.. अभी हम आपको सुनवाते हैं एक मस्त-मस्त हिन्दी गाना... उसके बाद आपके ले चलेंगे हमारे मनोरंजन के दूसरे सेगमेंट की तरफ...

    (गाना-2)

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