अखिल- वैलकम बैक दोस्तों, आप सुन रहे हैं संडे की मस्ती अखिल और मीनू के साथ।
दोस्तों, सूचना तकनीकी के इस युग में सोशल मीडिया और तकनीकी ज्ञान का उपयोग से मुसीबत से छुटकारा पा सकते हैं। गूगल की मदद से बीटेक का छात्र सोबित शर्मा ट्रेन में छूटे अपने सामान को पाने में सफल हो गया। ग्वालियर के सोबित शर्मा मोदीनगर गाजियाबाद में डॉ. केएल मोदी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करता है। एक दिन वह अपना सारा सामान लेकर ग्वालियर जाने के लिए मेरठ गया। रात करीब 2.30 बजे उसने सामान छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की बोगी नंबर-9 में रख दिया। सामान रखने के चक्कर में सोबित ट्रेन में चढ़ नहीं पाया और गाड़ी चल दी। सोबित ने रेल रूकवाने का बहुत प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाया। उसने अपने फोन पर गूगल की मदद से जीआरपी यानि सरकारी रेलवे पुलिस का नंबर खोजना शुरू किया। उसने जीआरपी फरीदाबाद के थाना प्रभारी ललित कुमार का फोन नंबर खोज निकाला और अगले दिन सुबह करीब सवा 5 बजे फोन कर घटना की जानकारी देकर सहयोग मांगा। गाड़ी जैसे ही बल्लभगढ़ पहुंची तो थाना प्रभारी ने अपने सहयोगियों की मदद से कुछ सामान को उतार लिया। बाकि बचे सामान को पलवल स्टेशन पर उतारने में सफल रहे। दोपहर को फरीदाबाद पहुंचे छात्र सोबित सभी औपचारिकताएं पूरी कर अपना सामान लेकर ग्वालियर रवाना हो गया।
मीनू- अरे वाह..। बहुत अच्छी बात बताई आपने। हमें इससे सीख मिलती हैं कि सूचना तकनीकी के इस युग में तकनीकी का सहारा लेकर हम अपनी काफी उलझनें और मुसीबत कम कर सकते हैं।
अखिल सही कहा मीनू जी आपने। तकनीकी के इस दौर में तकनीक का ज्ञान रखना बहुत जरूरी हो गया है।
दोस्तों, जब तकनीकी की बात होने लगी है तो सोशल मीडिया की भी बात करते हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से करीब चार साल पहले लापता हुआ एक व्यक्ति मोबाइल मैसेंजर ऐप्लीकेशन व्हाट्सऐप की मदद से अपने परिवार से मिला। बलिया के बक्शी छपरा गांव का रहने वाला राजेंद्र गजेरा सिंह सेना में भर्ती नहीं हो पाने से मानसिक तौर पर परेशान होकर अपने घर से चला गया था. परिवार ने राजेंद्र के लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई. श्री लोकसेवा सार्वजनिक ट्रस्ट नामक संगठन के एक कार्यकर्ता ने उसे गुजरात के भुज में सड़क किनारे घूमते पाया. यह कार्यकर्ता उसे अपनी एनजीओ के दफ्तर ले गया और फिर उसे एक मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया. एनजीओ ने सिंह के निवास स्थान के बारे में पता लगाना शुरू किया और उत्तर प्रदेश व बिहार के कई जिलों की पुलिस के साथ संपर्क किया ताकि पता किया जा सके कि राजेंद्र के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज कराई गई है. ट्रस्ट के सचिव हमेंद्र जनसारी ने बताया कि इसमें सफल नहीं होने पर एनजीओ ने राजेंद्र से उसके निवास स्थान और परिवार के बारे में और जानकारी लेने का प्रयास किया. जनसारी ने कहा, 'राजेंद्र से कुछ जानकारी मिलने के बाद हमने सोशल मीडिया नेटवर्क व्हाट्सऐप का सहारा लेने का फैसला किया.' उन्होंने कहा, 'हमने राजेंद्र की फोटो और हिंदी में एक संदेश व्हाट्सऐप पर एक ग्रुप को भेजा.' बलिया में सक्रिय इस ग्रुप के साथ 5,000 से अधिक फॉलोवर जुड़े हुए थे. पिछले महीने व्हाट्सऐप पर राजेंद्र की तस्वीर देखने के बाद एक स्थानीय पत्रकार ने एनजीओ से संपर्क किया और कहा कि वह स्कूल में राजेंद्र का सहपाठी रहा है और उसका परिवार उसे ढूंढ रहा है. जल्द ही राजेंद्र की पत्नी किरण ने राजेंद्र से फोन पर बात की. किरण और राजेंद्र का भाई भुज पहुंचे और राजेंद्र से उनकी मुलाकात हुई. यह भी एक संयोग था कि उस दिन राजेंद्र की शादी की सालगिरह थी.
