
दोस्तो , गुट निरपेक्ष आंदोलन का दो दिवसीय 15 वां मंत्री सम्मेलन तीस जुलाई को तेहरान में संपन्न हुआ । सम्मेलन में पारित अंतिम दस्तावेज ने एकपक्षवाद , अंतर्राष्ट्रीय निरस्त्रीकरण , आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और खाद्यान्न सुरक्षा जैसे अंतर्राष्ट्रीय व क्षेत्रीय सवालों पर गुट निरपेक्ष आंदोलन का रुख व्यक्त किया । दस्तावेज का मानना है कि मौजूदा सम्मेलन दक्षिण दक्षिण सहयोग , राजनीतिक तौर पर विकासशील देशों की सहमति और संयुक्त राष्ट्र की मजबूती व गुट निरपेक्ष आंदोलन के पुनरुत्थान को बढ़ावा देने के लिये मददगार सिद्ध होगा ।
118 सदस्य देशों , 15 पर्यवेक्षकों व 8 अंतर्राष्ट्रीय व क्षेत्रीय संगठनों से आये प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शरीक हुए।
गुट निरपेक्ष आंदोलन के मौजूदा अध्यक्ष देश क्यूबा के विदेश मंत्री पेरेज का विचार है कि मौजूदा सम्मेलन में तमाम मुद्दों पर विचार विमर्श सकारात्मक व रचनात्मक वातावरण में किया गया । इस सम्मेलन में 60 देशों के विदेश मंत्रियों की मौजूदगी से गुट निरपेक्ष आंदोलन की शक्ति अभिव्यक्त हुई है , साथ ही इस से यह भी साबित हो गया है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के देशों ने फिर एक बार इस सगठन की जीवनी शक्ति को सुनिश्चित किया है । श्री पेरेज ने कहा कि मौजूदा सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय मंच पर गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के स्थान व प्रभावकारी शक्ति को उन्नत करेगा ।
सम्मेलन में पारित 102 पृष्ठों वाले अंतिम दस्तावेज में भूमंडलीय सवाल , क्षेत्रीय व उप क्षेत्रीय राजनीतिक सवाल और समाज व मानवाधिकार सवाल आदि तीन भाग शामिल हैं । सम्मेलन का विचार है कि भूमंडलीकरण की पृष्टभूमिक में गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देश वर्तमान में क्षेत्रीय सुरक्षा व शांति , आर्थिक विकास व सामाजिक प्रगति तथा मानवाधिकार व कानून जैसे क्षेत्रों में उत्पन्न गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं । अंतर्राष्ट्रीय मामलों में महा शक्तियों का एकपक्षवाद गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के सामने मौजूद सब से अहम चुनौतियों में से एक बन गया है । अतः सम्मेलन ने एकमत से इस बात के प्रति कड़ा विरोध व्यक्त किया है कि महा शक्तियां अंतर्राष्ट्रीय मामलों में एकपक्षवादी नीति कार्यांवित करें और छोटे कमजोर देशों के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध जैसे एकपक्षवादी जबरदस्त कदम उठाये ।
मानवाधिकार सवाल की चर्चा करते हुए सम्मेलन में जोर देकर कहा गया है कि तथाकथित लोकतंत्र जनता की अभिलाषा पर आधारित होना होगा । सम्मेलन का समान विचार है कि विभिन्न देशों की जनता को अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था , आर्थिक , सामाजित और सांस्कृतिक व्यवस्था चुनने का अधिकार है । सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राजनीतिक उद्देश्य लिये तथाकथित मानवाधिकार के प्रचार प्रसार की निन्दा की गयी है और कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विवादों व क्षेत्रीय सवालों के निपटारे में दोहरे मापदंड अपनाये जाने का विरोध किया है ।
सम्मेलन ने ईरानी नाभिकीय सवाल व जिम्वाबुवे सवाल पर दो वक्तव्य भी जारि किये । ईरानी नाभिकीय सवाल के बारे में वक्तव्य में कहा गया है कि नाभिकीय ऊर्जा का शांतिपूर्वक प्रयोग व विकास करना हरेक देश का अपरिहार्य अधिकार ही है , सम्मेलन ने एकमत से ईरान का नाभिकीय तकनीक का शांतिपूर्वक प्रयोग करने पर समर्थन किया है । सम्मेलन का यह भी मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी अपने सदस्य देशों की नाभिकीय गतिविधियों का निर्णय करने वाली एक मात्र कानूनी संस्था ही है । जिम्बाबुवे सवाल के बारे में वक्तव्य में इस देश के राजनीतिक संकट पर गहरी चिन्ता व्यक्त की गयी है और पश्चिमी देशों द्वारा जिम्बाबुवे सलाव पर एकपक्षवादी नीति व आर्थिक प्रतिबंध लागू किये जाने का विरोध भी किया ।
सम्मेलन में क्यूबा ने फिलिस्तीन सवाल पर गुट निरपेक्ष आंदोलन का कमेटी सम्मेलन भी बुलाया । सम्मेलन में उपस्थितों का मत है फिलिस्तीन सवाल गुट निरपेक्ष आंदोलन का प्राथमिक सवाल नहीं है , साथ ही फिलिस्तीन देश की सथापना की मदद के लिये एक अतर्राष्ट्रीय संस्था कायम करने की अपील भी की गयी।
इस के अतिरिक्त सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय निरस्त्रीकरण , अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद , जलवायु परिवर्तन और खाद्यान्न सुरक्षा जैसे सवालों पर गहन रूप से विचार विमर्श किया गया । सम्मेलन ने निरस्त्रीकरण , खारकर नाभिकीय निरस्त्रीकरण साकार करने पर दौहराया । साथ ही सम्मेलन ने नाना प्रकार की आंतकवादी हरकतों के प्रति दृढ़ विरोध व कड़ी निन्दा भी व्यक्त की ।