मीनू- अरे वाह। वाकई सोशल मीडिया का भी अपना अलग महत्व हो गया है। चलिए.. दोस्तों, आज मैं आपको दुनिया की सबसे खर्चीली बच्ची से मिलवाती हूं।
ब्रिटेन में रहने वाली 12 साल की बच्ची चेज मेक्केना को पर्सनल घोड़े, आई पैड्स, ब्रांडेड कपड़े और हैंडबैग्स आदि दुनिया के तमाम महंगे गिफ्ट्स मिल चुके हैं। उस बच्ची को गूची, राल्फ और जूसी जैसे महंगे ब्रैंड्स खास पसंद हैं। चेज और उनके भाई-बहनों को अपने पेरेंट्स से वह सब कुछ एक बार कहने पर ही मिल जाता है जिन्हें खरीदने के बारे में लोग सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं।
बेक्सले में अपने पेरेंट्स केली और एलेन के साथ रहने वाली चेज का कहना है कि वे महंगे ब्रैंड्स के अलावा कहीं से शॉपिंग करना पसंद नहीं करती। रिटेल शॉप्स से तो वह एक सामान नहीं खरीदती हैं।
महंगे शौक और खर्चीली लाइफ स्टाइल जीने वाली चेज और उनके दो भाई-बहन वहां के चैनल 5 की एक डॉक्यूमेंट्री में भी आने वाले हैं जो दुनिया भर के सबसे खर्चीले और शॉपोहॉलिक बच्चों के बारे में बताएगी। इस डॉक्यूमेंट्री में चेज महंगे ब्रैंड जैसे राल्फ और गूची के अपने पसंदीदा कपड़ों और अपने पर्सनल घोड़े को दिखाएंगी जिसकी देखभाल के लिए चेज के पैरंट्स को एक साल में लगभग दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
बच्ची की मां कैली का कहना है कि जन्म के बाद से ही उन्होंने अपनी बच्ची चेज को ब्रैंडेड चीजें ही पहनाई हैं। मुझे लगता है कि अगर मैं अपने बच्चों को महंगे कपड़े पहनाऊंगी तो लोगों को लगेगा कि मैं अच्छी जॉब कर रही हूं। जाहिर है, अब चेज की डिमांड्स बढ़ रही हैं। और ये सारी डिमांड्स दिन-ब-दिन महंगी होती जा रही हैं।
चेज कहती हैं कि इस हफ्ते की पॉकेटमनी में से 150 पाउंड्स (लगभग 14 हजार रुपए) बचे हैं। चेज की एक हफ्ते की पॉकेटमनी लगभग 30 हजार रुपए है जो बढ़ती ही जा रही है। अभी तक चेज को अपने पैरंट्स से जितने भी गिफ्ट्स मिले हैं, उनमें सबसे ज्यादा महंगा है वह घोड़ा जिस पर एक साल में दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
अखिल- ओह...मीनू जी। यह बच्ची वाकई दुनिया की सबसे खर्चीली है। क्या किस्मत है इस बच्ची की.....। दोस्तों, आप क्या कहना चाहेंगे इस बच्ची की किस्मत के बारे में।
चलों, मैं आपको एक ऐसे शरारती बच्चे के बारे में बताता हूं जिसकी वजह से बच्चे के पिता को चाईना अम्बेसी के चक्कर लगाने पड़ गये।
दोस्तों, यूं तो Talented बच्चे पर हर माता-पिता को गर्व होता है। लेकिन यहां एक चार साल के बच्चे ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पिता को परेशानी में डाल दिया। हुआ यूं कि एक चीनी परिवार अपने बच्चे के साथ छुट्टियां बिताने दक्षिण कोरिया गया था। दिन भर घूमने के बाद जब एक दिन फैमली के सभी लोग शाम को आराम फरमा रहे थे तो बच्चे को एक पेन और मेज पर पिता का रखा हुआ पासपोर्ट मिल गया। बस फिर क्या था, बच्चे ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए पासपोर्ट पर चित्र बनाने शुरु कर दिए। पिता की फोटो पर तो खास तौर से कलाकारी दिखाई। थोड़ी देर बाद जब पिता ने बच्चे की हरकत देखी तो पासपोर्ट का हाल देख अपना माथा पीट लिया। उनकी छुट्टियां यूं ही चाईनीज एम्बेसी के चक्कर लगाते बीत गई।
मीनू- हां हां हां... जी हां अखिल जी। उनकी छुट्टियां यूं ही चाईनीज एम्बेसी के चक्कर लगाते बीत गई। इन दिनों यह ख़बर चाइना में बहुत ज्यादा हॉट है। चाइनीज सोशल साइट्स पर भी यह ख़बर धूम मचा रही है।
अखिल- जी हां मीनू जी... यह आपने सही कहा। दोस्तों, अपना पासपोर्ट, लाइसेंस आदि बहुत important documents को अपने बच्चों से दूर ही रखें। क्या मालूम कि वे कब अपनी कला का प्रदर्शन दिखा दे। चलिए...अभी हम सुनते हैं एक बढिया गाना, उसके बाद होगी ढ़ेर सारी मस्ती।
(गाना-2)









